{"_id":"5cc75da2bdec2207177147ac","slug":"131556569506-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आभासी दुनिया के मकड़जाल में खुद को फंसने न दें बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आभासी दुनिया के मकड़जाल में खुद को फंसने न दें बेटियां
विज्ञापन
आभासी दुनिया के मकड़जाल में खुद को फंसने न दें बेटियां
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। इंटरनेट की दुनिया ने देशों की सरहदें खत्म कर दीं। एक ऐसा मकड़जाल बुन गया जहां मासूम सबसे ज्यादा शिकार होते हैं खासतौर से लड़कियां। सोशल मीडिया, वीडियो शेयरिंग मोबाइल एप और तमाम वेबसाइट के जरिये दुनिया भर के लोग आपस में जुड़े रहते हैं जो कब आपके लिए खतरा बन सकते हैं आप सोच भी नहीं सकते। कई बार लड़कियां शोषण का शिकार तक हो जाती हैं और बाद में अवसादग्रस्त हो जाती हैं। ‘अमर उजाला’ के अपराजिता अभियान के तहत मंगलवार को हार्टमन कॉलेज में ‘आभासी दुनिया लड़कियों के लिए कितनी सुरक्षित’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की डॉ. सुविधा शर्मा ने छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. सुविधा ने छात्राओं से बातचीत से शुरू की। पूछा कि कितने बच्चे अपने घरों में मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि ज्यादातर ने मना किया, लेकिन काउंसलिंग सेशन में सामने आया कि कई छात्राएं सोशल मीडिया के कारण परेशान हैं। उत्सुकता में उन्होंने अपने एकाउंट बनाए, लेकिन कुछ दिन बाद ही परेशानी में घिर गईं। डॉ. सुविधा ने जब एक छात्रा से बात की तो उसने बताया कि इंस्टाग्राम पर बांग्लादेश के एक लड़के से दोस्ती हुई और अब वह उसे परेशान कर रहा है। डॉ. सुविधा शर्मा ने सलाह दी कि स्नातक तक सोशल मीडिया से दूर रहे। आभासी दुनिया में माता-पिता और बच्चों में कम्युनिकेशन गैप बढ़ता जा रहा है जिस कारण बच्चियां अवसाद की शिकार हो जाती हैं। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर न करें। अनजान लोगों से दोस्ती करने से बचें। उन्होंने छात्राओं को सशक्त बनने पर जोर दिया। कहा कि बचपन से ही आत्मरक्षा के गुर सीखें। आत्मविश्वास पैदा करें कि अगर मुसीबत के वक्त वह अपनी रक्षा खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को मजबूत बनने के कुछ मूल मंत्र दिए, खुद का सम्मान करो, खुद को प्रेम करो, खुद को समझो। उन्होंने 1090, डायल 100 और 181 हेल्पलाइन की भी जानकारी दी। कहा कि मुसीबत के वक्त इन नंबरों का इस्तेमाल जरूर करें। प्रिंसिपल फादर पिटर विजय मिंज ने अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की। कार्यक्रम में विनीता टंडन, मधु वर्मा, दीप्ति अग्रवाल, सौम्या श्रीवास्तव आदि का विशेष सहयोग रहा।
विज्ञापन
डॉ. सुविधा ने छात्राओं से बातचीत से शुरू की। पूछा कि कितने बच्चे अपने घरों में मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि ज्यादातर ने मना किया, लेकिन काउंसलिंग सेशन में सामने आया कि कई छात्राएं सोशल मीडिया के कारण परेशान हैं। उत्सुकता में उन्होंने अपने एकाउंट बनाए, लेकिन कुछ दिन बाद ही परेशानी में घिर गईं। डॉ. सुविधा ने जब एक छात्रा से बात की तो उसने बताया कि इंस्टाग्राम पर बांग्लादेश के एक लड़के से दोस्ती हुई और अब वह उसे परेशान कर रहा है। डॉ. सुविधा शर्मा ने सलाह दी कि स्नातक तक सोशल मीडिया से दूर रहे। आभासी दुनिया में माता-पिता और बच्चों में कम्युनिकेशन गैप बढ़ता जा रहा है जिस कारण बच्चियां अवसाद की शिकार हो जाती हैं। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर न करें। अनजान लोगों से दोस्ती करने से बचें। उन्होंने छात्राओं को सशक्त बनने पर जोर दिया। कहा कि बचपन से ही आत्मरक्षा के गुर सीखें। आत्मविश्वास पैदा करें कि अगर मुसीबत के वक्त वह अपनी रक्षा खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को मजबूत बनने के कुछ मूल मंत्र दिए, खुद का सम्मान करो, खुद को प्रेम करो, खुद को समझो। उन्होंने 1090, डायल 100 और 181 हेल्पलाइन की भी जानकारी दी। कहा कि मुसीबत के वक्त इन नंबरों का इस्तेमाल जरूर करें। प्रिंसिपल फादर पिटर विजय मिंज ने अपराजिता कार्यक्रम की सराहना की। कार्यक्रम में विनीता टंडन, मधु वर्मा, दीप्ति अग्रवाल, सौम्या श्रीवास्तव आदि का विशेष सहयोग रहा।
विज्ञापन