{"_id":"5cd1e9d2bdec220746189e60","slug":"101557260754-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोर्टेबल शॉप प्रकरणपोर्टेबल शॉप प्रकरण- व्यापारियोें ने नगर निगम के पाले में फेंकी गेंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोर्टेबल शॉप प्रकरणपोर्टेबल शॉप प्रकरण- व्यापारियोें ने नगर निगम के पाले में फेंकी गेंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पोर्टेबल शॉप मामले की दोबारा जांच कराने वाले शिकायतकर्ता व्यापारी नेताओं ने आखिरकार जांच अधिकारी एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को अपना लिखित बयान बृहस्पतिवार को दे दिया। व्यापारी नेताओं का कहना है कि व्यापारी दर्शनलाल भटिया ने वेंडरों से पोर्टेबल शॉप रखवाने के मामले में कोई अवैध वसूली नहीं की है। यह सारा प्रोजेक्ट शहर को स्मार्ट बनाने के लिए नगर निगम का था। नगर निगम के ठेकेदार ने पोर्टेबल शॉप एक लाख 25 हजार रुपये में देना तय किया था।
गौरतलब है कि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने डीएम को यह चिट्ठी भेजी थी कि इंदिरा मार्केट में रखीं पोर्टेबल शॉप अवैध हैं। इनका नगर निगम से कोई लेनादेना नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की जांच में अधिकृत तौर से पोर्टेबल शॉप रखवाने और दुकानदारों से इन दुकानों के आवंटन के बदले वसूली करने का मामला सामने आया था। इस पर नगर आयुक्त ने व्यापारी दर्शनलाल भाटिया पर एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसका उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने विरोध किया और दोबारा जांच कराने की मांग की। इस प्रकरण की फिर से जांच कर रहे एडीएम सिटी महेंद्र कुमार शिकायतकर्ता राजेंद्र गुप्ता सहित तीन व्यापारी नेताओं से इसमें लिखित बयान देेने के लिए कहा था।
गुरुवार को व्यापारियों ने इसमें अपने लिखित बयान दे दिए हैं। इसमें व्यापारियों ने कहा कि इंदिरा मार्केट में 119 फड़ थे, जो नियमित तौर से नगर निगम के किराएदार हैं। इन्हें पोर्टेबल शॉप में बदलकर शहर को स्मार्ट बनाने का प्रस्ताव नगर निगम का था। नगर निगम ने ही फेरा समिति 2005 के तहत टीवीसी (टाउन वेंडिंग कमेटी) का गठन कर इंदिरा मार्केट को सुव्यवस्थित बनाने के लिए पोर्टेबल शॉप नगर निगम के अधिकृत ठेकेदार से लेने का प्रस्ताव व्यापार मंडल के पदाधिकारी दर्शनलाल भाटिया को दिया था। ठेकेदार ने 125000 रुपये लेकर दुकानें देना तय किया था। नगर निगम ने सभी दुकानदारों का बायोमैट्रिक कराकर डूडा ने सभी को प्रमाण पत्र भी वितरित किए थे। व्यापारियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में दर्शनलाल भटिया का कोई दोष नहीं है। सभी वेंडरों से पोर्टेबल शॉप देने के लिए रुपये लिए गए थे। दुकानदारों को बाकायदा इसकी रसीदें भी दी गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गौरतलब है कि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने डीएम को यह चिट्ठी भेजी थी कि इंदिरा मार्केट में रखीं पोर्टेबल शॉप अवैध हैं। इनका नगर निगम से कोई लेनादेना नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की जांच में अधिकृत तौर से पोर्टेबल शॉप रखवाने और दुकानदारों से इन दुकानों के आवंटन के बदले वसूली करने का मामला सामने आया था। इस पर नगर आयुक्त ने व्यापारी दर्शनलाल भाटिया पर एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसका उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने विरोध किया और दोबारा जांच कराने की मांग की। इस प्रकरण की फिर से जांच कर रहे एडीएम सिटी महेंद्र कुमार शिकायतकर्ता राजेंद्र गुप्ता सहित तीन व्यापारी नेताओं से इसमें लिखित बयान देेने के लिए कहा था।
विज्ञापन
गुरुवार को व्यापारियों ने इसमें अपने लिखित बयान दे दिए हैं। इसमें व्यापारियों ने कहा कि इंदिरा मार्केट में 119 फड़ थे, जो नियमित तौर से नगर निगम के किराएदार हैं। इन्हें पोर्टेबल शॉप में बदलकर शहर को स्मार्ट बनाने का प्रस्ताव नगर निगम का था। नगर निगम ने ही फेरा समिति 2005 के तहत टीवीसी (टाउन वेंडिंग कमेटी) का गठन कर इंदिरा मार्केट को सुव्यवस्थित बनाने के लिए पोर्टेबल शॉप नगर निगम के अधिकृत ठेकेदार से लेने का प्रस्ताव व्यापार मंडल के पदाधिकारी दर्शनलाल भाटिया को दिया था। ठेकेदार ने 125000 रुपये लेकर दुकानें देना तय किया था। नगर निगम ने सभी दुकानदारों का बायोमैट्रिक कराकर डूडा ने सभी को प्रमाण पत्र भी वितरित किए थे। व्यापारियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में दर्शनलाल भटिया का कोई दोष नहीं है। सभी वेंडरों से पोर्टेबल शॉप देने के लिए रुपये लिए गए थे। दुकानदारों को बाकायदा इसकी रसीदें भी दी गई हैं।
विज्ञापन