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नवजात की मौत से भड़के ग्रामीण, हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sun, 04 Jun 2017 11:29 PM IST
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समय पूर्व प्रसव पीड़ा होने पर प्रसूता को उसका पति उसे लेकर सीएचसी फतेहपुर ले गया। यहां पर डॉक्टरों ने हालत गंभीर होते देख उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था।
आरोप है कि कमीशन के चक्कर में आशा बहू ने उसे कस्बे के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो जाने पर परिवारीजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा हंगामा करने लगे। सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मामला फतेहपुर कोतवाली के मोहल्ला फैय्याज पुरवा का है। यहां के निवासी सुनील कुमार की पत्नी आरती देवी (22) को सात माह के गर्भावस्था के दौरान प्रसव पीड़ा व रक्तश्राव होने पर उसके पति ने आशा बहू सुमन के माध्यम से सीएचसी फतेहपुर ले गया। यहां पर हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने प्रसूता को जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया था।
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सुनील का आरोप है कि आशा बहू सुमन ने उसकी पत्नी को मीठी देवी माता मंदिर स्थित शिवांक अस्पताल में भर्ती करा दिया। दूसरे दिन देर रात करीब 10 बजे प्रसूता को नार्मल डिलीवरी कराई गई। डिलीवरी के कुछ देर बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी।
परिवारीजनों ने अस्पताल प्रशासन से जच्चा बच्चा को जिला अस्पताल ले जाने को कहा तो स्टाफ पैसा ऐंठने के चक्कर में यहीं पर इलाज होने की बात कहते हुए भर्ती रखा। इलाज के कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद आशा बहू बिना बताए घर चली गई। पीड़ित ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया।
सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अस्पताल के प्रबंधक डॉ. शैलेंद्र कुमार का कहना है कि बच्चे का जन्म समय से करीब दो माह पूर्व होने पर उसका पूरा शरीर विकसित नहीं हो सका था। 800 ग्राम के बच्चे को बचा पाना मुश्किल था। परिवार वालों ने पांच हजार रुपये जमा किए थे बाकी का पैसा न देना पड़े इसके लिए बवाल कर रहे हैं।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर आशा बहू द्वारा महिला अस्पताल के बजाए निजी अस्पताल में भर्ती कराया है, तो मामले की जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
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आरोप है कि कमीशन के चक्कर में आशा बहू ने उसे कस्बे के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो जाने पर परिवारीजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा हंगामा करने लगे। सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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मामला फतेहपुर कोतवाली के मोहल्ला फैय्याज पुरवा का है। यहां के निवासी सुनील कुमार की पत्नी आरती देवी (22) को सात माह के गर्भावस्था के दौरान प्रसव पीड़ा व रक्तश्राव होने पर उसके पति ने आशा बहू सुमन के माध्यम से सीएचसी फतेहपुर ले गया। यहां पर हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने प्रसूता को जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया था।
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सुनील का आरोप है कि आशा बहू सुमन ने उसकी पत्नी को मीठी देवी माता मंदिर स्थित शिवांक अस्पताल में भर्ती करा दिया। दूसरे दिन देर रात करीब 10 बजे प्रसूता को नार्मल डिलीवरी कराई गई। डिलीवरी के कुछ देर बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी।
परिवारीजनों ने अस्पताल प्रशासन से जच्चा बच्चा को जिला अस्पताल ले जाने को कहा तो स्टाफ पैसा ऐंठने के चक्कर में यहीं पर इलाज होने की बात कहते हुए भर्ती रखा। इलाज के कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद आशा बहू बिना बताए घर चली गई। पीड़ित ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया।
सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अस्पताल के प्रबंधक डॉ. शैलेंद्र कुमार का कहना है कि बच्चे का जन्म समय से करीब दो माह पूर्व होने पर उसका पूरा शरीर विकसित नहीं हो सका था। 800 ग्राम के बच्चे को बचा पाना मुश्किल था। परिवार वालों ने पांच हजार रुपये जमा किए थे बाकी का पैसा न देना पड़े इसके लिए बवाल कर रहे हैं।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर आशा बहू द्वारा महिला अस्पताल के बजाए निजी अस्पताल में भर्ती कराया है, तो मामले की जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ