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किसी ने बहका दिया था मैडम को, समझाया तो मान गईं
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बरेली। मैडम को न जाने किसने बहका दिया था कि इग्नू की जेल विजिटर बनने के बाद वह अपनी कार पर अशोक की लाट का चिह्न लगाने की अधिकारी हो गई हैं, लेकिन सोमवार को विश्वविद्यालय में इस पर एतराज जताया गया तो उन्हें अपनी गलती समझ में आ गई। मंगलवार को जब वह विश्वविद्यालय पहुंचीं तो उनकी कार पर अशोक का चिह्न नहीं दिख रहा था। उसके ऊपर कागज लगाकर उसे छिपा दिया गया था।
पीलीभीत के उपाधि कॉलेज की शिक्षक की ड्यूटी विश्वविद्यालय के मूल्यांकन में लगाई गई थी। सोमवार को जब वह सुबह मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय पहुंचीं तो उनकी कार की अगली नंबर प्लेट पर अशोक का चिह्न देखकर स्टाफ में खुसुरपुसुर शुरू हो गई। विश्वविद्यालय गेट पर ही मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के सचिव मनोज पांडेय यह देखकर उन्हें रोक लिया। पहले तो मैडम ने मनोज से काफी बहस की लेकिन जब उन्होंने नियमावली दिखाई तो मैडम बैकफुट पर आ गईं और शांत होकर वहां चली गईं। इसके बाद मंगलवार को मैडम मूल्यांकन को पहुंचीं तो नंबर प्लेट पर अशोक चिह्न एक कागज चिपकाकर छिपा दिया गया था। पता चला कि मैडम को किसी ने बहका दिया था कि इग्नू की ओर से जेल विजिटर बनने के बाद वह अशोक का चिह्न कार पर लगाने के लिए अधिकृत हो गई हैं। उन्हें अपनी गलती समझ में आई तो मान गईं।
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पीलीभीत के उपाधि कॉलेज की शिक्षक की ड्यूटी विश्वविद्यालय के मूल्यांकन में लगाई गई थी। सोमवार को जब वह सुबह मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय पहुंचीं तो उनकी कार की अगली नंबर प्लेट पर अशोक का चिह्न देखकर स्टाफ में खुसुरपुसुर शुरू हो गई। विश्वविद्यालय गेट पर ही मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के सचिव मनोज पांडेय यह देखकर उन्हें रोक लिया। पहले तो मैडम ने मनोज से काफी बहस की लेकिन जब उन्होंने नियमावली दिखाई तो मैडम बैकफुट पर आ गईं और शांत होकर वहां चली गईं। इसके बाद मंगलवार को मैडम मूल्यांकन को पहुंचीं तो नंबर प्लेट पर अशोक चिह्न एक कागज चिपकाकर छिपा दिया गया था। पता चला कि मैडम को किसी ने बहका दिया था कि इग्नू की ओर से जेल विजिटर बनने के बाद वह अशोक का चिह्न कार पर लगाने के लिए अधिकृत हो गई हैं। उन्हें अपनी गलती समझ में आई तो मान गईं।
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