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600 किसानों के मुआवजे का मामला फिर अटका

Fri, 26 Oct 2018 11:54 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Fri, 26 Oct 2018 11:54 PM IST
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600 किसानों के मुआवजे का मामला फिर अटका
 बड़ा बाईपास प्रोजेक्ट के लिए भूमि देने वाले करीब छह सौ किसानों और एनएचएआई के अफसरों के बीच मुआवजे पर समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन ने एनएचएआई मुरादाबाद के अधिकारियों से किसानों की सहमति के आधार पर जमीन के रेट तय करने के लिए 25 अक्तूबर तक की समय सीमा दी थी लेकिन परियोजना निदेशक की तरफ से अब तक विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी (एसएलएओ) को सहमति पत्र नहीं मिला है। उधर, करीब पांच साल से जमीन के मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों ने परिवार के साथ दो नवंबर को बाईपास पर लेट कर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
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नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने बरेली-मुरादाबाद एनएच-24 पर रजऊ परसपुर से परसाखेड़ा तक बड़ा बाईपास का निर्माण कराया था। इसमें 33 गांवों के करीब 2400 किसानों की भूमि का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण में जमीन के रेट को लेकर किसानों और एनएचएआई अफसरों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। लिहाजा वर्ष 2013 में केवल 1800 किसान ही जमीन का मुआवजा लेने को तैयार हुए। उस वक्त उन्हें वर्ष 2008-09 के सर्किल रेट पर मुआवजा का पेमेंट किया गया था। बाकी करीब छह सौ किसानों ने मुआवजा की दर को लेकर आंदोलन छेड़ दिया। इस बीच एनएचएआई के अफसरों ने वर्ष 2013-14 में गांव ट्यूलिया, परसाखेड़ा और धनरिया के किसानों को ज्यादा रेट पर मुआवजा देकर किसानों के अंसतोष को और बढ़ा दिया। इस बीच असंतुष्ट किसानों, जिला प्रशासन और एनएचएआई अफसरों के बीच कई बार समझौता के लिए मीटिंग भी हो चुकी है। 26 सितंबर को कलक्ट्रेट में भी एसएलएओ सुल्तान अशरफ सिद्दीकी और एनएचएआई अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई थी। इसमें एनएचएआई के अफसरोें को 25 अक्तूबर तक अपना जवाब एसएलएओ दफ्तर को देना था, लेकिन यह समय सीमा भी ऐसे ही गुजर गई है।
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‘इस बार होगी आरपार की लड़ाई’
किसानों को मुआवजा दिलाने को संघर्ष कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के हरिनंदन सिंह पटेल ने बताया कि किसानों के सब्र की इंतहा हो चुकी है। प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी किसानों की दिक्कत का कोई रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं। इस बार किसानों ने दो नवंबर को आंदोलन करने को पूरा मूड बना लिया है।
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प्रशासन कोशिश कर रहा है कि एनएचएआई और किसानों के बीच मुआवजे को लेकर यह बड़ा मामला हल हो जाए। एनएचएआई ही अगर इसमें गंभीरता नहीं दिखाएगा तो प्रशासन के लिए समझौता करना मुुश्किल हो जाएगा। - सुल्तान अशरफ सिद्दीकी, एसएलएओ
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