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दिल की बीमारी से नहीं नसों के मोटे होने से भी फूलती हैं सांसे
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 19 Sep 2018 12:22 AM IST
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भागदौड़ भरी जिंदगी में सांस फूलने का कारण सिर्फ दिल की बीमारी ही नहीं होती, दिल में रक्त का संचार करने वाली नस अगर मोटी हो गईं हों तो भी सांस फूलती है। यह स्थिति दिल के दौरे के लिए भी जिम्मेदार हो सकती है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल, बुखारा कैंप के दो दिवसीय सीएमई के दूसरे दिन गंगाशील मेडिकल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में आयोजित सेमिनार में श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र गुप्ता ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि इस अवस्था को राइट साइड हार्ट फैल्योर कहा जाता है। इसे नजरअंदाज करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने जवानों से कहा कि नियमित व्यायाम, प्रदूषण से दूर रहने और सेहतमंद खाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। कई जवानों ने सीमा पर तैनाती के दौरान ऑक्सीजन कम होने से इस अवस्था में पहुंचने की आशंका और कितने दिनों में सामान्य अवस्था में आने पर बीमारी से बचने की संभावना के बारे में सवाल किए। डॉक्टर ने कहा कि तीन से सात महीने में ड्यूटी रोटेशन करते रहने से बीमारी से बचा जा सकता है।
घुटनों की चोट में एक्स-रे में कुछ न आए तो सीटी कराये
आईटीबीपी के चिकित्सा निदेशक डॉ. एचबी मोहंती और बैंगलुरु के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गिलबर्ट जोसेफ की उपस्थिति में गंगाशील अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार हिरानी ने नी एंड लैगामेंट इंजरी पर व्याख्यान दिया। फौजियों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान नी इंजरी सबसे ज्यादा होती है। डॉ. हिरानी ने कहा कि घुटनों की चोट में मूवमेंट बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आई बैग लगाकर आराम देने की कोशिश की जानी चाहिए। अगर एक्स-रे में कुछ भी न आए तो भी स्थिति गंभीर हो सकती है। सीटी स्कैन कराना चाहिए। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. शकील अहमद ने जनरल प्रिंसिपल एंड इंपार्टेंश पर व्याख्यान दिया। सीएमई के खत्म होने के बाद क्षेत्रीय मुख्यालय पर हिमवीर जवानों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
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उन्होंने जवानों से कहा कि नियमित व्यायाम, प्रदूषण से दूर रहने और सेहतमंद खाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। कई जवानों ने सीमा पर तैनाती के दौरान ऑक्सीजन कम होने से इस अवस्था में पहुंचने की आशंका और कितने दिनों में सामान्य अवस्था में आने पर बीमारी से बचने की संभावना के बारे में सवाल किए। डॉक्टर ने कहा कि तीन से सात महीने में ड्यूटी रोटेशन करते रहने से बीमारी से बचा जा सकता है।
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घुटनों की चोट में एक्स-रे में कुछ न आए तो सीटी कराये
आईटीबीपी के चिकित्सा निदेशक डॉ. एचबी मोहंती और बैंगलुरु के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गिलबर्ट जोसेफ की उपस्थिति में गंगाशील अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार हिरानी ने नी एंड लैगामेंट इंजरी पर व्याख्यान दिया। फौजियों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान नी इंजरी सबसे ज्यादा होती है। डॉ. हिरानी ने कहा कि घुटनों की चोट में मूवमेंट बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आई बैग लगाकर आराम देने की कोशिश की जानी चाहिए। अगर एक्स-रे में कुछ भी न आए तो भी स्थिति गंभीर हो सकती है। सीटी स्कैन कराना चाहिए। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. शकील अहमद ने जनरल प्रिंसिपल एंड इंपार्टेंश पर व्याख्यान दिया। सीएमई के खत्म होने के बाद क्षेत्रीय मुख्यालय पर हिमवीर जवानों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
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