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नगर आयुक्त को ले डूबी स्मार्ट सिटी के बजट की खींचतान
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बरेली। स्मार्ट सिटी के बजट की खींचतान नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव को भारी पड़ गई। काम में अड़ंगेबाजी को लेकर एक बड़े अफसर के खिलाफ उनके ‘रहनुमा’ की बयानबाजी भी उनके तबादले की वजह बनी। स्मार्ट सिटी के बजट की कंट्रोलिंग नगर निगम के पास रहे या फिर साहब के पास, इसे लेकर साहब से शुरू हुई जंग बड़े नेताओं तक पहुंच गई। बड़े अफसर इस बयानबाजी को लेकर ‘बॉस’ पर तो दबाव नहीं बना पाए, लेकिन उसकी गाज एक बड़े संपर्क के जरिए नगर आयुक्त पर गिर गई।
बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए अभी करीब 54 करोड़ का बजट मिला है। इसका हिसाब-किताब कौन रखे, इसको लेकर एक बड़े साहब से नगर निगम के निजाम की खींचतान हो गई। नगर निगम के शाहे सरकार फ्रंट फुट पर आकर अफसर के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, मगर बड़े साहब यह जानते थे कि इस बयानबाजी के पीछे कौन है। बस, साहब ने यह मेसेज अपने दिग्गज संपर्क तक पहुंचा दिया। यह दिग्गज इस बात से भी नाराज थे कि नगर निगम में जबसे भाजपा की सत्ता आई है, तबसे लगातार नगर आयुक्त किसी और की कुछ सुन ही नहीं रहे थे। इसलिए वह ऐसे तेज तर्रार अफसर को नगर निगम में लाना चाहते थे कि वह किसी भी बात पर नेताजी से ‘यस सर’ न कहता रहे। वह स्मार्ट सिटी के कुछ काम अपने हिसाब से भी करे। इसके चलते ही निवर्तमान नगर आयुक्त को आचार संहिता लगने से पहले जाना पड़ा।
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बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए अभी करीब 54 करोड़ का बजट मिला है। इसका हिसाब-किताब कौन रखे, इसको लेकर एक बड़े साहब से नगर निगम के निजाम की खींचतान हो गई। नगर निगम के शाहे सरकार फ्रंट फुट पर आकर अफसर के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, मगर बड़े साहब यह जानते थे कि इस बयानबाजी के पीछे कौन है। बस, साहब ने यह मेसेज अपने दिग्गज संपर्क तक पहुंचा दिया। यह दिग्गज इस बात से भी नाराज थे कि नगर निगम में जबसे भाजपा की सत्ता आई है, तबसे लगातार नगर आयुक्त किसी और की कुछ सुन ही नहीं रहे थे। इसलिए वह ऐसे तेज तर्रार अफसर को नगर निगम में लाना चाहते थे कि वह किसी भी बात पर नेताजी से ‘यस सर’ न कहता रहे। वह स्मार्ट सिटी के कुछ काम अपने हिसाब से भी करे। इसके चलते ही निवर्तमान नगर आयुक्त को आचार संहिता लगने से पहले जाना पड़ा।
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