{"_id":"5c9a8383bdec22143f757f37","slug":"101553630083-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिशासी अधिकारी नगर पालिका आंवला सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका आंवला सस्पेंड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। जिले में परत दर परत घोटाले हो रहे हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि कार्यालयों में जाम छलकाए जाते हैं। जिला पंचायत और स्थानीय निकायाें में मनमानी और भ्रष्टाचार चरम पर है। शासन से आई से एक मामले में मंडलायुक्त ने जांच कराई तो 14 वें वित्त आयोग में आवंटित बजट में घोटाला और गबन पाया गया। रिपोर्ट मिलते ही शासन ने अधिशासी अधिकारी आंवला और बिशारतगंज को सस्पेंड कर दिया गया है।
शासन ने स्थानीय मिलीभगत से दो स्थानों नगर पालिका आंवला और बिशारतगंज नगर पंचायत में तैनात अधिशासी अधिकारी (ईओ) को सरकारी बजट इधर-उधर खपाने और गबन करने का दोषी पाया गया है। ईओ राजेश सक्सेना द्वारा किए जा रहे घोटालों और मनमानी की दर्जनों शिकायतें शासन तक पहुंच रही थीं, लेकिन ईओ का प्रभाव ऊपर तक होने से जांच स्थानीय स्तर पर ठप हो जाती थी। इस बार शासन ने मंडलायुक्त बरेली से जांच कराईं तो गंभीर मामलों का खुलासा हुआ। मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने दो माह पहले विभिन्न आरोपों की बिंदुवार जांच कराकर रिपोर्ट शासन और स्थानीय निकाय निदेशालय भेज दी। नगर विकास विभाग ने आयुक्त द्वारा कराई जांच परीक्षण में सही पाए जाने पर राजेश को निलंबित कर दिया गया। निदेशक डा. काजल ने आदेश जारी कर कहा है कि वित्तीय गड़बड़ी और गबन आदि के आरोपी ईओ राजेश सक्सेना निलंबन कार्यकाल में डीएम बरेली कार्यालय से संबद्ध किया जाता है। इसके साथ ही विभागीय जांच अपर सांख्यिकी अधिकारी अशोक कुमार सिंह स्थानीय निकाय को सौंपी गई है।
32 लाख की हेराफरी और गबन
ईओ राजेश सक्सेना अपनी मनमानी कार्यशैली के लिए चर्चित हैं। जांच में पाया गया कि ईओ राजेश ने निरंकुश होकर कार्य करने के साथ ही सरकारी धन अपने हिसाब से खर्च किया। बिजली खंभे और सीएफएल खरीदने, 14 वें वित्त आयोग की धनराशि से खरीदी गई सामग्री में वित्तीय अनियमितता, ईएलडी, हाईमास्ट क्रय, टायलेट, डस्टबिन, ई-रिक्शा खरीद और भुगतान में अंतर मिला है। इसके साथ ही ईओ ने सामान कम खरीदा और भुगतान ज्यादा किया है। आयुक्त द्वारा कराई गई जांच में ईओ करीब 32 लाख रुपये का गबन और हेराफेरी मिली है।
विज्ञापन
कई वर्षों से हो रहा था खेल
पिछले वर्षों कई से नगर पालिका/ परिषद/ पंचायतों में तैनात रहे ईओ राजेश सक्सेना चर्चा में रहे हैं। उनपर गंभीर आरोप लगने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती थी। क्योंकि एडीएम प्रशासन कार्यालय से बेहतर तालमेल था। इसी कार्यालय के अधीन जिले भर की स्थानीय निकाय संबद्ध हैं। बताया जाता है कि संबंधित चेयरमैन आदि पर भी कार्रवाई संभव है।
विज्ञापन
शासन ने स्थानीय मिलीभगत से दो स्थानों नगर पालिका आंवला और बिशारतगंज नगर पंचायत में तैनात अधिशासी अधिकारी (ईओ) को सरकारी बजट इधर-उधर खपाने और गबन करने का दोषी पाया गया है। ईओ राजेश सक्सेना द्वारा किए जा रहे घोटालों और मनमानी की दर्जनों शिकायतें शासन तक पहुंच रही थीं, लेकिन ईओ का प्रभाव ऊपर तक होने से जांच स्थानीय स्तर पर ठप हो जाती थी। इस बार शासन ने मंडलायुक्त बरेली से जांच कराईं तो गंभीर मामलों का खुलासा हुआ। मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने दो माह पहले विभिन्न आरोपों की बिंदुवार जांच कराकर रिपोर्ट शासन और स्थानीय निकाय निदेशालय भेज दी। नगर विकास विभाग ने आयुक्त द्वारा कराई जांच परीक्षण में सही पाए जाने पर राजेश को निलंबित कर दिया गया। निदेशक डा. काजल ने आदेश जारी कर कहा है कि वित्तीय गड़बड़ी और गबन आदि के आरोपी ईओ राजेश सक्सेना निलंबन कार्यकाल में डीएम बरेली कार्यालय से संबद्ध किया जाता है। इसके साथ ही विभागीय जांच अपर सांख्यिकी अधिकारी अशोक कुमार सिंह स्थानीय निकाय को सौंपी गई है।
विज्ञापन
32 लाख की हेराफरी और गबन
ईओ राजेश सक्सेना अपनी मनमानी कार्यशैली के लिए चर्चित हैं। जांच में पाया गया कि ईओ राजेश ने निरंकुश होकर कार्य करने के साथ ही सरकारी धन अपने हिसाब से खर्च किया। बिजली खंभे और सीएफएल खरीदने, 14 वें वित्त आयोग की धनराशि से खरीदी गई सामग्री में वित्तीय अनियमितता, ईएलडी, हाईमास्ट क्रय, टायलेट, डस्टबिन, ई-रिक्शा खरीद और भुगतान में अंतर मिला है। इसके साथ ही ईओ ने सामान कम खरीदा और भुगतान ज्यादा किया है। आयुक्त द्वारा कराई गई जांच में ईओ करीब 32 लाख रुपये का गबन और हेराफेरी मिली है।
विज्ञापन
कई वर्षों से हो रहा था खेल
पिछले वर्षों कई से नगर पालिका/ परिषद/ पंचायतों में तैनात रहे ईओ राजेश सक्सेना चर्चा में रहे हैं। उनपर गंभीर आरोप लगने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती थी। क्योंकि एडीएम प्रशासन कार्यालय से बेहतर तालमेल था। इसी कार्यालय के अधीन जिले भर की स्थानीय निकाय संबद्ध हैं। बताया जाता है कि संबंधित चेयरमैन आदि पर भी कार्रवाई संभव है।