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अपना वादा निभाने फिर कभी आंवला नहीं लौटे राजीव गांधी
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बरेली। देश को संचार क्रांति के पथ पर ले जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अंतिम सभा की यादें आज तक आंवला के लोगों के जहन में चस्पा हैं। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्री पेरंबदूर में लिट्टे के उग्रवादियों के हाथों मानव बम के जरिये हत्या से एक दिन पहले यानी 20 मई को राजीव गांधी ने आंवला में चुनावी जनसभा को संबोधित किया था। चिलचिलाती धूप में पसीने से तरबतर पूर्व प्रधानमंत्री चुनावी व्यस्तता की वजह से ज्यादा देर आंवला की पब्लिक से रूबरू नहीं रह पाए थे, लोग उनसे और बोलने की मांग कर रहे थे। राजीव गांधी जल्द दोबारा आंवला आने का वादा कर गए थे, लेकिन यह वादा पूरा करने के लिए कभी नहीं लौट पाए। अगले ही दिन आंवला के लोगों ने उनकी हत्या का समाचार सुना तो उनका वादा शोक में डूबे लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
1991 में 10 वीं लोकसभा के लिए चुनाव होने जा रहे थे। इससे पहले 1989 में वीपी सिंह की अगुवाई में सरकार बनी थी, लेकिन डेढ़ साल बाद ही धराशाई हो गई। मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस को फिर सत्ता में लाने के लिए राजीव गांधी देश भर में ताबड़तोड़ दौरे कर रहे थे। 20 मई 1991 की चिलचिलाती धूप में वह दोपहर एक बजे बरेली पहुंचे। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद उन्होंने कुछ देर विश्राम किया और फिर बिशप मंडल इंटर कॉलेज में बने हैलीपैड से आंवला के लिए उड़ान भरी थी। डेढ़ बजे वह आंवला पहुंचे। सफेद रंग का कुर्ता पहने राजीव गांधी माथे पर तिलक लगाए हुए थे। गले में महरून रंग का अंगोछा था, जिससे वह बार-बार पसीना पोंछ रहे थे। आंवला में उन्होंने जब सभा को संबोधित करना शुरू किया तो युवाओं में जोश भर गया। युवाओं को 18 साल की उम्र में वोट डालने का अधिकार देने वाले राजीव गांधी उन्हें कंप्यूटर युग में ले जाने का वादा कर रहे थे।
इसी जनसभा में उन्होंने आंवला के पंडित रामकिशोर वैद्य समेत कई कांग्रेसियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। चुनाव सभा में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रमा कश्यप को जिताने की अपील की और जनता से जल्द दोबारा आंवला आने का वादा करके चले गए। अगले ही दिन जब राजीव गांधी की हत्या की खबर फैली तो आंवला के लोग एकाएक इस पर विश्वास नहीं कर पाए। पंडित रामकिशोर वैद्य के बेटे अनिल शर्मा बताते हैं कि जब उनके पिता ने राजीव गांधी की हत्या का समाचार सुना तो बेसुध हो गए। कई दिनों तक वह गुमसुम रहे और परिवार में किसी से बात नहीं की। उनके साथ तमाम कांग्रेसी अपने नेता की हत्या की खबर सुनकर स्तब्ध थे। आंवला के कांग्रेस कार्यकर्ता आज भी राजीव गांधी का वो दौरा अपनी स्मृतियों में संजोए हुए हैं।
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1991 में 10 वीं लोकसभा के लिए चुनाव होने जा रहे थे। इससे पहले 1989 में वीपी सिंह की अगुवाई में सरकार बनी थी, लेकिन डेढ़ साल बाद ही धराशाई हो गई। मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस को फिर सत्ता में लाने के लिए राजीव गांधी देश भर में ताबड़तोड़ दौरे कर रहे थे। 20 मई 1991 की चिलचिलाती धूप में वह दोपहर एक बजे बरेली पहुंचे। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद उन्होंने कुछ देर विश्राम किया और फिर बिशप मंडल इंटर कॉलेज में बने हैलीपैड से आंवला के लिए उड़ान भरी थी। डेढ़ बजे वह आंवला पहुंचे। सफेद रंग का कुर्ता पहने राजीव गांधी माथे पर तिलक लगाए हुए थे। गले में महरून रंग का अंगोछा था, जिससे वह बार-बार पसीना पोंछ रहे थे। आंवला में उन्होंने जब सभा को संबोधित करना शुरू किया तो युवाओं में जोश भर गया। युवाओं को 18 साल की उम्र में वोट डालने का अधिकार देने वाले राजीव गांधी उन्हें कंप्यूटर युग में ले जाने का वादा कर रहे थे।
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इसी जनसभा में उन्होंने आंवला के पंडित रामकिशोर वैद्य समेत कई कांग्रेसियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। चुनाव सभा में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रमा कश्यप को जिताने की अपील की और जनता से जल्द दोबारा आंवला आने का वादा करके चले गए। अगले ही दिन जब राजीव गांधी की हत्या की खबर फैली तो आंवला के लोग एकाएक इस पर विश्वास नहीं कर पाए। पंडित रामकिशोर वैद्य के बेटे अनिल शर्मा बताते हैं कि जब उनके पिता ने राजीव गांधी की हत्या का समाचार सुना तो बेसुध हो गए। कई दिनों तक वह गुमसुम रहे और परिवार में किसी से बात नहीं की। उनके साथ तमाम कांग्रेसी अपने नेता की हत्या की खबर सुनकर स्तब्ध थे। आंवला के कांग्रेस कार्यकर्ता आज भी राजीव गांधी का वो दौरा अपनी स्मृतियों में संजोए हुए हैं।
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