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किरन के साथ दरिंदगी भी हुई है
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:22 AM IST
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किरन के साथ दरिंदगी भी हुई है
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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बरेली।
पांच साल बाद सीबीआई को मिली किरन की कहानी बड़ी दर्द भरी है। ममता आश्रम में आने के समय उसकी हालत बेहद खराब थी। वह अकेली शांत बैठी रहती थी, लेकिन किसी की आहट सुनते ही चीख पड़ती थी। इसके पीछे वजह यह है कि किरन के साथ दरिंदगी भी हुई है। मेरठ नारी निकेतन से आई फाइल इस बात की गवाह है। उसमें किरन से साथ हुई दरिंदगी का जिक्र है।
15 जुलाई 2015 को किरन ममता आश्रम में दाखिल हुई। सूत्रों के मुताबिक, उसकी हालत इतनी खराब थी कि कपड़े भी ठीक से नहीं पहनती थी। कपड़े पहनाने पर उतारकर फेंक देती थी। वह गुमसुम बैठी रहती थी। जैसे ही आश्रम के स्टाफ से कोई उसके पास जाता था, वह अचानक चीख पड़ती थी। बमुश्किल समझाकर उसे शांत कराना पड़ता था। खाना खिलाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती। खाने के लिए कहने पर वह गाली देने लगती थी। आश्रम में रहने के दौरान मानसिक अस्पताल में इलाज शुरू हुआ तो किरन की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। सोमवार को तुगलकाबाद (दिल्ली) इलाके में रहने वाले पिता से मुलाकात होने के बाद किरन से चेहरे पर मुस्कान भी दिखी। किरन से पिता तुगलकाबाद इलाके में ही रेलवे में तैनात हैं। इसी इलाके के थाना पुल प्रहलादपुर से किरन लापता हो गई थी।
हमें भी घर जाना है
ममता आश्रम में रहने वाली कु छ लड़कियों के बारे में काउंसलरों से जानकारी की तो उनकी भी अलग-अलग दर्द भरी कहानियां सामने आई हैं। इनमें से भी ज्यादातर लड़कियों से साथ किसी न किसी तरीके से जुल्म हुआ है। इनमें से जिसकी भी दिमागी हालत कुछ ठीक है, वह घर जाने के लिए परेशान है।
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तरन्नुम (27)
यह लड़की खुद को कांच के खेड़े वाली गली बुनकर, मेरठ की रहने वाली बता रही है। उसका कहना है कि वह शादीशुदा है। खाना बताने समय वह आग से झुलस गई थी। सास ने मारपीट करके उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद पति ने भी उसे नहीं स्वीकार किया। तरन्नुम की असली कहानी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
गीता (38)
इस युवती का कहना है कि वह बदायूं की रहने वाली है। उसने अपनी बेटी को मार डाला था। इसके बाद उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया। इसमें सच्चाई कितनी है यह तो जांच के बाद पता लगेगा, लेकिन गीता को भी घर पहुंचाने पर काम शुरू हो गया है। उसके सही पते की तलाश की जा रही है।
सैफुल(25)
इस लड़की ने काउंसलरों को अपना पता ग्राम अड़हरिया पहरी पथरिया, जिला मधूपुर, बिहार बताया है। उसका कहना है कि ट्रेन में वह माता-पिता से बिछड़ गई थी। उसे अड़हरिया स्टेशन तक पहुंचा दो, घर पहुंच जाएगी।
लक्ष्मी (21)
यह लड़की तो नारी निकेतन में जींस की पैंट और टी शर्ट पहनकर आई थी। ऐसा लग रहा था कि अच्छे परिवार से है। वह पिता का नाम अमरनाथ और मां नाम लीलावती बता रही है। भाई का नाम नानकराम बता रही है। खुद को नई दिल्ली की रहने वाली बता रही है।
प्रियंका (35)
यह युवती खुद को फरीदाबाद के जैसिस्क कालोनी की रहने वाली बता रही है। पिता का नाम मोतीलाल, भाईयों का राजेश और कालू बता रही है। बहनों का नाम नीलम और मीरा बता रही है। कहती है कि उसके भाई मिस्त्री का काम करते हैं। उसके पिता गुड़ की दुकान चलाते हैं।
गुलफिशां (27)
इस लड़की ने काउंसलिंग में खुद को जिला महाराजगंज के ग्राम बड़हरा, थाना सिसवा का रहने वाला बताया है। यह भी खुद को ट्रेन में परिवार वालों से बिछड़ जाने की बात बता रही है। कहती है मुझे घर जाना है। स्टाफ की महिलाओं से भी घर ले चलने की जिद करती है।
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पांच साल बाद सीबीआई को मिली किरन की कहानी बड़ी दर्द भरी है। ममता आश्रम में आने के समय उसकी हालत बेहद खराब थी। वह अकेली शांत बैठी रहती थी, लेकिन किसी की आहट सुनते ही चीख पड़ती थी। इसके पीछे वजह यह है कि किरन के साथ दरिंदगी भी हुई है। मेरठ नारी निकेतन से आई फाइल इस बात की गवाह है। उसमें किरन से साथ हुई दरिंदगी का जिक्र है।
15 जुलाई 2015 को किरन ममता आश्रम में दाखिल हुई। सूत्रों के मुताबिक, उसकी हालत इतनी खराब थी कि कपड़े भी ठीक से नहीं पहनती थी। कपड़े पहनाने पर उतारकर फेंक देती थी। वह गुमसुम बैठी रहती थी। जैसे ही आश्रम के स्टाफ से कोई उसके पास जाता था, वह अचानक चीख पड़ती थी। बमुश्किल समझाकर उसे शांत कराना पड़ता था। खाना खिलाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती। खाने के लिए कहने पर वह गाली देने लगती थी। आश्रम में रहने के दौरान मानसिक अस्पताल में इलाज शुरू हुआ तो किरन की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। सोमवार को तुगलकाबाद (दिल्ली) इलाके में रहने वाले पिता से मुलाकात होने के बाद किरन से चेहरे पर मुस्कान भी दिखी। किरन से पिता तुगलकाबाद इलाके में ही रेलवे में तैनात हैं। इसी इलाके के थाना पुल प्रहलादपुर से किरन लापता हो गई थी।
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हमें भी घर जाना है
ममता आश्रम में रहने वाली कु छ लड़कियों के बारे में काउंसलरों से जानकारी की तो उनकी भी अलग-अलग दर्द भरी कहानियां सामने आई हैं। इनमें से भी ज्यादातर लड़कियों से साथ किसी न किसी तरीके से जुल्म हुआ है। इनमें से जिसकी भी दिमागी हालत कुछ ठीक है, वह घर जाने के लिए परेशान है।
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तरन्नुम (27)
यह लड़की खुद को कांच के खेड़े वाली गली बुनकर, मेरठ की रहने वाली बता रही है। उसका कहना है कि वह शादीशुदा है। खाना बताने समय वह आग से झुलस गई थी। सास ने मारपीट करके उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद पति ने भी उसे नहीं स्वीकार किया। तरन्नुम की असली कहानी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
गीता (38)
इस युवती का कहना है कि वह बदायूं की रहने वाली है। उसने अपनी बेटी को मार डाला था। इसके बाद उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया। इसमें सच्चाई कितनी है यह तो जांच के बाद पता लगेगा, लेकिन गीता को भी घर पहुंचाने पर काम शुरू हो गया है। उसके सही पते की तलाश की जा रही है।
सैफुल(25)
इस लड़की ने काउंसलरों को अपना पता ग्राम अड़हरिया पहरी पथरिया, जिला मधूपुर, बिहार बताया है। उसका कहना है कि ट्रेन में वह माता-पिता से बिछड़ गई थी। उसे अड़हरिया स्टेशन तक पहुंचा दो, घर पहुंच जाएगी।
लक्ष्मी (21)
यह लड़की तो नारी निकेतन में जींस की पैंट और टी शर्ट पहनकर आई थी। ऐसा लग रहा था कि अच्छे परिवार से है। वह पिता का नाम अमरनाथ और मां नाम लीलावती बता रही है। भाई का नाम नानकराम बता रही है। खुद को नई दिल्ली की रहने वाली बता रही है।
प्रियंका (35)
यह युवती खुद को फरीदाबाद के जैसिस्क कालोनी की रहने वाली बता रही है। पिता का नाम मोतीलाल, भाईयों का राजेश और कालू बता रही है। बहनों का नाम नीलम और मीरा बता रही है। कहती है कि उसके भाई मिस्त्री का काम करते हैं। उसके पिता गुड़ की दुकान चलाते हैं।
गुलफिशां (27)
इस लड़की ने काउंसलिंग में खुद को जिला महाराजगंज के ग्राम बड़हरा, थाना सिसवा का रहने वाला बताया है। यह भी खुद को ट्रेन में परिवार वालों से बिछड़ जाने की बात बता रही है। कहती है मुझे घर जाना है। स्टाफ की महिलाओं से भी घर ले चलने की जिद करती है।