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गांधी परिवार को घेरने के लिए मेनका को सुल्तानपुर भेजा
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गांधी परिवार को घेरने के लिए मेनका को सुल्तानपुर भेजा
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। पीलीभीत की सांसद और केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी का टिकट म्यूचुअल ट्रांसफर के चक्कर में कई दिनों तक लटका रहा। भाजपा ने सुल्तानपुर के नजदीक अमेठी और रायबरेली सीटों पर गांधी परिवार को घेरने के लिए ही मेनका गांधी को उनके पति संजय गांधी की पैत्रक सीट का हवाला देकर सुल्तानपुर भेजा। मेनका हरियाणा के करनाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना थी। वह सीट उनको अधिक सुरक्षित लग रही थी। मेनका गांधी ने वरुण को पीलीभीत से चुनाव लड़ाने का मन बहुत पहले ही बना लिया था।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का हरियाणा के करनाल में मायका है। इस बात की पुष्टि खुद उन्होंने करते हुए बताया कि इस वजह से वह करनाल से लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाए थीं। मगर, भाजपा नेतृत्व ने जब पति संजय गांधी की पैत्रक सीट सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने की बात कही तो वह मना नहीं कर पायीं। सूत्रों की मानें तो मेनका हरियाणा की करनाल सीट पर टिकट के लिए अंत तक अड़ी रहीं। मगर, भाजपा हाईकमान ने उनको सुल्तानपुर से ही टिकट दिया। उसकी वजह यह थी कि अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल गांधी के खिलाफ केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मैदान में हैं। गांधी परिवार को अवध क्षेत्र में घेरने की रणनीति के तहत मेनका को सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने का भाजपा ने दांव चला। बीच में मेनका गांधी की चर्चा दूसरे दलों के टिकट पर भी चुनाव लड़ने की चलने लगी थी। पीलीभीत और सुल्तानपुर सीट से भाजपा की टिकट घोषणा में देरी भी इसी जद्दोजेहद की वजह से हुई।
पीलीभीत घर जैसा
पीलीभीत की सांसद मेनका गांधी ने कहा कि पीलीभीत उनके लिए लोकसभा क्षेत्र न होकर घर जैसा रहा है और आगे भी रहेगा। भले ही वह सांसद कहीं से भी रहें। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में मेनका ने कहा कि पीलीभीत की जनता से अपने परिवार जैसा ही प्रेम करती रहेंगी। उनका बेटा वरुण पहले भी पीलीभीत से लड़कर रिकार्ड वोटों से चुनाव जीत चुका है। इसलिए उसके लिए यह क्षेत्र नया नहीं है। अब उनकी जगह वरुण पीलीभीत से एक बार फिर चुनाव लड़ेगा। उधर, भाजपा प्रत्याशी बने वरुण गांधी ने कहा कि पीलीभीत से टिकट मिलने पर वह गर्व महसूस कर रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का हरियाणा के करनाल में मायका है। इस बात की पुष्टि खुद उन्होंने करते हुए बताया कि इस वजह से वह करनाल से लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाए थीं। मगर, भाजपा नेतृत्व ने जब पति संजय गांधी की पैत्रक सीट सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने की बात कही तो वह मना नहीं कर पायीं। सूत्रों की मानें तो मेनका हरियाणा की करनाल सीट पर टिकट के लिए अंत तक अड़ी रहीं। मगर, भाजपा हाईकमान ने उनको सुल्तानपुर से ही टिकट दिया। उसकी वजह यह थी कि अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल गांधी के खिलाफ केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मैदान में हैं। गांधी परिवार को अवध क्षेत्र में घेरने की रणनीति के तहत मेनका को सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने का भाजपा ने दांव चला। बीच में मेनका गांधी की चर्चा दूसरे दलों के टिकट पर भी चुनाव लड़ने की चलने लगी थी। पीलीभीत और सुल्तानपुर सीट से भाजपा की टिकट घोषणा में देरी भी इसी जद्दोजेहद की वजह से हुई।
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पीलीभीत घर जैसा
पीलीभीत की सांसद मेनका गांधी ने कहा कि पीलीभीत उनके लिए लोकसभा क्षेत्र न होकर घर जैसा रहा है और आगे भी रहेगा। भले ही वह सांसद कहीं से भी रहें। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में मेनका ने कहा कि पीलीभीत की जनता से अपने परिवार जैसा ही प्रेम करती रहेंगी। उनका बेटा वरुण पहले भी पीलीभीत से लड़कर रिकार्ड वोटों से चुनाव जीत चुका है। इसलिए उसके लिए यह क्षेत्र नया नहीं है। अब उनकी जगह वरुण पीलीभीत से एक बार फिर चुनाव लड़ेगा। उधर, भाजपा प्रत्याशी बने वरुण गांधी ने कहा कि पीलीभीत से टिकट मिलने पर वह गर्व महसूस कर रहे हैं।
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