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भद्रा के अशुभ प्रभाव को दूर करेगा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग
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बरेली। बुधवार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा यानी आज परंपरानुसार होलिका दहन किया जाएगा। इस बार सुबह 10.46 बजे से रात 8.46 बजे तक करीब 10 घंटे भद्रा रहेगी। शास्त्रीय मान्यता में भद्रा के दौरान पूजन आदि शुभ कार्य निषेध माने गए हैं, लेकिन गोधूलि बेला में पूजन के समय उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र साक्षी रहेगा, जिससे भद्रा का दोष नहीं लगेगा। शाम को विधि विधान से होलिका पूजन किया जा सकता है।
ज्योतिर्विद डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार यदि भद्रा में पूजन काल के समय उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में से कोई भी एक नक्षत्र हो तो भद्रा का दोष नहीं लगता है। इस बार शाम 4.22 बजे से उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आरंभ हो रहा है। जो अगले दिन दोपहर दो बजे तक रहेगा। इसलिए संध्या काल में होलिका पूजन करने से भद्रा का दोष नहीं लगेगा। श्रद्धालु पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार पूजन कर सकते हैं।
बताया कि भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन मास में प्रमुख त्योहार पर आने वाली भद्रा का वास मृत्यु लोक में रहता है। चंद्र राशि के अनुसार सिंह राशि के चंद्रमा में भी भद्रा का वास पृथ्वी पर बताया गया है। भूलोक पर रहने वाली भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। हालांकि शास्त्र में इसका हल बताया गया है। उन्होंने निर्दोष मुहूर्त मान्यता रखने वाले श्रद्धालुओं को रात नौ बजे के बाद पूजन करने का सुझाव दिया है। इस मुहूर्त में होलिका पूजन धन धान्य देने वाला रहेगा।
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ज्योतिर्विद डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार यदि भद्रा में पूजन काल के समय उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में से कोई भी एक नक्षत्र हो तो भद्रा का दोष नहीं लगता है। इस बार शाम 4.22 बजे से उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आरंभ हो रहा है। जो अगले दिन दोपहर दो बजे तक रहेगा। इसलिए संध्या काल में होलिका पूजन करने से भद्रा का दोष नहीं लगेगा। श्रद्धालु पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार पूजन कर सकते हैं।
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बताया कि भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन मास में प्रमुख त्योहार पर आने वाली भद्रा का वास मृत्यु लोक में रहता है। चंद्र राशि के अनुसार सिंह राशि के चंद्रमा में भी भद्रा का वास पृथ्वी पर बताया गया है। भूलोक पर रहने वाली भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। हालांकि शास्त्र में इसका हल बताया गया है। उन्होंने निर्दोष मुहूर्त मान्यता रखने वाले श्रद्धालुओं को रात नौ बजे के बाद पूजन करने का सुझाव दिया है। इस मुहूर्त में होलिका पूजन धन धान्य देने वाला रहेगा।
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