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घोटालेबाजों ने मनचाही क्वैरी से आपूर्ति कराने का आर्डर करवाया
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बरेली। सड़क निर्माण में सस्ती बजरी खपाने के लिए घोटालेबाजों ने मनचाही क्वैरी से आपूर्ति कराने का आर्डर पास करा लिया है। जबकि अब तक उत्तराखंड से ही बजरी मंगवाने की अनुमति थी। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि उत्तराखंड में खनन कम होने से बजरी की किल्लत हो रही है। ऐसे में निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे।
सड़क निर्माण में पहले भी घटिया बजरी के इस्तेमाल के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले साल पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी ने शाहजहांपुर में निर्माणाधीन बाईपास सहित कई दूसरी सड़कों की जांच कराई थी। शासन में यह शिकायत पहुंची थी कि सड़कों को बनाने में उत्तराखंड के बजाय मध्यप्रदेश की घटिया बजरी का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि इसके लिए केवल उत्तराखंड से आने वाली बजरी को ही अव्वल मानते हुए उसी का प्रयोग करने के आदेश हैं। उत्तराखंड और दूसरे स्थानों की बजरी के रेट में भी काफी फर्क है। इसलिए घोटालेबाज उत्तराखंड के बजाय दूसरी क्वैरी से सस्ती बजरी खपाकर गड़बड़ी करते रहे हैं। यह मामला खुलने के बाद घोटालेबाजों के बीच काफी खलबली मची रही। हालांकि बाद में इन सड़कों की जांच के नाम पर खानापूर्ति ही की गई। इससे इसमें शामिल लोगों में एक के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर, गड़बड़ी करने वालों ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों के साथ मिलकर उत्तराखंड को छोड़कर दूसरी जगहों की क्वैरी से भी बजरी मंगवाने का आदेश पारित करा लिया है। हाल में अधीक्षण अभियंता पीके सक्सेना ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए आगरा वृत्त की घाटरी व खेड़ा ठाकुर क्वैरी और बांदा वृत्त की कबरई क्वैरी से बजरी मंगवाने की छूट ठेकेदारों को दे दी है। कारण बताया जा रहा है कि उत्तराखंड से पर्याप्त मात्रा में बजरी की आपूर्ति नहीं हो पा रही।
उत्तराखंड से बजरी की आपूर्ति समुचित मात्रा में नहीं हो पा रही। इसलिए दूसरी जगहों की क्वैरी के आदेश दिए गए हैं। रही गुणवत्ता की बात तो इसमें कोई समझौता नहीं हो रहा है। - राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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सड़क निर्माण में पहले भी घटिया बजरी के इस्तेमाल के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले साल पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी ने शाहजहांपुर में निर्माणाधीन बाईपास सहित कई दूसरी सड़कों की जांच कराई थी। शासन में यह शिकायत पहुंची थी कि सड़कों को बनाने में उत्तराखंड के बजाय मध्यप्रदेश की घटिया बजरी का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि इसके लिए केवल उत्तराखंड से आने वाली बजरी को ही अव्वल मानते हुए उसी का प्रयोग करने के आदेश हैं। उत्तराखंड और दूसरे स्थानों की बजरी के रेट में भी काफी फर्क है। इसलिए घोटालेबाज उत्तराखंड के बजाय दूसरी क्वैरी से सस्ती बजरी खपाकर गड़बड़ी करते रहे हैं। यह मामला खुलने के बाद घोटालेबाजों के बीच काफी खलबली मची रही। हालांकि बाद में इन सड़कों की जांच के नाम पर खानापूर्ति ही की गई। इससे इसमें शामिल लोगों में एक के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर, गड़बड़ी करने वालों ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों के साथ मिलकर उत्तराखंड को छोड़कर दूसरी जगहों की क्वैरी से भी बजरी मंगवाने का आदेश पारित करा लिया है। हाल में अधीक्षण अभियंता पीके सक्सेना ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए आगरा वृत्त की घाटरी व खेड़ा ठाकुर क्वैरी और बांदा वृत्त की कबरई क्वैरी से बजरी मंगवाने की छूट ठेकेदारों को दे दी है। कारण बताया जा रहा है कि उत्तराखंड से पर्याप्त मात्रा में बजरी की आपूर्ति नहीं हो पा रही।
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उत्तराखंड से बजरी की आपूर्ति समुचित मात्रा में नहीं हो पा रही। इसलिए दूसरी जगहों की क्वैरी के आदेश दिए गए हैं। रही गुणवत्ता की बात तो इसमें कोई समझौता नहीं हो रहा है। - राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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