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Bareilly News: राष्ट्रीय अधिवेशन में 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित उप्र इतिहास कांग्रेस का 33वां राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को पांचाल सभागार में संपन्न हुआ। इसमें विभिन्न प्रदेशों से आए शोधार्थियों ने 150 शोध प्रस्तुत किए।
आयोजन सचिव प्रोे. विजय बहादुर सिंह यादव ने बताया कि अधिवेशन में 170 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। तीन सत्र प्राचीन इतिहास, मध्यकालीन इतिहास और आधुनिक इतिहास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई। प्राचीन इतिहास सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि भारत में हेरोडोटस, लिवी, जैसे इतिहासकार पैदा नहीं हुए, लेकिन ये कहना उचित नहीं होगा कि भारतीयों में इतिहास बोध का अभाव था। प्रो. डीके चौबे ने उप्र इतिहास कांग्रेस के साथ अपने अनुभव साझा किए। प्रो. अवनीश मिश्रा ने आयोजन सचिव को उप्र इतिहास कांग्रेस का कृष्ण जैसे सारथी शब्दों से संबोधन किया। इस दौरान प्रो. रेनू शुक्ला, प्रो. अर्पणा माथुर, प्रो. एमपी अहिरवार, प्रो. एके सिनहा, प्रो. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल, डॉ. प्रिया सक्सेना, डॉ. पवन सिंह आदि मौजूद रहे।
उप्र इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष बने प्रो. श्याम बिहारी लाल
सर्व सम्मति से बैठक में उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के कार्यकारिणी को चुना गया। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग हेड ऑफ डिर्पाटमेंट प्रो. श्याम बिहारी लाल को उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। बता दे कि प्रो. श्याम इससे पहले 2015 में प्राचीन इतिहास सेक्शन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बरेली के फरीदपुर सीट से पिछली दो बार से भाजपा विधायक भी है। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार सिन्हा व दिल्ली विवि के प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे को उपाध्यक्ष, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. विजय बहादुर सिंह यादव को सचिव व काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्रो. एपी अहिरवार, डॉ. रामविलास भारती को संयुक्त सचिव व रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. अनूप रंजन मिश्रा को कोषाध्यक्ष बनाया गया। वहीं कार्यकारिणी सदस्य में फरीदाबाद के प्रो. यूपी अरोरा, प्रयागराज के प्रो. एनआर फारुकी, गोरखपुर के प्रो. एसएनआर रिजवी, प्रयागराज के प्रो. ओम प्रकाश श्रीवास्तव, देहरादून के प्रो. रेनू शुक्ला, प्रयागराज के प्रो. हर्ष कुमार, कानपुर के प्रो. शालिनी मिश्रा, प्रयागराज के डॉ. रिफाक अहमद, बरेली की डॉ. प्रिया सक्सेना, वाराणसी के प्रो.विश्वनाथ वर्मा व गोरखपुर के प्रो. दिग्विजय नाथ को चुना गया है। संवाद
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आयोजन सचिव प्रोे. विजय बहादुर सिंह यादव ने बताया कि अधिवेशन में 170 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। तीन सत्र प्राचीन इतिहास, मध्यकालीन इतिहास और आधुनिक इतिहास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई। प्राचीन इतिहास सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि भारत में हेरोडोटस, लिवी, जैसे इतिहासकार पैदा नहीं हुए, लेकिन ये कहना उचित नहीं होगा कि भारतीयों में इतिहास बोध का अभाव था। प्रो. डीके चौबे ने उप्र इतिहास कांग्रेस के साथ अपने अनुभव साझा किए। प्रो. अवनीश मिश्रा ने आयोजन सचिव को उप्र इतिहास कांग्रेस का कृष्ण जैसे सारथी शब्दों से संबोधन किया। इस दौरान प्रो. रेनू शुक्ला, प्रो. अर्पणा माथुर, प्रो. एमपी अहिरवार, प्रो. एके सिनहा, प्रो. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल, डॉ. प्रिया सक्सेना, डॉ. पवन सिंह आदि मौजूद रहे।
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उप्र इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष बने प्रो. श्याम बिहारी लाल
सर्व सम्मति से बैठक में उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के कार्यकारिणी को चुना गया। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग हेड ऑफ डिर्पाटमेंट प्रो. श्याम बिहारी लाल को उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। बता दे कि प्रो. श्याम इससे पहले 2015 में प्राचीन इतिहास सेक्शन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बरेली के फरीदपुर सीट से पिछली दो बार से भाजपा विधायक भी है। इसमें रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार सिन्हा व दिल्ली विवि के प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे को उपाध्यक्ष, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. विजय बहादुर सिंह यादव को सचिव व काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्रो. एपी अहिरवार, डॉ. रामविलास भारती को संयुक्त सचिव व रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. अनूप रंजन मिश्रा को कोषाध्यक्ष बनाया गया। वहीं कार्यकारिणी सदस्य में फरीदाबाद के प्रो. यूपी अरोरा, प्रयागराज के प्रो. एनआर फारुकी, गोरखपुर के प्रो. एसएनआर रिजवी, प्रयागराज के प्रो. ओम प्रकाश श्रीवास्तव, देहरादून के प्रो. रेनू शुक्ला, प्रयागराज के प्रो. हर्ष कुमार, कानपुर के प्रो. शालिनी मिश्रा, प्रयागराज के डॉ. रिफाक अहमद, बरेली की डॉ. प्रिया सक्सेना, वाराणसी के प्रो.विश्वनाथ वर्मा व गोरखपुर के प्रो. दिग्विजय नाथ को चुना गया है। संवाद
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