{"_id":"5cc2041ebdec22143b6f2cf6","slug":"101556218910-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुस्लिमों की दौड़ देखकर हिंदुओं में मची होड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुस्लिमों की दौड़ देखकर हिंदुओं में मची होड़
विज्ञापन
मुस्लिमों की दौड़ देखकर देख हिंदुओं में मची होड़
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। इस लोकसभा चुनाव में जिस तरह सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण हुआ, वह भी सबको चकित कर गया। मुसलमान मोदी के खिलाफ 20 दिन पहले तक कांग्रेस में जाने का मन बनाए हुए थे, लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने हालात देखकर फैसला बदलकर गठबंधन को चुना। हिंदुओं ने मुसलमानों को एक तरफ जाते देखा तो वे भी भाजपा के लिए एकजुट हो गए।
मीरगंज के अधिकांश हिंदु बहुल बूथों पर 55 से 65 फीसदी, नवाबगंज में 66 फीसदी, बरेली शहर में 56.43 फीसदी वोट पड़ गए जबकि इन इलाकों में पिछले चुनावों में लगभग 45 प्रतिशत तक ही औसत रहता था। कुछ ग्रामीण पोलिंग बूथ पर हिंदुओं की वोटिंग 70 प्रतिशत पार निकल गई। उमरिया के पड़ोस के दलित बहुल गांव खजुरिया में 91 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े। सावन में यहां कांवड़ पर दलितों का उमरिया के मुसलमानों से विवाद हुआ था जो फिर मोहर्रम तक खिंचा था। मुस्लिम बहुल मोहनपुर में 51 फीसदी मतदान हो पाया। गांव के दलित मतदाता भाजपा में गए। कुछ दिन पहले यहां भी हिंदू-मुस्लिम विवाद हुआ था।
विज्ञापन
मीरगंज के अधिकांश हिंदु बहुल बूथों पर 55 से 65 फीसदी, नवाबगंज में 66 फीसदी, बरेली शहर में 56.43 फीसदी वोट पड़ गए जबकि इन इलाकों में पिछले चुनावों में लगभग 45 प्रतिशत तक ही औसत रहता था। कुछ ग्रामीण पोलिंग बूथ पर हिंदुओं की वोटिंग 70 प्रतिशत पार निकल गई। उमरिया के पड़ोस के दलित बहुल गांव खजुरिया में 91 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े। सावन में यहां कांवड़ पर दलितों का उमरिया के मुसलमानों से विवाद हुआ था जो फिर मोहर्रम तक खिंचा था। मुस्लिम बहुल मोहनपुर में 51 फीसदी मतदान हो पाया। गांव के दलित मतदाता भाजपा में गए। कुछ दिन पहले यहां भी हिंदू-मुस्लिम विवाद हुआ था।
विज्ञापन