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Barabanki News: बसों पर सर्दी का असर, आधा से एक घंटा तक लेट
Thu, 13 Nov 2025 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 13 Nov 2025 12:18 AM IST
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कोटवाधाम। बक्षेत्र में बसों के संचालन पर अब सर्दी का असर दिखने लगा है। बसों के आवागमन की समय सारिणी में अघोषित बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसके कारण बसों का संचालन अपने निर्धारित समय से आधा से एक घंटा तक देर से हो रहा है।
अयोध्या जिले की सीमा से लगे भेलसर, शुजागंज, बारिनबाग, नियामतगंज, टिकैतनगर, कोटवाधाम और रामनगर जैसे स्थानों से बाराबंकी होते हुए लखनऊ जाने वाली बसें अब लेट चल रही हैं।
लखनऊ के लिए पहली बस जो पहले सुबह पांच बजे, दूसरी बस साढ़े पांच निकलती थी, मगर अब पांच बजे वाली बस साढ़े पांच व साढ़े पांच बजे वाली बस छह बजे मिलती है। वहीं जो बस सात बजे जाती थी। वह अब आठ बजे के बाद रवाना मिलती है।
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बस संचालन में देरी से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को हो रही है, जिन्हें समय पर अपने गंतव्य पर पहुंचना आवश्यक होता है। शिक्षक शिवकुमार, सरोज और मनोहर ने बताया कि बसों के आधा या एक घंटा तक लेट होने से उन्हें स्कूल-कॉलेज पहुंचने में अब देरी हो रही है। जिला मुख्यालय की कचहरी में काम करने वाले राम शंकर और राम कुमार का कहना है कि बसों का संचालन मौसम देखकर नहीं, बल्कि समय सारणी के अनुसार होना चाहिए।
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अयोध्या जिले की सीमा से लगे भेलसर, शुजागंज, बारिनबाग, नियामतगंज, टिकैतनगर, कोटवाधाम और रामनगर जैसे स्थानों से बाराबंकी होते हुए लखनऊ जाने वाली बसें अब लेट चल रही हैं।
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लखनऊ के लिए पहली बस जो पहले सुबह पांच बजे, दूसरी बस साढ़े पांच निकलती थी, मगर अब पांच बजे वाली बस साढ़े पांच व साढ़े पांच बजे वाली बस छह बजे मिलती है। वहीं जो बस सात बजे जाती थी। वह अब आठ बजे के बाद रवाना मिलती है।
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बस संचालन में देरी से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को हो रही है, जिन्हें समय पर अपने गंतव्य पर पहुंचना आवश्यक होता है। शिक्षक शिवकुमार, सरोज और मनोहर ने बताया कि बसों के आधा या एक घंटा तक लेट होने से उन्हें स्कूल-कॉलेज पहुंचने में अब देरी हो रही है। जिला मुख्यालय की कचहरी में काम करने वाले राम शंकर और राम कुमार का कहना है कि बसों का संचालन मौसम देखकर नहीं, बल्कि समय सारणी के अनुसार होना चाहिए।