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मंच पर जीवंत हो उठा भारत-पाक विभाजन का दर्द
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बरेली। मानवीय रिश्तों पर आधारित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नई’ भारत-पाक विभाजन के दर्द को साझा करता है। रविवार को सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से विंडरमेयर में इसका मंचन किया गया। इसमें मानवता को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है। बताया कि धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जाता है जबकि संवेदनाएं और सहयोग दिलों को जोड़ने का काम करते हैं। इस नाटक के पात्र भारत विभाजन से संबंध रखते हैं, जो उस दौर में बहुत कुछ खो चुके होते हैं। बावजूद इसके उनमें मानवता बची है। नाटक में यह दर्शाने का प्रयास हुआ है कि विभाजन के कई दशक बीतने के बाद भी सरहद के दोनों तरफ कई परिवार अब भी अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।
प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के लिखे इस नाटक में कथावस्तु को नाटकीय और मानवीय स्वरूप प्रदान किया गया है। वह धर्म का नितांत विरोध नहीं करते बल्कि यह बताते हैं कि समाज विरोधी तत्व किस तरह धर्म का फायदा उठाते हैं। बुुद्धिजीवियों और आम लोगों के बीच जो संबंध होना चाहिए वह नाटककार ने मौलवी, कवि और जनसाधारण का प्रतिनिधित्व करने वाले पात्रों के जरिये उभारा है। मस्जिद में मौलवी की हत्या के माध्यम से स्वार्थी तत्वों द्वारा धर्म तथा जीवन के मूल्यों को नष्ट कर देने की बात कही गई है। इस नाटक की परिकल्पना और निर्देशन डी प्रसाद (पप्पू वर्मा) का रहा। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक पूरी तरह बांधे रखा।
नाटक में कमला घले ने मुख्य भूमिका निभाते हुए सशक्त अभिनय का परिचय दिया। इसके अलावा दीक्षा अग्रवाल, मौलश्री शरद, पीके अस्थाना, मोनिस हिदायत, हृदेश प्रताप सिंह आदि पात्रों ने शानदार अभिनय किया। इस दौरान डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, डॉ. गरिमा सिंह और डॉ. शालिनी अरोड़ा आदि मौजूद रहीं।
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प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के लिखे इस नाटक में कथावस्तु को नाटकीय और मानवीय स्वरूप प्रदान किया गया है। वह धर्म का नितांत विरोध नहीं करते बल्कि यह बताते हैं कि समाज विरोधी तत्व किस तरह धर्म का फायदा उठाते हैं। बुुद्धिजीवियों और आम लोगों के बीच जो संबंध होना चाहिए वह नाटककार ने मौलवी, कवि और जनसाधारण का प्रतिनिधित्व करने वाले पात्रों के जरिये उभारा है। मस्जिद में मौलवी की हत्या के माध्यम से स्वार्थी तत्वों द्वारा धर्म तथा जीवन के मूल्यों को नष्ट कर देने की बात कही गई है। इस नाटक की परिकल्पना और निर्देशन डी प्रसाद (पप्पू वर्मा) का रहा। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक पूरी तरह बांधे रखा।
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नाटक में कमला घले ने मुख्य भूमिका निभाते हुए सशक्त अभिनय का परिचय दिया। इसके अलावा दीक्षा अग्रवाल, मौलश्री शरद, पीके अस्थाना, मोनिस हिदायत, हृदेश प्रताप सिंह आदि पात्रों ने शानदार अभिनय किया। इस दौरान डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, डॉ. गरिमा सिंह और डॉ. शालिनी अरोड़ा आदि मौजूद रहीं।
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