{"_id":"5c35024cbdec2256cc1be9fc","slug":"101546977868-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"650 किसानों को पांच साल बाद भी नहीं मिल पाया मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
650 किसानों को पांच साल बाद भी नहीं मिल पाया मुआवजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। फोरलेन नेशनल हाईवे योजना के तहत तत्कालीन कांग्रेस सरकार में रजऊ परसपुर से परसाखेड़ा तक 30 किलोमीटर लंबा बड़ा बाईपास तो बन गया लेकिन हाईवे के किनारे रहने वाले जिन 33 गांवों के जिन किसानों की जमीन का इसके लिए अधिग्रहण किया गया था, उनमें से 650 किसानों को पांच साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया है। लोकसभा चुनाव नजदीक आते देख अब प्रशासन ने इन किसानों के मुआवजे की डिमांड शासन को भेजी है।
वर्ष 2013-14 में केंद्र की कांग्रेस सरकार में स्वीकृत बड़ा बाईपास का निर्माण प्रारंभ हुआ था। तत्कालीन सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने बड़ा बाईपास बनाने के लिए सरकार में पूरी पैरवी की थी। उस समय एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया) ने बाईपास बनाने के लिए हाईवे के किनारे 33 गांवों के 2400 से ज्यादा किसानों जमीन अधिग्रहीत की थी। हालांकि पहले किसान बाईपास के लिए अपनी जमीन देने को ही तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में 1750 से ज्यादा किसानों ने करार के माध्यम से अपनी जमीन दे दी। इसी बीच वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बन गई। बड़ा बाईपास किनारे रहने वाले गांवों के 650 से ज्यादा किसानों ने जमीन देने का करार नहीं किया। फिर भी प्रशासन ने इन किसानों की जमीनें बिना मुआवजा दिए ले लीं। मुआवजे के रेट को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच मतभेद थे। 650 किसान अपनी ही जमीन का मुआवजा पाने के लिए बीते पांच साल से बरेली के प्रशासनिक अफसरों से लेकर शासन तक चक्कर लगा रहे हैं। मगर, अब तक इन किसानों को सरकार से मुआवजा नहीं मिल पाया है। हाल ही में विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी सुल्तान अशरफ सिद्दीकी ने बचे किसानों को मुआवजे की डिमांड शासन को भेजी है।
किसानों-नौजवानों को लूटने में लगी है सरकार
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों, नौजवानों और छोटे व्यापारियों को लूटने में लगी है ताकि उनकी माली हालत खराब हो और इनकी जमीनें और कारोबार अडानी और अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों को दी जा सकें। सरकार के एजेंडे में किसान नहीं बल्कि पूंजीपति हैं। इसलिए मोदी सरकार किसानों को मुआवजा नहीं देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बड़ा बाईपास के किनारे बचे हुए किसानों को वह मुआवजा दिलाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2013-14 में केंद्र की कांग्रेस सरकार में स्वीकृत बड़ा बाईपास का निर्माण प्रारंभ हुआ था। तत्कालीन सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने बड़ा बाईपास बनाने के लिए सरकार में पूरी पैरवी की थी। उस समय एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया) ने बाईपास बनाने के लिए हाईवे के किनारे 33 गांवों के 2400 से ज्यादा किसानों जमीन अधिग्रहीत की थी। हालांकि पहले किसान बाईपास के लिए अपनी जमीन देने को ही तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में 1750 से ज्यादा किसानों ने करार के माध्यम से अपनी जमीन दे दी। इसी बीच वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बन गई। बड़ा बाईपास किनारे रहने वाले गांवों के 650 से ज्यादा किसानों ने जमीन देने का करार नहीं किया। फिर भी प्रशासन ने इन किसानों की जमीनें बिना मुआवजा दिए ले लीं। मुआवजे के रेट को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच मतभेद थे। 650 किसान अपनी ही जमीन का मुआवजा पाने के लिए बीते पांच साल से बरेली के प्रशासनिक अफसरों से लेकर शासन तक चक्कर लगा रहे हैं। मगर, अब तक इन किसानों को सरकार से मुआवजा नहीं मिल पाया है। हाल ही में विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी सुल्तान अशरफ सिद्दीकी ने बचे किसानों को मुआवजे की डिमांड शासन को भेजी है।
विज्ञापन
किसानों-नौजवानों को लूटने में लगी है सरकार
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों, नौजवानों और छोटे व्यापारियों को लूटने में लगी है ताकि उनकी माली हालत खराब हो और इनकी जमीनें और कारोबार अडानी और अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों को दी जा सकें। सरकार के एजेंडे में किसान नहीं बल्कि पूंजीपति हैं। इसलिए मोदी सरकार किसानों को मुआवजा नहीं देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बड़ा बाईपास के किनारे बचे हुए किसानों को वह मुआवजा दिलाएंगे।
विज्ञापन