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खतरे के निशान के करीब पहुंचा सरयू का जलस्तर
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रामनगर/ कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही तराई से लोगों का पलायन और तेज हो गया है। बुधवार को नदी का जलस्तर कई गांव के पास आबादी की तरफ बढ़ने से लोगों में हड़कंप मचा गया है।
रामनगर तहसील क्षेत्र के तपेसिपाह, कोरियनपुरवा, मल्हनपुरवा गांव की ओर सरयू नदी का बहाव चल रहा है। इसमें तपेसिपाह के किसानों की जमीन नदी में समाने लगी है। वहीं कोरियनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर है। बुधवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज एक मीटर दूर था।
वहीं जैनपुरवा के पारसनाथ यादव, विशेश्वर यादव ने कहा कि सरयू में जब बाढ़ अपने उग्र रूप में आती हैं तब अधिकारी आते हैं। इसके पहले कोई सुध लेने नहीं आता है। बाढ़ खंड के अधिकारी न ही स्थलीय निरीक्षण करते हैं और न ही कटान से बचाव के उपाय किए जाते हैं। इससे तराई के लोगों में दहशत का माहौल है।
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वहीं सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के टेपरा, गोबराहा, कहारनपुरवा, भैरवकोल गांव के पास से नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्र की तरफ बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में हो रही कटान में कुछ कमी आई है लेकिन तराई के लोगों में दहशत का माहौल है। तराई के लोगों का आरोप है कि तहसील प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं है और अभी तक सरकारी नाव तक का इंतजाम नहीं किया गया।
न ही बाढ़ चौकी भी नहीं बनाई गई है और न तो किसी अधिकारी ने गांव जाकर लोगों को बढ़ते जलस्तर के बारे में बताया है। तराई के लोगों का आरोप है कि गोबरहा के पास हो रही कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा भरी गई बोरी अभी तक नदी में नहीं डाली गई है। इस बाबत बाढ़ खंड के जेई घनश्याम बाजपेई ने बताया कि जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है मगर अभी खतरे के निशान से नीचे है। जो काम बचा हुआ है उसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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रामनगर तहसील क्षेत्र के तपेसिपाह, कोरियनपुरवा, मल्हनपुरवा गांव की ओर सरयू नदी का बहाव चल रहा है। इसमें तपेसिपाह के किसानों की जमीन नदी में समाने लगी है। वहीं कोरियनपुरवा गांव भी नदी के निशाने पर है। बुधवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज एक मीटर दूर था।
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वहीं जैनपुरवा के पारसनाथ यादव, विशेश्वर यादव ने कहा कि सरयू में जब बाढ़ अपने उग्र रूप में आती हैं तब अधिकारी आते हैं। इसके पहले कोई सुध लेने नहीं आता है। बाढ़ खंड के अधिकारी न ही स्थलीय निरीक्षण करते हैं और न ही कटान से बचाव के उपाय किए जाते हैं। इससे तराई के लोगों में दहशत का माहौल है।
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वहीं सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के टेपरा, गोबराहा, कहारनपुरवा, भैरवकोल गांव के पास से नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्र की तरफ बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में हो रही कटान में कुछ कमी आई है लेकिन तराई के लोगों में दहशत का माहौल है। तराई के लोगों का आरोप है कि तहसील प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं है और अभी तक सरकारी नाव तक का इंतजाम नहीं किया गया।
न ही बाढ़ चौकी भी नहीं बनाई गई है और न तो किसी अधिकारी ने गांव जाकर लोगों को बढ़ते जलस्तर के बारे में बताया है। तराई के लोगों का आरोप है कि गोबरहा के पास हो रही कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा भरी गई बोरी अभी तक नदी में नहीं डाली गई है। इस बाबत बाढ़ खंड के जेई घनश्याम बाजपेई ने बताया कि जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है मगर अभी खतरे के निशान से नीचे है। जो काम बचा हुआ है उसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।