{"_id":"5c8423eabdec2213f52b6e03","slug":"111552163818-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" मेयर गौतम को फिर हाईकोर्ट में घेरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेयर गौतम को फिर हाईकोर्ट में घेरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। भाजपा के बागी पार्षद विपुल लाला और पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के करीबी रहे पूर्व पार्षद मुनीश शर्मा और राजेश तिवारी ने एक और मामले में मेयर उमेश गौतम की हाईकोर्ट में घेरेबंदी करने की कोशिश की है। याचिका दायर की गई है कि नगर निगम में की गई टैक्स रियायत नियमों के खिलाफ है। इससे जनता को कोई राहत मिलने के बजाय अगले वित्तीय वर्ष में एरियर के साथ टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा।
नगर निगम में भाजपा का कब्जा होने के बाद अपनी चुनावी घोषणा के तहत मेयर उमेश गौतम ने बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराकर टैक्स की दरें कम करने की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि निगम ने टैक्स दरों में 40-50 प्रतिशत तक कमी कर दी है। पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर और उनके करीबी मुनीश शर्मा ने इस टैक्स रियायत को नियमविरुद्ध बताया था। इसको लेकर मुनीश शर्मा ने पहले कमिश्नर से भी शिकायत की थी, लेकिन कमिश्नर के स्तर पर इसका संज्ञान नहीं लिया गया। इसके बाद अब दो मुनीश शर्मा, राजेश तिवारी और विपुल लाला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने टैक्स की दरों में कमी को अवैध बताया है। कहा है कि इसका खामियाजा जनता को भुगतना होगा और अगले वित्तीय वर्ष में लोगों को नए टैक्स के साथ पिछले साल टैक्स में मिली छूट का बतौर एरियर भुगतान करना होगा।
विज्ञापन
नगर निगम में भाजपा का कब्जा होने के बाद अपनी चुनावी घोषणा के तहत मेयर उमेश गौतम ने बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराकर टैक्स की दरें कम करने की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि निगम ने टैक्स दरों में 40-50 प्रतिशत तक कमी कर दी है। पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर और उनके करीबी मुनीश शर्मा ने इस टैक्स रियायत को नियमविरुद्ध बताया था। इसको लेकर मुनीश शर्मा ने पहले कमिश्नर से भी शिकायत की थी, लेकिन कमिश्नर के स्तर पर इसका संज्ञान नहीं लिया गया। इसके बाद अब दो मुनीश शर्मा, राजेश तिवारी और विपुल लाला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने टैक्स की दरों में कमी को अवैध बताया है। कहा है कि इसका खामियाजा जनता को भुगतना होगा और अगले वित्तीय वर्ष में लोगों को नए टैक्स के साथ पिछले साल टैक्स में मिली छूट का बतौर एरियर भुगतान करना होगा।
विज्ञापन