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होली पर गुरु के प्रबल प्रभाव से मिटेंगे कष्ट
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बरेली। होली चैत कृष्ण प्रतिपदा में गुरुवार यानी 21 मार्च को मनाई जाएगी। एक दिन पहले होलिका दहन पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो कई अनिष्ट दूर करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक करीब सात वर्षों के बाद देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में गुरुवार को होली मनेगी। इससे सभी को मान-सम्मान और पारिवारिक सुख शांति की प्राप्ति होगी।
हिंदू नव वर्ष के साथ अबकी बार होली मनाया जाना भी शुभ है। ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि किसी कार्य या वर्ष का पहला दिन शुभ होने से उसका प्रभाव सकारात्मक होता है। इसे दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। उनके अनुसार उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में होली मनेगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्मसम्मान, उन्नति, प्रकाश और ऊर्जा का कारक है। इससे वर्ष भर सूर्य की कृपा मिलेगी। आचार्य के मुताबिक जब सभी ग्रह सात स्थानों पर होते हैं तब वीणा योग का संयोग बनता है। होली पर ऐसी स्थिति से सूर्य का पूजन किए जाने से गायन-वादन व नृत्य में निपुणता आती है।
सौभाग्य प्रदान करती है होलिका भस्म
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि होलिका दहन इस बार पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में है। यह शुक्र का नक्षत्र है, जो जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद/प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। भस्म सौभाग्य व ऐश्वर्य देने वाला होता है। होलिका दहन में जौ व गेहूं के पौधे डालते हैं। फिर शरीर में उबटन लगाकर उसके अंश भी डालते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्यता और सुख समृद्धि आती है।
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राशि अनुसार करें परिक्रमा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका की पूजा से शनि और पितृ दोष दूर होते हैं। बताया कि राशि के शुभ अंक के हिसाब से परिक्रमा की जाए तो ग्रह बाधाएं दूर हो सकती हैं। मेष राशि 9 परिक्रमा, वृष राशि 11, मिथुन 7, कर्क 28, सिंह 21, कन्या 7, तुला को 21, वृश्चिक को 28, धनु को 23, मकर को 15, कुंभ को 25, मीन को 9 परिक्रमा करनी चाहिए।
होलिका दहन का यह है शुभ समय
20 मार्च की रात 8.58 बजे से रात 12.05 बजे तक।
भद्रा का समय:
भद्रा पुंछ शाम 5.24 बजे से शाम 6.25 बजे तक।
भद्रा मुख शाम 6.25 बजे से रात 8.07 बजे तक।
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हिंदू नव वर्ष के साथ अबकी बार होली मनाया जाना भी शुभ है। ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि किसी कार्य या वर्ष का पहला दिन शुभ होने से उसका प्रभाव सकारात्मक होता है। इसे दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। उनके अनुसार उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में होली मनेगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्मसम्मान, उन्नति, प्रकाश और ऊर्जा का कारक है। इससे वर्ष भर सूर्य की कृपा मिलेगी। आचार्य के मुताबिक जब सभी ग्रह सात स्थानों पर होते हैं तब वीणा योग का संयोग बनता है। होली पर ऐसी स्थिति से सूर्य का पूजन किए जाने से गायन-वादन व नृत्य में निपुणता आती है।
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सौभाग्य प्रदान करती है होलिका भस्म
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा ने बताया कि होलिका दहन इस बार पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में है। यह शुक्र का नक्षत्र है, जो जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद/प्रमोद, ऐश्वर्य का प्रतीक है। भस्म सौभाग्य व ऐश्वर्य देने वाला होता है। होलिका दहन में जौ व गेहूं के पौधे डालते हैं। फिर शरीर में उबटन लगाकर उसके अंश भी डालते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्यता और सुख समृद्धि आती है।
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राशि अनुसार करें परिक्रमा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका की पूजा से शनि और पितृ दोष दूर होते हैं। बताया कि राशि के शुभ अंक के हिसाब से परिक्रमा की जाए तो ग्रह बाधाएं दूर हो सकती हैं। मेष राशि 9 परिक्रमा, वृष राशि 11, मिथुन 7, कर्क 28, सिंह 21, कन्या 7, तुला को 21, वृश्चिक को 28, धनु को 23, मकर को 15, कुंभ को 25, मीन को 9 परिक्रमा करनी चाहिए।
होलिका दहन का यह है शुभ समय
20 मार्च की रात 8.58 बजे से रात 12.05 बजे तक।
भद्रा का समय:
भद्रा पुंछ शाम 5.24 बजे से शाम 6.25 बजे तक।
भद्रा मुख शाम 6.25 बजे से रात 8.07 बजे तक।