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डेढ़ साल में योगेश्वर राम ने बनाई अलग पहचान
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2016 11:35 PM IST
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जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का डेढ़ साल का कार्यकाल विवादों से परे रहा। इस कार्यकाल में उन्होंने जिले में कई ऐसे विकास कार्यों को शुरू कराया जो पूरा होने पर जनता के विकास के भागीदार बनेंगे। पंचायत चुनाव में बाराबंकी ही ऐसा जिला था जहां एक भी बूथ पर रिपोलिंग नहीं हुई। नए साल के पहले दिन जिलाधिकारी की तबादला होने की जानकारी मिलते ही जिले की जनता को करारा झटका लगा है।
जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने जून 2014 में जिले की कमान संभाली थी। जिस समय जिलाधिकारी की कुर्सी पर वह बैठे विकास कार्यों की गति बहुत सुस्त थी। विकास के मामले में जिला कई महीनों तक अव्वल रहा।
जनता को आसानी से उपलब्ध हो सके वह जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ही थे। कई घटनाएं इस बात की गवाह बनीं जब डीएम ने किसी ग्रामीण का रात को फोन रिसीव कर उसकी मदद की।
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जिलाधिकारी के कार्य करने का तरीका लोगों को इस कदर भाया कि वह लोगों के चहेते बन गए। उनका डेढ़ साल का कार्यकाल पूरी तरह से निर्विवाद रहा। विवादों को तुरंत हल करा देना डीएम की प्राथमिकता थी। दो चरणों में हुए पंचायत चुनाव को देख लिया जाए तो कहीं पर भी रि-पोल की स्थिति नहीं बनी।
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जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने जून 2014 में जिले की कमान संभाली थी। जिस समय जिलाधिकारी की कुर्सी पर वह बैठे विकास कार्यों की गति बहुत सुस्त थी। विकास के मामले में जिला कई महीनों तक अव्वल रहा।
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जनता को आसानी से उपलब्ध हो सके वह जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ही थे। कई घटनाएं इस बात की गवाह बनीं जब डीएम ने किसी ग्रामीण का रात को फोन रिसीव कर उसकी मदद की।
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जिलाधिकारी के कार्य करने का तरीका लोगों को इस कदर भाया कि वह लोगों के चहेते बन गए। उनका डेढ़ साल का कार्यकाल पूरी तरह से निर्विवाद रहा। विवादों को तुरंत हल करा देना डीएम की प्राथमिकता थी। दो चरणों में हुए पंचायत चुनाव को देख लिया जाए तो कहीं पर भी रि-पोल की स्थिति नहीं बनी।