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25 लाख में मरीजों को सिर्फ कंप्यूटर से पर्चा ही मिल सका
Updated Sat, 18 Aug 2018 04:48 PM IST
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25 लाख खर्च फिर भी ऑनलाइन नहीं हुईं जिला अस्पताल की सेवाएं
- ओपीडी, ब्लड बैंक, डॉक्टर, पैथोलॉजी की जानकारी मरीजों को देनी थी ऑनलाइन
बस ओपीडी का पर्चा ही कंप्यूटर से जारी होना शुरू हो सका, इसमें भी लग रहा पांच गुना समय
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मरीज घर बैठे ही जिला अस्पताल की ओपीडी, ब्लड बैंक, डॉक्टर और वार्डों में बेड की उपलब्धता के बारे में जान सकें, इसके लिए ई-हॉस्पिटल की योजना के तहत शासन ने जिला अस्पताल प्रशासन को 25 लाख रुपये दिए थे। मरीजों को ये सुविधायें अब तक नहीं मिली हैं, बस ओपीडी का पर्चा कंप्यूटर से छपा हुआ मिलने लगा है। इसमें भी पांच गुना ज्याजा समय लग रहा है। जिला अस्पताल में बीएसएनएल की ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछने के बावजूद कनेक्टिविटी न होने की बात कही जा रही है।
मरीजों को घर बैठे अपनी बीमारी के हिसाब से विशेषज्ञ डॉक्टर का ओपीडी पर्चा बुक करने के लिए ई-हॉस्पिटल सेवा तीन महीने पहले शुरू की गई थी। सरकार ने इसके लिए सिल्वर टच कंपनी से अनुबंध करके चार कर्मचारियों की तैनाती की। कोशिश यह थी कि ओपीडी, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी, बिलिंग सेक्शन समेत सभी सेवाएं ऑनलाइन कर दी जाएं। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में मरीजों का पर्चा कंप्यूटर से प्रिंट करके दिया जाने लगा है। मरीजों ने बताया कि मैन्युअल जिस पर्चे को एक मिनट में बनाकर दिया जाता था, वह कंप्यूटर से पांच मिनट में मिल रहा है।
विभाग भी इंटरकनेक्ट नहीं हो सके
शुरुआती दौर में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, दवा स्टोर, ब्लड बैंक और पैथोलॉजी में 30 कंप्यूटर लगाए जाने थे। इससे अस्पताल के सभी विभाग भी इंटरनेट के जरिए आपस में कनेक्ट होने थे, ताकि लखनऊ में बैठे अधिकारी भी जिला अस्पताल की गतिविधियों पर नजर रख सकें।
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वर्जन-
ओपीडी के पर्चे कंप्यूटर से बनाकर मरीजों को दिए जाने लगे हैं। अभी ब्लड बैंक, पैथोलॉजी और बिलिंग सेक्शन को कंप्यूटर से नहीं जोड़ा जा सका है। जल्द मरीजों को ऑनलाइन सुविधाएं मुहैया कराई जाने लगेंगी। - केएस गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल
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- ओपीडी, ब्लड बैंक, डॉक्टर, पैथोलॉजी की जानकारी मरीजों को देनी थी ऑनलाइन
बस ओपीडी का पर्चा ही कंप्यूटर से जारी होना शुरू हो सका, इसमें भी लग रहा पांच गुना समय
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मरीज घर बैठे ही जिला अस्पताल की ओपीडी, ब्लड बैंक, डॉक्टर और वार्डों में बेड की उपलब्धता के बारे में जान सकें, इसके लिए ई-हॉस्पिटल की योजना के तहत शासन ने जिला अस्पताल प्रशासन को 25 लाख रुपये दिए थे। मरीजों को ये सुविधायें अब तक नहीं मिली हैं, बस ओपीडी का पर्चा कंप्यूटर से छपा हुआ मिलने लगा है। इसमें भी पांच गुना ज्याजा समय लग रहा है। जिला अस्पताल में बीएसएनएल की ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछने के बावजूद कनेक्टिविटी न होने की बात कही जा रही है।
मरीजों को घर बैठे अपनी बीमारी के हिसाब से विशेषज्ञ डॉक्टर का ओपीडी पर्चा बुक करने के लिए ई-हॉस्पिटल सेवा तीन महीने पहले शुरू की गई थी। सरकार ने इसके लिए सिल्वर टच कंपनी से अनुबंध करके चार कर्मचारियों की तैनाती की। कोशिश यह थी कि ओपीडी, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी, बिलिंग सेक्शन समेत सभी सेवाएं ऑनलाइन कर दी जाएं। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में मरीजों का पर्चा कंप्यूटर से प्रिंट करके दिया जाने लगा है। मरीजों ने बताया कि मैन्युअल जिस पर्चे को एक मिनट में बनाकर दिया जाता था, वह कंप्यूटर से पांच मिनट में मिल रहा है।
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विभाग भी इंटरकनेक्ट नहीं हो सके
शुरुआती दौर में जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, दवा स्टोर, ब्लड बैंक और पैथोलॉजी में 30 कंप्यूटर लगाए जाने थे। इससे अस्पताल के सभी विभाग भी इंटरनेट के जरिए आपस में कनेक्ट होने थे, ताकि लखनऊ में बैठे अधिकारी भी जिला अस्पताल की गतिविधियों पर नजर रख सकें।
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ओपीडी के पर्चे कंप्यूटर से बनाकर मरीजों को दिए जाने लगे हैं। अभी ब्लड बैंक, पैथोलॉजी और बिलिंग सेक्शन को कंप्यूटर से नहीं जोड़ा जा सका है। जल्द मरीजों को ऑनलाइन सुविधाएं मुहैया कराई जाने लगेंगी। - केएस गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल