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स्वच्छ भारत या सरकारी खजाना साफ करो मिशनः लो! कूड़ेदान में गए डेढ़ करोड़
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बरेली। केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन को अफसरों ने कमाई का जरिया बना लिया है। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर ग्राम निधि के बजट से छह हजार से ज्यादा कूड़ेदान खरीदे गए। नौ किलो से भी कम वजन के लोहे के एक कूड़ेदान की कीमत 800 रुपये भी नहीं है, लेकिन प्रधानों से 2500 रुपये के चेक कटवाकर उनका भुगतान करा लिया गया। डेढ़ करोड़ से ज्यादा के सरकारी बजट का बंदरबांट हो गया।
जिला स्तरीय अफसरों के निर्देश पर कई महीने पहले स्वच्छ भारत स्कीम के तहत 15 ब्लॉक के खंड विकास अधिकारियों ने संबंधित ग्राम पंचायतों के एडीओ और पंचायत सचिवों पर ग्राम निधि के बजट से प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ेदान खरीदने की स्कीम बनाकर अपनी ऊपरी कमाई की प्लानिंग कर ली। उसी प्लानिंग के अनुसार आबादी के हिसाब से छोटी ग्राम पंचायत में पांच और बड़ी ग्राम पंचायत में आठ से 10 या इससे अधिक कूड़ेदान खरीदे गए। नरियावल की एक दुकान से खरीदे गए कूड़ेदान का वजन नौ किलो से भी कम है। कागजों में लोहे के कूड़ेदान दिखाए गए हैं, जबकि किसी भी कूड़ेदान को गौर से देखने पर पता चलता है कि पुराने ड्रम के आधे हिस्से को काटकर ही इनकी रंगाई-पुताई कर दी गई। किसी भी कूड़ेदान की कीमत बाजार से फुटकर में भी खरीदने पर 800 रुपये से अधिक नहीं है। मगर, बीडीओ, एडीओ और सेक्रेटरी की तिकड़ी ने प्रधानों पर दबाव बनाकर प्रत्येक कूड़ेदान की खरीद 2500 रुपये की दिखाई और दुकानदार से बिल बनवाकर पेमेंट भी करा दिया। कूड़ेदानों को खरीदने के लिए नरियावल के एक दुकानदार से एग्रीमेंट किया गया। उसने भी इस गोलमाल में मोटा मुनाफा कमाया। 15 ब्लॉकों की 1193 ग्राम पंचायतों में छह हजार से ज्यादा कूड़ेदानों की खरीद हुई, इनकी कीमत बमुश्किल 30 लाख थी, लेकिन इन कूड़ेदानों की खरीद 1.5 करोड़ रुपये में दिखाकर बजट ठिकाने लगा दिया गया।
भोजीपुरा में 7.5 लाख का गोलमाल
नाम न छापने की गुजारिश पर भोजीपुरा ब्लॉक के एक पंचायत सेक्रेटरी ने बताया कि यहां 77 ग्राम पंचायतों के लिए 300 कूड़ेदान नरियावल के दुकानदार से 2500 रुपये प्रति कूड़ेदान के हिसाब से मंगाया गया। पंचायत सेक्रेटरी ने खुद स्वीकार किया कि इस कूड़ेदान की कीमत 800 रुपये भी नहीं है, लेकिन अफसरों ने दुकानदार से कूड़ेदान के बिल 2500 रुपये के हिसाब से बनवाने के निर्देश दिए। मजबूरी में उसे दुकानदार से 2500 रुपये प्रति कूड़ेदान के बिल बनवाकर प्रधान से चेक कटवाने पड़े। इस तरह अगर पंचायत सेक्रेटरी की मानें तो अकेले भोजीपुरा ब्लॉक में ही 7.5 लाख के कूड़ेदानों की खरीद हुई, जबकि इन कूड़ेदानों की वास्तविक कीमत दो लाख भी नहीं है।
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ब्लॉकों में पंचायत सेक्रेटरी और बीडीओ ने कूड़ेदानों की खरीद कराई है। इनको लो कॉस्ट पर खरीदा गया है क्योंकि मार्केट में कूड़ेदान की कीमत छह हजार थी। यह कूड़ेदान नगर निगम के मानक के अनुरूप हैं। इसमें कई जगह से कूड़ेदान खरीद में शिकायत भी आई थी। उसकी जांच कराई जा रही है। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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जिला स्तरीय अफसरों के निर्देश पर कई महीने पहले स्वच्छ भारत स्कीम के तहत 15 ब्लॉक के खंड विकास अधिकारियों ने संबंधित ग्राम पंचायतों के एडीओ और पंचायत सचिवों पर ग्राम निधि के बजट से प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ेदान खरीदने की स्कीम बनाकर अपनी ऊपरी कमाई की प्लानिंग कर ली। उसी प्लानिंग के अनुसार आबादी के हिसाब से छोटी ग्राम पंचायत में पांच और बड़ी ग्राम पंचायत में आठ से 10 या इससे अधिक कूड़ेदान खरीदे गए। नरियावल की एक दुकान से खरीदे गए कूड़ेदान का वजन नौ किलो से भी कम है। कागजों में लोहे के कूड़ेदान दिखाए गए हैं, जबकि किसी भी कूड़ेदान को गौर से देखने पर पता चलता है कि पुराने ड्रम के आधे हिस्से को काटकर ही इनकी रंगाई-पुताई कर दी गई। किसी भी कूड़ेदान की कीमत बाजार से फुटकर में भी खरीदने पर 800 रुपये से अधिक नहीं है। मगर, बीडीओ, एडीओ और सेक्रेटरी की तिकड़ी ने प्रधानों पर दबाव बनाकर प्रत्येक कूड़ेदान की खरीद 2500 रुपये की दिखाई और दुकानदार से बिल बनवाकर पेमेंट भी करा दिया। कूड़ेदानों को खरीदने के लिए नरियावल के एक दुकानदार से एग्रीमेंट किया गया। उसने भी इस गोलमाल में मोटा मुनाफा कमाया। 15 ब्लॉकों की 1193 ग्राम पंचायतों में छह हजार से ज्यादा कूड़ेदानों की खरीद हुई, इनकी कीमत बमुश्किल 30 लाख थी, लेकिन इन कूड़ेदानों की खरीद 1.5 करोड़ रुपये में दिखाकर बजट ठिकाने लगा दिया गया।
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भोजीपुरा में 7.5 लाख का गोलमाल
नाम न छापने की गुजारिश पर भोजीपुरा ब्लॉक के एक पंचायत सेक्रेटरी ने बताया कि यहां 77 ग्राम पंचायतों के लिए 300 कूड़ेदान नरियावल के दुकानदार से 2500 रुपये प्रति कूड़ेदान के हिसाब से मंगाया गया। पंचायत सेक्रेटरी ने खुद स्वीकार किया कि इस कूड़ेदान की कीमत 800 रुपये भी नहीं है, लेकिन अफसरों ने दुकानदार से कूड़ेदान के बिल 2500 रुपये के हिसाब से बनवाने के निर्देश दिए। मजबूरी में उसे दुकानदार से 2500 रुपये प्रति कूड़ेदान के बिल बनवाकर प्रधान से चेक कटवाने पड़े। इस तरह अगर पंचायत सेक्रेटरी की मानें तो अकेले भोजीपुरा ब्लॉक में ही 7.5 लाख के कूड़ेदानों की खरीद हुई, जबकि इन कूड़ेदानों की वास्तविक कीमत दो लाख भी नहीं है।
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ब्लॉकों में पंचायत सेक्रेटरी और बीडीओ ने कूड़ेदानों की खरीद कराई है। इनको लो कॉस्ट पर खरीदा गया है क्योंकि मार्केट में कूड़ेदान की कीमत छह हजार थी। यह कूड़ेदान नगर निगम के मानक के अनुरूप हैं। इसमें कई जगह से कूड़ेदान खरीद में शिकायत भी आई थी। उसकी जांच कराई जा रही है। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ