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रिहायशी एरिया में काम-धंधा चलाइए मगर पहले कंपाउंडिंग कराइए
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बरेली। रिहायशी इलाकों में आवास बनाने के लिए नक्शे मंजूर कराकर बनाई गई इमारतों का बतौर नर्सिंग होम, बरातघर और शॉपिंग मॉल इस्तेमाल करने वालों को अब हर हालत में इमारत के उस हिस्से को कंपाउंड कराना पड़ेगा जिसमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। बीडीए ने इन लोगों को 29 मई तक बीडीए कैंप में आकर अपने भवन के तीस फीसदी हिस्से तक को कंपाउंड कराने का मौका दिया है। इसके लिए उन्हें फार्म भरकर रिहायशी इलाके के 30 फीसदी हिस्से में कंपाउंडिंग कराने के लिए सर्किल रेट के हिसाब से 25 फीसदी इम्पैक्ट फीस जमा करनी होगी। उसके बाद कंपाउंडिंग फीस अलग से ली जाएगी।
बीडीए सभागार में सोमवार को सुबह 10 बजे से शुरू हुई अलग-अलग बैठकों में बीडीए वीसी दिव्या मित्तल ने नर्सिंग होम, होटल मालिकों और व्यापारियों को जानकारी दी कि जो भवन आवासीय इलाकों में हैं और आवास का नक्शा पास कराने के बावजूद उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे भवनों के मालिक अपनी इमारतों का नक्शा व्यावसायिक श्रेणी में पास करा लें। इसके लिए बीडीए सात से 29 मई तक लगातार कैंप लगाने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए भवन मालिकों को कैंप में आकर एक फार्म भरना पड़ेगा। भवन के सिर्फ 30 फीसदी हिस्से की कंपाउंडिंग होगी। फार्म में नाम पता भरने के बाद उसमें दो फोटोग्राफ लगाकर पुराना नक्शा लगाना होगा। फिर भवन के एरिया के सर्किल रेट की 25 प्रतिशत राशि इम्पैक्ट फीस के तौर पर जमा करनी होगी। इसके बाद भवन की कंपाउंडिंग का चार्ज भी जमा करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भवन को केस टू केस देखा जाएगा। व्यापारियों को किसी भी पटल पर चाहे वह बाबू हों या जेई, कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। भवनों के कामर्शियल नक्शे हाथ के हाथ स्वीकृत होंगे। अगर किसी के पास पैसे की दिक्कत है तो वह 29 मई तक पार्ट पेमेंट भी कर सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कंपाउंडिंग चार्ज कैश नगद न जमा होकर बैंक डीडी या अन्य ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जमा कराया जाएगा।
कायदा माना तो फायदा वर्ना होगा नुकसान
अगर किसी ने दो या तीन मंजिल मकान को पहले बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराया और फिर आवासीय कंपाउंडिंग करा ली। ऐसे भवन का अगर व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है तो उसकी भी कामर्शियल कंपाउंडिंग करानी पड़ेगी। ऐसे आवेदनों रेजीडेंशियल कंपाउंडिंग की पहले से जमा फीस भी नए मानचित्र में एडजस्ट कर दी जाएगी। कैंप में न आने वाले भवन मालिक अगर बाद में मकान का व्यावसायिक इस्तेमाल करते पाए गए तो उनकी रेजिडेंशियल नक्शे की पहले से जमा धनराशि जब्त होगी, बीडीए की कार्रवाई में नुकसान की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।
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व्यापारियों की पूरे भवन की कंपाउंडिंग की मांग खारिज
बीडीए वीसी ने व्यापारियों की बैठक में जब कंपाउंड के नियम समझाए तो व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि व्यापार मंडल खुद भी चाहता है कि व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे रिहायशी भवन वैध हो जाएं लेकिन सर्किल रेट के हिसाब बड़ी रकम इंपैक्ट फीस के रूप में जमा करना छोटे दुकानदारों को भारी पड़ेगा। इस पर बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि अभी वह इंपैक्ट फीस ही जमा करा रही हैं। कंपाउंडिंग फीस बाद में जमा करा दें। इसमें भी किसी को कुछ दिक्कत है तो व्यक्तिगत तौर भी विचार कर लिया जाएगा।
दुर्गेश खटवानी ने कहा कि व्यापारी तो पहले भी भवनों की कंपाउंडिंग कराना चाहते थे, लेकिन जब भी कोई दफ्तर आया तो बीडीए स्टाफ सीढ़ियां चढ़ने से पहले ही रोक लिया। 50 लाख जमा कराने थे तो 10 लाख खुद लेकर और 10 लाख जमा कराकर रिहायशी कंपाउडिंग करा दी। भवन मालिकों ने भी अपनी सहूलियत ही देखी। राजेश जसोरिया ने कहा कि पहले रजिस्ट्रेशन करा लें। इंपैक्ट और कंपाउंड फीस किस्तों में जमा हो जाए तो बेहतर रहेगा। बीडीए वीसी ने उनकी यह मांग खारिज करते हुए कहा कि अगर रजिस्ट्रेशन के बाद कोई कोर्ट चला गया तो सारे काम रुक जाएंगे।
माली और जनाब-ए-आली कर देते थे जेबें खाली
बीडीए वीसी ने व्यापारियों से कहा कि वे यह भ्रांति न पालें कि बीडीए रेवेन्यू के लिए यह सब कर रहा है। उनका उद्देश्य स्मार्ट सिटी में सबकुछ लीगल करने का है। इससे आप की प्रापर्टी की ही वैल्यू बढ़ेगी। दर्शनलाल भाटिया ने कहा कि बीडीए में लंबे समय से लेदेकर काम कराने की संस्कृति रही है। व्यापारी अब फिर भरोसा करके कंपाउंडिंग कराने आगे आएंगे। बीडीए के एई-जेई, सुपरवाइजर आदि प्रताड़ित करेंगे तो सीधे आपसे शिकायत भी की जाएगी। इस पर वीसी ने सहमति जताई। बैठक में अनूप अग्रवाल, गुरुशरण वीर जी, अवधेश डब्ल्यू, विवेक अग्रवाल, कैलाश मित्तल, अजय गुप्ता शैकी, दिलीप गुप्ता, जुगल सुखानी, धीरज सूरी, त्रिलोकीनाथ गुप्ता, निखिल अग्रवाल, मनमोहन सब्बरवाल, विपिन कोहली आदि मौजूद थे। बीडीए से सीटीपी आशीष शिवपुरी, एसई आरके जायसवाल, एक्सईएन जहीरुद्दीन समेत एई-जेई मौजूद थे।
कामर्शियल एरिया में इम्पैक्ट फीस नहीं
चीफ टाउन प्लानर आशीष शिवपुरी ने बताया कि अगर कोई भवन आवासीय एरिया में न होकर रेजीडेंशियल एरिया में है और उसमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो भवन मालिक को कंपाउंड कराने के लिए इम्पैक्ट फीस नहीं देनी होगी। अगर किसी को एरिया तय करने में परेशानी हो तो वह उसकी सूची व्यापारियों को उपलब्ध करा देंगे।
आचार संहिता हटते ही आबाद होगा रामगंगा नगर
व्यापारी नेता दुर्गेश खटवानी ने बीडीए वीसी से रामगंगा नगर में भी प्लाट आवंटित करने का अभियान चलाने को कहा। बोले, रामगंगा नगर में 15 साल पहले व्यापारियों ने तत्कालीन वीसी के दो प्रतिशत छूट के झांसे में आकर 900 प्लाट बुक कर दिए। वह उन्हें आज तक नहीं मिल पाए। रामगंगा नगर में उन प्लाटों पर किसान खेती कर रहे हैँ। न सड़क है न अन्य सुविधाएं। वीसी ने कहा कि इसमें बीडीए के उस समय के अफसरों की शतप्रतिशत गलती थी। अब आवंटी तुरंत रजिस्ट्री कराकर घर बनाना शुरू करें। 23 मई को आचार संहिता हटने के बाद जून तक टेंडर कराकर सेक्टर 3, 5 और 6 में सड़क बनवानी शुरू करा देंगी। मध्य जून से शहर में तेजी से डेवलपमेंट दिखेगा। रामगंगा नगर को 45 मीटर की रोड बनवाकर सीधे बीसलपुर रोड से जोड़ा जाएगा।
दो महीने में शहर दिखेगा बेहतर
बीडीए वीसी ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि अगर वे कैंप में आकर अपने भवनों की कंपाउंडिंग कराने की पहल करते हैं तो उन्हें दो महीने में नतीजा देखने को मिलेगा। बीडीए की सभी सेवाएं बेहतर होंगी। पुरानी कार्यशैली कहीं नहीं दिखेगी। यह बात वे खुद समझ लें और आम नागरिकों को भी समझा दें। उनकी मंशा शहर को बेहतर बनाने की है न कि रेवन्यू या व्यक्तिगत आमदनी बढ़ाने की।
पूरे भवन की कंपाउंडिंग नहीं हो सकती
किसी भी भवन की पूरी कंपाउंडिंग नहीं हो सकती क्योंकि इसके लिए रिहायशी इलाके की लैंडयूज कामर्शियल में बदलनी पडे़ेगी। यह मेरे अधिकार में नही ंहै। इसके लिए किसी विशेष केस का मामला पहले बीडीए बोर्ड में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूर होने पर शासन में जाएगा। इसलिए जो काम मेरे अधिकार में नहीं है, मैं उस पर आगे नहीं बढ़ूंगी। - दिव्या मित्तल, बीडीए वीसी
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बीडीए सभागार में सोमवार को सुबह 10 बजे से शुरू हुई अलग-अलग बैठकों में बीडीए वीसी दिव्या मित्तल ने नर्सिंग होम, होटल मालिकों और व्यापारियों को जानकारी दी कि जो भवन आवासीय इलाकों में हैं और आवास का नक्शा पास कराने के बावजूद उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे भवनों के मालिक अपनी इमारतों का नक्शा व्यावसायिक श्रेणी में पास करा लें। इसके लिए बीडीए सात से 29 मई तक लगातार कैंप लगाने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए भवन मालिकों को कैंप में आकर एक फार्म भरना पड़ेगा। भवन के सिर्फ 30 फीसदी हिस्से की कंपाउंडिंग होगी। फार्म में नाम पता भरने के बाद उसमें दो फोटोग्राफ लगाकर पुराना नक्शा लगाना होगा। फिर भवन के एरिया के सर्किल रेट की 25 प्रतिशत राशि इम्पैक्ट फीस के तौर पर जमा करनी होगी। इसके बाद भवन की कंपाउंडिंग का चार्ज भी जमा करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भवन को केस टू केस देखा जाएगा। व्यापारियों को किसी भी पटल पर चाहे वह बाबू हों या जेई, कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। भवनों के कामर्शियल नक्शे हाथ के हाथ स्वीकृत होंगे। अगर किसी के पास पैसे की दिक्कत है तो वह 29 मई तक पार्ट पेमेंट भी कर सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कंपाउंडिंग चार्ज कैश नगद न जमा होकर बैंक डीडी या अन्य ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जमा कराया जाएगा।
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अगर किसी ने दो या तीन मंजिल मकान को पहले बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराया और फिर आवासीय कंपाउंडिंग करा ली। ऐसे भवन का अगर व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है तो उसकी भी कामर्शियल कंपाउंडिंग करानी पड़ेगी। ऐसे आवेदनों रेजीडेंशियल कंपाउंडिंग की पहले से जमा फीस भी नए मानचित्र में एडजस्ट कर दी जाएगी। कैंप में न आने वाले भवन मालिक अगर बाद में मकान का व्यावसायिक इस्तेमाल करते पाए गए तो उनकी रेजिडेंशियल नक्शे की पहले से जमा धनराशि जब्त होगी, बीडीए की कार्रवाई में नुकसान की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।
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व्यापारियों की पूरे भवन की कंपाउंडिंग की मांग खारिज
बीडीए वीसी ने व्यापारियों की बैठक में जब कंपाउंड के नियम समझाए तो व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि व्यापार मंडल खुद भी चाहता है कि व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे रिहायशी भवन वैध हो जाएं लेकिन सर्किल रेट के हिसाब बड़ी रकम इंपैक्ट फीस के रूप में जमा करना छोटे दुकानदारों को भारी पड़ेगा। इस पर बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि अभी वह इंपैक्ट फीस ही जमा करा रही हैं। कंपाउंडिंग फीस बाद में जमा करा दें। इसमें भी किसी को कुछ दिक्कत है तो व्यक्तिगत तौर भी विचार कर लिया जाएगा।
दुर्गेश खटवानी ने कहा कि व्यापारी तो पहले भी भवनों की कंपाउंडिंग कराना चाहते थे, लेकिन जब भी कोई दफ्तर आया तो बीडीए स्टाफ सीढ़ियां चढ़ने से पहले ही रोक लिया। 50 लाख जमा कराने थे तो 10 लाख खुद लेकर और 10 लाख जमा कराकर रिहायशी कंपाउडिंग करा दी। भवन मालिकों ने भी अपनी सहूलियत ही देखी। राजेश जसोरिया ने कहा कि पहले रजिस्ट्रेशन करा लें। इंपैक्ट और कंपाउंड फीस किस्तों में जमा हो जाए तो बेहतर रहेगा। बीडीए वीसी ने उनकी यह मांग खारिज करते हुए कहा कि अगर रजिस्ट्रेशन के बाद कोई कोर्ट चला गया तो सारे काम रुक जाएंगे।
माली और जनाब-ए-आली कर देते थे जेबें खाली
बीडीए वीसी ने व्यापारियों से कहा कि वे यह भ्रांति न पालें कि बीडीए रेवेन्यू के लिए यह सब कर रहा है। उनका उद्देश्य स्मार्ट सिटी में सबकुछ लीगल करने का है। इससे आप की प्रापर्टी की ही वैल्यू बढ़ेगी। दर्शनलाल भाटिया ने कहा कि बीडीए में लंबे समय से लेदेकर काम कराने की संस्कृति रही है। व्यापारी अब फिर भरोसा करके कंपाउंडिंग कराने आगे आएंगे। बीडीए के एई-जेई, सुपरवाइजर आदि प्रताड़ित करेंगे तो सीधे आपसे शिकायत भी की जाएगी। इस पर वीसी ने सहमति जताई। बैठक में अनूप अग्रवाल, गुरुशरण वीर जी, अवधेश डब्ल्यू, विवेक अग्रवाल, कैलाश मित्तल, अजय गुप्ता शैकी, दिलीप गुप्ता, जुगल सुखानी, धीरज सूरी, त्रिलोकीनाथ गुप्ता, निखिल अग्रवाल, मनमोहन सब्बरवाल, विपिन कोहली आदि मौजूद थे। बीडीए से सीटीपी आशीष शिवपुरी, एसई आरके जायसवाल, एक्सईएन जहीरुद्दीन समेत एई-जेई मौजूद थे।
कामर्शियल एरिया में इम्पैक्ट फीस नहीं
चीफ टाउन प्लानर आशीष शिवपुरी ने बताया कि अगर कोई भवन आवासीय एरिया में न होकर रेजीडेंशियल एरिया में है और उसमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो भवन मालिक को कंपाउंड कराने के लिए इम्पैक्ट फीस नहीं देनी होगी। अगर किसी को एरिया तय करने में परेशानी हो तो वह उसकी सूची व्यापारियों को उपलब्ध करा देंगे।
आचार संहिता हटते ही आबाद होगा रामगंगा नगर
व्यापारी नेता दुर्गेश खटवानी ने बीडीए वीसी से रामगंगा नगर में भी प्लाट आवंटित करने का अभियान चलाने को कहा। बोले, रामगंगा नगर में 15 साल पहले व्यापारियों ने तत्कालीन वीसी के दो प्रतिशत छूट के झांसे में आकर 900 प्लाट बुक कर दिए। वह उन्हें आज तक नहीं मिल पाए। रामगंगा नगर में उन प्लाटों पर किसान खेती कर रहे हैँ। न सड़क है न अन्य सुविधाएं। वीसी ने कहा कि इसमें बीडीए के उस समय के अफसरों की शतप्रतिशत गलती थी। अब आवंटी तुरंत रजिस्ट्री कराकर घर बनाना शुरू करें। 23 मई को आचार संहिता हटने के बाद जून तक टेंडर कराकर सेक्टर 3, 5 और 6 में सड़क बनवानी शुरू करा देंगी। मध्य जून से शहर में तेजी से डेवलपमेंट दिखेगा। रामगंगा नगर को 45 मीटर की रोड बनवाकर सीधे बीसलपुर रोड से जोड़ा जाएगा।
दो महीने में शहर दिखेगा बेहतर
बीडीए वीसी ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि अगर वे कैंप में आकर अपने भवनों की कंपाउंडिंग कराने की पहल करते हैं तो उन्हें दो महीने में नतीजा देखने को मिलेगा। बीडीए की सभी सेवाएं बेहतर होंगी। पुरानी कार्यशैली कहीं नहीं दिखेगी। यह बात वे खुद समझ लें और आम नागरिकों को भी समझा दें। उनकी मंशा शहर को बेहतर बनाने की है न कि रेवन्यू या व्यक्तिगत आमदनी बढ़ाने की।
पूरे भवन की कंपाउंडिंग नहीं हो सकती
किसी भी भवन की पूरी कंपाउंडिंग नहीं हो सकती क्योंकि इसके लिए रिहायशी इलाके की लैंडयूज कामर्शियल में बदलनी पडे़ेगी। यह मेरे अधिकार में नही ंहै। इसके लिए किसी विशेष केस का मामला पहले बीडीए बोर्ड में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूर होने पर शासन में जाएगा। इसलिए जो काम मेरे अधिकार में नहीं है, मैं उस पर आगे नहीं बढ़ूंगी। - दिव्या मित्तल, बीडीए वीसी