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भागवत कथा का हुआ समापन
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बरेली। तुलसीनगर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर में चल रही साप्ताहिकी आध्यात्मिक श्रीमद्भावगत कथा का आज समापन हो गया। आखिरी दिन कथाव्यास पं. संतोष शास्त्री ने मौजूद श्रद्धालुओं को ईश्वर दर्शन, चिंतन और मनन का महत्व बताया।
कथाव्यास ने बताया कि व्यक्ति को सबसे पहले चिंता के बजाय चिंतन की ओर उन्मुख होना पड़ेगा। फिर मनन की स्थिति प्राप्त होगी, जिसके बाद प्रभु के संपूर्ण चराचर जगत में प्रभु के रूप का ही दर्शन होगा। बताया कि चिंतन में ही व्यक्ति दिग्भ्रमित हो जाते हैं जिसकी वजह से मनन की स्थिति ही नहीं मिल पाती। उन्होंने सभी को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चिंतन से जुड़ने का सुझाव दिया। जिसके बाद हवन पूजन के बाद प्रसाद वितरण हुआ। साथ ही कथा के विश्राम किया गया। यहां भगवती शरण बाजपेयी, आचार्य अरविंद शास्त्री, घनश्याम जोशी, पं. मुनेंद्र शर्मा, अंकुर आदि लोगों का सहयोग रहा।
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कथाव्यास ने बताया कि व्यक्ति को सबसे पहले चिंता के बजाय चिंतन की ओर उन्मुख होना पड़ेगा। फिर मनन की स्थिति प्राप्त होगी, जिसके बाद प्रभु के संपूर्ण चराचर जगत में प्रभु के रूप का ही दर्शन होगा। बताया कि चिंतन में ही व्यक्ति दिग्भ्रमित हो जाते हैं जिसकी वजह से मनन की स्थिति ही नहीं मिल पाती। उन्होंने सभी को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ चिंतन से जुड़ने का सुझाव दिया। जिसके बाद हवन पूजन के बाद प्रसाद वितरण हुआ। साथ ही कथा के विश्राम किया गया। यहां भगवती शरण बाजपेयी, आचार्य अरविंद शास्त्री, घनश्याम जोशी, पं. मुनेंद्र शर्मा, अंकुर आदि लोगों का सहयोग रहा।
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