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मास्टर प्लान में रिहायशी, हकीकत में कामर्शियल
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बरेली। बीडीए के मास्टर प्लान में जो इलाका रिहायशी है, वह हकीकत में पूरी तरह कामर्शियल है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम, नर्सिंग होम, होटल, बरातघर, स्कूल, किराए पर उठने वाले घर और बाजार सब कुछ इसी रोड पर हैं। इसके बावजूद मास्टर प्लान में इस इलाके को कामर्शियल घोषित नहीं किया गया, जबकि बड़ा बाईपास बनने से पहले से इस मार्ग को रामपुर-दिल्ली हाईवे कहा जाता है।
अमर उजाला टीम ने चौपुला से किला तक ओवरब्रिज तक भ्रमण कर इलाके की हकीकत समझने की कोशिश की। चौपुला ओवरब्रिज से प्रारंभ होते ही सड़क के दूसरी ओर मोटर मैकेनिकों की दुकानें, छोटे मोटे होटल और ढाबे खुले हुए हैं। जहां पर ओवरब्रिज खत्म होता है, वहां से कुछ दूर आगे चलकर रेलवे का सिटी स्टेशन शुरू हो जाता है। रोड के एक ओर तो ओवरब्रिज और सिटी स्टेशन के अलावा रेलवे लाइन ही किला पुल तक चली जाती है, लेकिन दूसरी ओर व्यवसायिक प्रतिष्ठान खुले हुए हैं। चार से पांच बड़े नर्सिंग होम हैं। उनसे पहले दुकानें हैं, जिनमें जरनल स्टोर से लेकर आम जनता के काम में आने वाला सब कुछ बिकता है। बीच में कुछ लोगों ने छोटे-छोटे मंदिर बनाकर नालों पर कब्जा कर रखा है। उनके पीछे दुकानें खुली हैं। बैंक के दफ्तर भी हैं। उसके आगे पेट्रोल पंप है। फिर छोटी-मोटी दुकानों के अलावा कुछ बड़ी शोरूम टाइप दुकानें भी हैं। हालांकि इनको पूरी तरह शोरूम नहीं कहा जा सकता। बीच में कुछ थोक और फुटकर के बड़े प्रतिष्ठान हैं। रेलवे क्रासिंग पार करते ही प्राथमिक और जूनियर स्कूल की बिल्डिंग है। उससे लगे हुए तीन से चार बड़े होटल और बरातघर हैं।
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अमर उजाला टीम ने चौपुला से किला तक ओवरब्रिज तक भ्रमण कर इलाके की हकीकत समझने की कोशिश की। चौपुला ओवरब्रिज से प्रारंभ होते ही सड़क के दूसरी ओर मोटर मैकेनिकों की दुकानें, छोटे मोटे होटल और ढाबे खुले हुए हैं। जहां पर ओवरब्रिज खत्म होता है, वहां से कुछ दूर आगे चलकर रेलवे का सिटी स्टेशन शुरू हो जाता है। रोड के एक ओर तो ओवरब्रिज और सिटी स्टेशन के अलावा रेलवे लाइन ही किला पुल तक चली जाती है, लेकिन दूसरी ओर व्यवसायिक प्रतिष्ठान खुले हुए हैं। चार से पांच बड़े नर्सिंग होम हैं। उनसे पहले दुकानें हैं, जिनमें जरनल स्टोर से लेकर आम जनता के काम में आने वाला सब कुछ बिकता है। बीच में कुछ लोगों ने छोटे-छोटे मंदिर बनाकर नालों पर कब्जा कर रखा है। उनके पीछे दुकानें खुली हैं। बैंक के दफ्तर भी हैं। उसके आगे पेट्रोल पंप है। फिर छोटी-मोटी दुकानों के अलावा कुछ बड़ी शोरूम टाइप दुकानें भी हैं। हालांकि इनको पूरी तरह शोरूम नहीं कहा जा सकता। बीच में कुछ थोक और फुटकर के बड़े प्रतिष्ठान हैं। रेलवे क्रासिंग पार करते ही प्राथमिक और जूनियर स्कूल की बिल्डिंग है। उससे लगे हुए तीन से चार बड़े होटल और बरातघर हैं।
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