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बोर्ड के 14 सदस्य अवैध नहीं हैं तो रिकॉर्ड क्यों नहीं दिखाते

Thu, 27 Dec 2018 01:32 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Thu, 27 Dec 2018 01:32 AM IST
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बोर्ड के 14 सदस्य अवैध नहीं हैं तो रिकॉर्ड क्यों नहीं दिखाते
बरेली। बरेली कॉलेज बोर्ड ऑफ कंट्रोल के जिन 14 सदस्यों को अवैध करार दिया गया है, उनके चुनाव पर ही सवाल उठ रहा है। विश्वविद्यालय का कहना है कि बरेली कॉलेज प्रबंधन सदस्यों को अवैध बताने का तो विरोध कर रहा है, लेकिन उनके चुनाव संबंधी कोई रिकॉर्ड बार-बार मांगने के बाद भी नहीं उपलब्ध करा रहा है।
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विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक प्रो. एके जेटली के मुताबिक वर्ष 2015 में 16 लोगों ने बरेली कॉलेज के बोर्ड में सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। इसमें 14 लोगों को तो चुन लिया गया, लेकिन बाकी दो का आवेदन खारिज कर दिया गया। प्रो. जेटली का कहना है कि बायलॉज में स्पष्ट लिखा हुआ है कि बोर्ड के नए सदस्य का प्रवेश चुनाव के जरिये होगा। चुनाव हुए या नहीं, बार-बार मांगने के बाद भी इसके रिकॉर्ड उन्हें नहीं दिए गए। अब बोर्ड से चुनाव के मिनट्स मांगे जाएंगे। अगर चुनाव नहीं हुआ है तो इन लोगों की सदस्यता हर हाल में खारिज होगी।
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विश्वविद्यालय भी शासन को भेजेगा पूरी रिपोर्ट
बरेली कॉलेज को लेकर विश्वविद्यालय पूरी रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी में है। पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर शासन से बरेली कॉलेज में कंट्रोलर बैठाने की सिफारिश की जाएगी। इसमें पूर्व कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी की रिपोर्ट भी लगाई जाएगी, जिन्होंने 2001 और 2003 के बायलॉज के संशोधन को निरस्त कर दिया था। बुधवार को कुलपति ने पर्यवेक्षक के साथ बैठक भी की।
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बोर्ड मुख्य बॉडी तो प्रबंधन कैसे सर्वेसर्वा
पूर्व में जब बरेली कॉलेज मैनेजमेंट पर विवाद उठा था, तब पूर्व कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी ने एक आदेश जारी कर 2001 और 2003 वाला बायलॉज संशोधन निरस्त कर दिया था। उस रिपोर्ट के अनुसार 1885 में बरेली कॉलेज का संचालन न्यास मंडल करता था जिसके पहले अध्यक्ष कमिश्नर जेसी राबर्टसन थे। 1889 में बोर्ड ऑफ कंट्रोल बना। 1915 में कॉलेज के सारे अधिकार बोर्ड ऑफ कंट्रोल के ही पास थे। 1973 राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में मैनेजमेंट के चुनाव में पर्यवेक्षक नियुक्ति की विधिक अनिवार्यता बताई। 1988 में बरेली कॉलेज का बायलॉज विवि से अनुमोदित हुआ। उसमें कहा गया कि किसी भी तरह का मेंबर बनने के लिए सरकार से अनुमोदन होगा। विवि की अनुमति से ही बायलॉज में संशोधन होगा। इसी आदेश के अनुसार संशोधन निरस्त किए गए।

डॉ. आरपी सिंह बोले, नो कमेंट
बरेली कॉलेज में पूर्णकालिक प्राचार्य रहे डॉ. आरपी सिंह जिनका विवादों में भी काफी नाम रहा उन्हाेंने कॉलेज के मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि बरेली कॉलेेज के किसी भी मामले में उनको कुछ नहीं कहना।

कमिश्नर साहब हमारी भी सुनें, तब करें फैसला
बरेली कॉलेज के बोर्ड और मैनेजमेंट कमेटी के पूर्व सचिव केसी पाराशरी का कहना है कि कॉलेज में कभी भी कंट्रोलर नहीं बैठा। विवाद पहले भी हुए हैं। एक बार सचिव को हटाया गया था। कंट्रोलर बैठाने का नियम ही नहीं है। बोर्ड में पहले से प्रशासनिक अफसर शामिल हैं तो बाहरी व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपने का क्या मतलब। सभी बोर्ड के मेंबर चाहते हैं कमिश्नर एक बार उन लोगाें से मिलें और उनकी बात सुनें। मगर अभी तक कमिश्नर से मीटिंग नहीं हो सकी है। बोर्ड के सदस्य डॉ. एके चौहान का कहना है कि कमिश्नर को सभी के हस्ताक्षर किया हुआ एक लेटर भेजकर मिलने का समय मांगा है। कॉलेज में कंट्रोलर बैठाना समाधान नहीं है। कोई कमी है तो बोर्ड की बैठक बुलाकर समाधान करना चाहिए। अखबार में बयान देने से समस्याएं दूर नहीं होने वाली। डीएम, कमिश्नर कॉलेज से सीधे जुड़े हैं। कोई बात है तो बोर्ड मेंबरों से संवाद करना चाहिए।

दो महीने सिटी मजिस्ट्रेट ने संभाला था बरेली कॉलेज
बरेली। बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी का विवादों से पुराना नाता है। सचिव पर तमाम आरोप भी लगे, उनको पद से हटाया गया। यहां तक सदस्यता तक खत्म की गई। मगर पहली बार कंट्रोलर बैठाने की नौबत है। 2003 में कुंवर सतीश चंद्रा को सचिव पद से हटाया गया था। करीब महीने को सिटी मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बरेली कॉलेज बोर्ड में अधिकतम 60 सदस्य हो सकते हैं। इस दौरान 55 हैं। चुनाव के लिए न्यूनतम संख्या 40 होनी चाहिए जो 14 सदस्यों के अवैध होने के बाद 39 रह गई है। इसीलिए चुनाव पर विश्वविद्यालय ने रोक लगा दी। अब एक सदस्य का चुनाव हो, उसका राज्य सरकार से अनुमोदन हो उसके बाद चुनाव होगा। इसलिए कंट्रोलर बैठाने की सिफारिश की गई है। बोर्ड के जुड़े सूत्रों के अनुसार 2003 में मैनेजमेंट कमेटी को लेकर काफी विवाद हुआ था। डीएम की जांच में आरोप सही पाए गए तो सचिव को हटाया गया। इससे पहले छोटे मोटे विवाद ही हुए। इस बार मामला तूल पकड़ गया। मैनेजमेंट को हटाने की तैयारी हो गई है। चुनाव होने तक कंट्रोलर बैठ सकता है।
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