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वर्षों पुरानी जिल्दों की बाइंडिंग के लिए आठ साल से नहीं मिली रकम

Wed, 09 Jan 2019 01:34 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 09 Jan 2019 01:34 AM IST
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वर्षों पुरानी जिल्दों की बाइंडिंग के लिए आठ साल से नहीं मिली रकम
बरेली। रिकार्ड रूम में 70 से 80 साल पुराने जमीन संबंधी जिल्द रिकार्ड की बाइंडिंग करीब आठ साल से नहीं हुई है। ऐसे में सैकड़ों अहम दस्तावेजों के पन्ने लगातार फट रहे हैं और उसमें दीमक लग रहा है। जिल्द की मरम्मत कराने के लिए टेंडर की फाइल कई बार डीएम दफ्तर भेजी जा चुकी हैं लेकिन भूलेख अधिकारी की तरफ से इसे लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। कमिश्नर के आदेश पर रिकार्ड रूम के स्टाफ ने सर्वे किया तो करीब दो हजार जिल्दों के खस्ताहाल होने का अनुमान लगाया गया है। इसकी बाइंडिंग के लिए करीब पांच लाख रुपये की जरूरत है। इस धनराशि को मंजूर कराने के लिए फिर से फाइल दौड़ाई जा रही है।
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रिकार्ड रूम के स्टाफ का कहना है कि अभिलेखागार में 2116 गांवों के करीब 14000 हजार चकबंदी संबंधित जिल्द रिकार्ड हैं। इसमें 1305 फसली वर्ष यानी वर्ष 1937 में तैयार हुई जिल्द भी हैं। बताते हैं कि इसमें से बड़ी तादाद में जिल्द रखरखाव और मरम्मत के अभाव में खराब हो रही हैं। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के आदेश के बाद अभिलेखागार के स्टाफ ने सर्वे किया है तो इसमें करीब दो हजार जिल्द दस्तावेजों के दुर्दशाग्रस्त होने का ब्योरा सामने आया है। स्टाफ का कहना है कि करीब आठ साल के दौरान दो बार पहले भी बजट मांगा जा चुका है लेकिन उसके पास न होने से जिल्द बाइंडिंग का काम अटका हुआ है।
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खतौनियों का डाटा ऑनलाइन करने के लिए दोबारा नहीं हुई कोशिश
रिकार्ड रूम में खतौनियों के रजिस्टर भी लगातार खराब हो रहे हैं। वर्ष 2011-12 में एक आउट सोर्सिंग कंपनी को खतौनियों के रिकार्ड को अपलोड करने का काम सौंपा गया था। लेकिन कंपनी बीच में ही काम छोड़कर गायब हो गई है। ऐसे में लोगों को अभी भी करीब आठ साल के पहले की खतौनियों की ऑनलाइन नकल नहीं मिल पा रही है। वहीं रिकार्ड रूम में करीब 30 से 40 साल पुरानी बिजली की वायरिंग है। कई जगहों पर यह खुली हुई भी है। इससे इसमें स्पार्किंग से आग लगने की खतरे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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