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घुटने तक गंदे पानी घुसे डीएम तब हुआ ग्रामीणों की दिक्कत का अहसास
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:35 AM IST
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पीलीभीत। प्रशासन की लापरवाही से ग्रामीण कितनी नरक की जिंदगी जीते हैं। शुक्रवार को डीएम डॉ. अखिलेश मिश्र को उस समय तब पता चला जब खुद घुटनों तक गंदे पानी में घुसकर पुलिया का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। डीएम को सहारा देने के लिए तो उनके कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन इस रास्ते से गुजरने वाले गांव अजीत डांडी के अलावा अन्य ग्रामीणों को सहारा देने के लिए कोई नहीं मिलता।
ब्लाक ललौरीखेड़ा के गांव अजीत डांडी को जाने वाले मार्ग पर बन रही बर्रे नाला की पुलिया लोक निर्माण विभाग बनवा रहा है। शुक्रवार को डीएम से किसी ने पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री लगाए जाने व मानक के अनुरूप उसका निर्माण न होने की शिकायत की। जिस समय डीएम को यह शिकायत मिली उस समय उनके पास सीडीओ वीके भागवत भी बैठे थे। शिकायत मिलते ही डीएम उसकी मौके पर जांच करने के लिए चल दिए। जाते-जाते अपने साथ अपनी कोर टीम के एक इंजीनियर व सीडीओ को भी ले गए। लेकिन किसी को यह नहीं बताया कि उन्हें कहा जाना है। अधिकारियों के साथ औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम जब अजीत डांडी गांव के मार्ग पर आगे बढ़े तो पुलिया से पहले सड़क पर घुटने तक गंदा पानी सड़क पर जमा था। अजीत डांडी गांव के अलावा इस मार्ग से करीब 20 से अ धिक गांव के लोग आवागमन करते हैं। डीएम के सामने भी कई लोग उस गंदे पानी से निकलते रहे। निर्माणाधीन पुलिया करीब 50 मीटर दूर थी, लिहाजा डीएम ने भी अपनी पैंट घुटनों तक समेट ली, हालांकि सीडीओ ने उनसे कहा कि हम लोग देख कर आ जाते हैं, लेकिन डीएम ने स्वयं मौके पर जाकर देखने के लिए घुटने तक गंदे पानी में घुस गए। आनन फानन में उनके मातहत सुरक्षाकर्मी भी पानी में घुस गए। डीएम जैसे ही आगे बढ़े वैसे ही उनका पैर फिसलने लगा इस पर साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और सहारा देकर उनको निर्माणाधीन पुलिया तक पहुंचाया। डीएम ने पुलिया के पास जाकर करीब आधे 15 मिनट तक वहां रुक कर बारीकी से उसका निरीक्षण किया, और फिर उसी गंदे पानी से होते हुए वापस अपनी कार तक आए। ग्रामीण कितनी नरक की जिंदगी जीते है यह डीएम को भी पानी में घुसने के बाद अहसास हो गया। डीएम के जाने के बाद ग्रामीण भी यह कहते आज डीएम साहब को भी हम लोगों की असली परेशानी का पता चल गया होगा।
शिकायत पर जांच करने पहुंचा था। मामला तकनीकि से जुड़ा था लिहाजा कोर टीम के एक इंजीनियर व सीडीओ को भी साथ ले लिया था। जिस मार्ग पर भरे गंदे पानी से गुजर हम पुलिया का निरीक्षण करने पहुंचे उस पुलिया के बन जाने से करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को फायदा होगा। पुलिया पर अभी लिंटर नहीं पड़ा है। उसमे लगी सरिया प्रथम दृष्ट्या मानक के अनुरूप नहीं लग रहीं थीं। पीडब्ल्यूडी उसे बनवा रहा है। स्टेमेट मंगाया है। लिंटर डालने को फिलहाल रोक दिया है। तकनीकि टीम भेज कर मामले की जांच कराएंगे। यदि वास्तव में निर्माण घटिया पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह सही है कि वहां पुलिया न होने के कारण लोगों को आवागमन संबंधी खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उसी समस्या समाधान के लिए पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है।
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डा. अखिलेश मिश्र, डीएम
निरीक्षण में यह दिए डीएम ने निर्देश
पुलिया का निरीक्षण करने के दौरान डीएम ने डिजाइन व संबंधित पत्रावली के दिए गए स्टीमेट के हिसाब से मुख्य विकास अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। पुलिया में डाली गई लोहे की सरिया देखा और निर्र्देश दिया कि एक सरिया मोटी व एक पतली क्यो डाली गई है। इसकी भी जांच पत्रावली में दिए गए मानक के अनुसार करने के निर्देश दिए। पुलिया की लंबाई व चौडाई के बारे में जानकारी की और कहा कि यह भी देखा जाए कि निर्माण दिए गए मानकों के अनुुसार किया जा रहा है या नही। पुलिया का निर्माण लोक निर्माण खंड एक के द्वारा कराया जा रहा है। इसी वित्तीय वर्ष में पुलिया निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। जो लगभग 20 लाख की धनराशि से निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। परियोजना निदेशक डीआरडीए मौजूद रहे।
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ब्लाक ललौरीखेड़ा के गांव अजीत डांडी को जाने वाले मार्ग पर बन रही बर्रे नाला की पुलिया लोक निर्माण विभाग बनवा रहा है। शुक्रवार को डीएम से किसी ने पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री लगाए जाने व मानक के अनुरूप उसका निर्माण न होने की शिकायत की। जिस समय डीएम को यह शिकायत मिली उस समय उनके पास सीडीओ वीके भागवत भी बैठे थे। शिकायत मिलते ही डीएम उसकी मौके पर जांच करने के लिए चल दिए। जाते-जाते अपने साथ अपनी कोर टीम के एक इंजीनियर व सीडीओ को भी ले गए। लेकिन किसी को यह नहीं बताया कि उन्हें कहा जाना है। अधिकारियों के साथ औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम जब अजीत डांडी गांव के मार्ग पर आगे बढ़े तो पुलिया से पहले सड़क पर घुटने तक गंदा पानी सड़क पर जमा था। अजीत डांडी गांव के अलावा इस मार्ग से करीब 20 से अ धिक गांव के लोग आवागमन करते हैं। डीएम के सामने भी कई लोग उस गंदे पानी से निकलते रहे। निर्माणाधीन पुलिया करीब 50 मीटर दूर थी, लिहाजा डीएम ने भी अपनी पैंट घुटनों तक समेट ली, हालांकि सीडीओ ने उनसे कहा कि हम लोग देख कर आ जाते हैं, लेकिन डीएम ने स्वयं मौके पर जाकर देखने के लिए घुटने तक गंदे पानी में घुस गए। आनन फानन में उनके मातहत सुरक्षाकर्मी भी पानी में घुस गए। डीएम जैसे ही आगे बढ़े वैसे ही उनका पैर फिसलने लगा इस पर साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और सहारा देकर उनको निर्माणाधीन पुलिया तक पहुंचाया। डीएम ने पुलिया के पास जाकर करीब आधे 15 मिनट तक वहां रुक कर बारीकी से उसका निरीक्षण किया, और फिर उसी गंदे पानी से होते हुए वापस अपनी कार तक आए। ग्रामीण कितनी नरक की जिंदगी जीते है यह डीएम को भी पानी में घुसने के बाद अहसास हो गया। डीएम के जाने के बाद ग्रामीण भी यह कहते आज डीएम साहब को भी हम लोगों की असली परेशानी का पता चल गया होगा।
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शिकायत पर जांच करने पहुंचा था। मामला तकनीकि से जुड़ा था लिहाजा कोर टीम के एक इंजीनियर व सीडीओ को भी साथ ले लिया था। जिस मार्ग पर भरे गंदे पानी से गुजर हम पुलिया का निरीक्षण करने पहुंचे उस पुलिया के बन जाने से करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को फायदा होगा। पुलिया पर अभी लिंटर नहीं पड़ा है। उसमे लगी सरिया प्रथम दृष्ट्या मानक के अनुरूप नहीं लग रहीं थीं। पीडब्ल्यूडी उसे बनवा रहा है। स्टेमेट मंगाया है। लिंटर डालने को फिलहाल रोक दिया है। तकनीकि टीम भेज कर मामले की जांच कराएंगे। यदि वास्तव में निर्माण घटिया पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह सही है कि वहां पुलिया न होने के कारण लोगों को आवागमन संबंधी खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उसी समस्या समाधान के लिए पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है।
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निरीक्षण में यह दिए डीएम ने निर्देश
पुलिया का निरीक्षण करने के दौरान डीएम ने डिजाइन व संबंधित पत्रावली के दिए गए स्टीमेट के हिसाब से मुख्य विकास अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। पुलिया में डाली गई लोहे की सरिया देखा और निर्र्देश दिया कि एक सरिया मोटी व एक पतली क्यो डाली गई है। इसकी भी जांच पत्रावली में दिए गए मानक के अनुसार करने के निर्देश दिए। पुलिया की लंबाई व चौडाई के बारे में जानकारी की और कहा कि यह भी देखा जाए कि निर्माण दिए गए मानकों के अनुुसार किया जा रहा है या नही। पुलिया का निर्माण लोक निर्माण खंड एक के द्वारा कराया जा रहा है। इसी वित्तीय वर्ष में पुलिया निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। जो लगभग 20 लाख की धनराशि से निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। परियोजना निदेशक डीआरडीए मौजूद रहे।