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दो सौ मीटर बांध और नदी में समाया
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:46 PM IST
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बाढ़ के बाद गांव में भ्ररा नदी का पानी
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी का पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध को बराबर काट रहा है। शुक्रवार को तटबंध का करीब दो सौ मीटर हिस्सा और नदी में समा गया है। इस प्रकार से नदी अब तक करीब 6 मीटर तक बांध को काट चुकी है।
वहीं नदी का पानी लाल निशान से 32 सेमी ऊपर पहुंच स्थिर हो गया है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गांवों में अभी भी कई परिवार फंसे हैं जिन्हें निकालने का कार्य किया जा रहा है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.396 पर पहुंच स्थिर हो गया है लेकिन पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध को बराबर काट रहा है। शुक्रवार को करीब दो सौ मीटर हिस्सा नदी में और समा गया है। अब तक करीब 6 मीटर का हिस्सा नदी में बह गया है।
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लोगों का कहना है कि पानी तटबंध को बराबर काट रहा है जिसे रोकने को सिंचाई विभाग व बाढ़ खंड से कोई कार्य नहीं किए जा रहे हैं। जिससे पानी लगातार गांवों में भरता जा रहा है। लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।
बाढ़ प्रभावित गांव रायपुर मांझा, परसावल, कमियार और नैपुरा में बाढ़ का पानी इतना ज्यादा भर गया है कि यहां पर जो लोग फंसे हुए हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में प्रशासन को दिक्कते हो रही हैं। क्योंकि नाव लेकर गांव के अंदर जाना और फिर बाहर लेकर आना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि नदी का कोई भरोसा नहीं है कि किस वक्त वह अपने रुख को बदल दे।
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वहीं नदी का पानी लाल निशान से 32 सेमी ऊपर पहुंच स्थिर हो गया है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गांवों में अभी भी कई परिवार फंसे हैं जिन्हें निकालने का कार्य किया जा रहा है।
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घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.396 पर पहुंच स्थिर हो गया है लेकिन पानी एल्गिन चरसड़ी तटबंध को बराबर काट रहा है। शुक्रवार को करीब दो सौ मीटर हिस्सा नदी में और समा गया है। अब तक करीब 6 मीटर का हिस्सा नदी में बह गया है।
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लोगों का कहना है कि पानी तटबंध को बराबर काट रहा है जिसे रोकने को सिंचाई विभाग व बाढ़ खंड से कोई कार्य नहीं किए जा रहे हैं। जिससे पानी लगातार गांवों में भरता जा रहा है। लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।
बाढ़ प्रभावित गांव रायपुर मांझा, परसावल, कमियार और नैपुरा में बाढ़ का पानी इतना ज्यादा भर गया है कि यहां पर जो लोग फंसे हुए हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में प्रशासन को दिक्कते हो रही हैं। क्योंकि नाव लेकर गांव के अंदर जाना और फिर बाहर लेकर आना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि नदी का कोई भरोसा नहीं है कि किस वक्त वह अपने रुख को बदल दे।