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लाल फाटक ओवरब्रिज- जमीन के बदले जमीन चाहिए.. लीज पर नहीं देगा रक्षा मंत्रालय

Wed, 06 Mar 2019 12:58 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 06 Mar 2019 12:58 AM IST
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लाल फाटक ओवरब्रिज- जमीन के बदले जमीन चाहिए.. लीज पर नहीं देगा रक्षा मंत्रालय
लाल फाटक ओवरब्रिज- जमीन के बदले जमीन चाहिए.. लीज पर नहीं देगा रक्षा मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज प्रोजेक्ट फिलहाल खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। रक्षा मंत्रालय से लीज पर पुल निर्माण के लिए जमीन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कैंट बोर्ड में आए एक पत्र से साफ हो गया कि जमीन लीज पर मिलना फिलहाल मुश्किल है। पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि पुल निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली करीब 65 सौ वर्ग मीटर जमीन के बदले ऐसी ही जगह चाहिए।
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पिछले दिनों कैंट बोर्ड में आए रक्षा मंत्रालय के पत्र को लेकर सरगर्मी बनी हुई है, क्योंकि अभी तक माना जा रहा था कि बोर्ड से पारित प्रस्ताव पर चिह्नित जमीन लीज पर दे दी जाएगी। इसके बदले में उसे किराया मिलता रहेगा। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने नियमानुसार जमीन के बदले उपयुक्त स्थान मांगा था। रक्षा विभाग में यही नियम भी है। पिछले दो साल से यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय, रक्षा संपदा मुख्यालय और रक्षा मुख्यालय में चक्कर लगा रहा है। कई बार स्थानीय सांसद धर्मेंद कश्यप भी रक्षा मंत्रालय और मंत्री से भी संपर्क कर चुके हैं। हर बार उन्हें सकारात्मक जवाब भी मिला, लेकिन जमीन नहीं मिली। बोर्ड में आए नए पत्र से अफसरों का सिरदर्द बढ़ गया है क्योंकि पत्र में पूर्व में स्वीकृति हुई जमीन के बदले जमीन की सैद्धांतिक अनुमति की जानकारी, प्रस्ताव का पूरा ब्यौरा, टोल बैरियर की वर्तमान स्थिति और उससे होने वाली आय समेत जमीन की अदला-बदली की कवायद की जानकारी मांगी है। जबकि बोर्ड ने रक्षा मंत्रालय और रक्षा संपदा मुख्यालय को प्रस्ताव भेजकर जमीन लीज पर लिए जाने की अनुमति मांगी थी। पत्र में इसका कहीं कोई ब्यौरा नहीं मांगा है। इससे माना जा रहा है कि लाल फाटक ओवरब्रिज प्रोजेक्ट के लिए लीज पर जमीन मिलना फिलहाल मुश्किल ही होगा। जिला प्रशासन इसके बदले में जो जमीन देना चाह रहा है उसे कैंट बोर्ड ने पहले ही लेने से इंकार कर दिया है। क्योंकि यह जमीन गंगा किनारे खादर में है।
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‘रक्षा मंत्रालय से जारी हुए पत्र में लैंड ट्रांसफर संबंधी जानकारियां मांगी गई थीं। निर्माणाधीन ओवरब्रिज का निरीक्षण कर सभी दस्तावेज मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।’
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- आरके माहेश्वरी, एई, कैंट बोर्ड
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