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...तो जानवर खा गए नैनीताल हाईवे किनारे के पेड़
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बरेली। नैनीताल रोड पर पौधरोपण कराने के नाम पर फॉरेस्ट के अधिकारियों के लाखों का बजट हजम करने का मामला सामने आया है। यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी ने वन विभाग को हाईवे किनारे और डिवाइडर पर पांच साल तक पौधरोपण कराने का पेमेंट दिया था, लेकिन फॉरेस्ट के अफसर प्लांटेशन की रकम दबाकर बैठ गए हैं। हाईवे पर ज्यादातर जगहों पर पेड़ ही नहीं लगे हैं। हालांकि इसके पीछे तर्क दिया गया कि पेड़ या तो जानवर खा गए या हादसों में नष्ट हो गए। इस हाईवे का 25 साल के रखरखाव का कांट्रेक्ट लेने वाली पीएनसी संस्था के अधिकारियों ने अथॉरिटी को यह मामला भेजा है। इसकी जांच की तैयारी चल रही है।
बरेली टोल प्लाजा से बहेड़ी के आगे उत्तराखंड बार्डर तक हाईवे के रखरखाव का जिम्मा पीएनसी नाम की संस्था को अक्तूबर 2015 को 25 साल के लिए दिया गया था। पीएनसी ने इसके लिए करीब 640 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी के स्वामित्व वाली इस फोरलेन सड़क पर डिवाइडर बने हैं। अथॉरिटी ने हाईवे के दोनों तरफ और डिवाइडर पर पांच साल के लिए पौधरोपण कराने का एग्रीमेंट वन विभाग के अधिकारियों से किया था। लेकिन न तो डिवाइडर पर ही पेड़ लगाए हैं और न ही सड़क किनारे पेड़ लगाने की सुध नहीं ली गई। कुछ एक जगहों की बात छोड़ दें तो हाईवे के किनारे पौधरोपण कहीं नहीं दिखाई दे रहे। हाल में कमिश्नर रणवीर प्रसाद भी बहेड़ी गए थे तो डिवाइडर पर पेड़ न लगे होने पर हैरान रह गए थे। हालांकि इस घोटाले को छिपाने के लिए अफसरों का तर्क है कि पेड़ लगाए गए हैं लेकिन उसे या तो जानवर खा गए या फिर हादसों ने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया। इधर पीएनसी ने इस मामले को स्टेट हाईवे अथॉरिटी के पास पहुंचा दिया है। लोगों का कहना है कि डिवाइडर पर पेड़ न लगे होने से दूसरी तरफ से आ रहे वाहनों की हेडलाइट की तेज रोशनी से ड्राइवरों की आंखें चौंधिया जाती है। ऐसे में हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
‘हाईवे के किनारे और डिवाइडर पर पांच साल पौधे वन विभाग को लगाने हैं। पहले पौधे लगे थे लेकिन उन्हें वाहनों और जानवरों से नुकसान पहुंचा। कई जगह स्थानीय लोगों ने भी अपनी सुविधा के लिए पौधों को नष्ट कर दिया था। इस मामले को यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी को पूर्व में भी भेजा गया है। एक बार फिर रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।’
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- विवेक गुप्ता, सहायक महाप्रबंधक, पीएनसी
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बरेली टोल प्लाजा से बहेड़ी के आगे उत्तराखंड बार्डर तक हाईवे के रखरखाव का जिम्मा पीएनसी नाम की संस्था को अक्तूबर 2015 को 25 साल के लिए दिया गया था। पीएनसी ने इसके लिए करीब 640 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी के स्वामित्व वाली इस फोरलेन सड़क पर डिवाइडर बने हैं। अथॉरिटी ने हाईवे के दोनों तरफ और डिवाइडर पर पांच साल के लिए पौधरोपण कराने का एग्रीमेंट वन विभाग के अधिकारियों से किया था। लेकिन न तो डिवाइडर पर ही पेड़ लगाए हैं और न ही सड़क किनारे पेड़ लगाने की सुध नहीं ली गई। कुछ एक जगहों की बात छोड़ दें तो हाईवे के किनारे पौधरोपण कहीं नहीं दिखाई दे रहे। हाल में कमिश्नर रणवीर प्रसाद भी बहेड़ी गए थे तो डिवाइडर पर पेड़ न लगे होने पर हैरान रह गए थे। हालांकि इस घोटाले को छिपाने के लिए अफसरों का तर्क है कि पेड़ लगाए गए हैं लेकिन उसे या तो जानवर खा गए या फिर हादसों ने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया। इधर पीएनसी ने इस मामले को स्टेट हाईवे अथॉरिटी के पास पहुंचा दिया है। लोगों का कहना है कि डिवाइडर पर पेड़ न लगे होने से दूसरी तरफ से आ रहे वाहनों की हेडलाइट की तेज रोशनी से ड्राइवरों की आंखें चौंधिया जाती है। ऐसे में हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
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‘हाईवे के किनारे और डिवाइडर पर पांच साल पौधे वन विभाग को लगाने हैं। पहले पौधे लगे थे लेकिन उन्हें वाहनों और जानवरों से नुकसान पहुंचा। कई जगह स्थानीय लोगों ने भी अपनी सुविधा के लिए पौधों को नष्ट कर दिया था। इस मामले को यूपी स्टेट हाईवे अथॉरिटी को पूर्व में भी भेजा गया है। एक बार फिर रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।’
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- विवेक गुप्ता, सहायक महाप्रबंधक, पीएनसी