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सामुदायिक शौचालय में निर्माण से लेकर संचालन तक घोटाला
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बाराबंकी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर शौचालय के बाद प्रत्येक गांव में सामुदायिक शौचालय का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना था। किंतु अधिकारियों व कर्मचारियों की कारगुजारियों ने पुराने अभियान पर पलीता लगा दिया। शासन-प्रशासन की सख्ती हुई तो अधूरे शौचालयों को पूरा दिखाकर समूहों द्वारा संचालित कर दिया।
यहीं नहीं समूहों को मानदेय और स्वच्छता सामग्री भी खरीद डाली। यह हालात तब है जब कई जगह सामुदायिक शौचालयों में न शौचालयों का गड्ढा बना न अभी तक सीट रखी गई। इस तरह सामुदायिक शौचालय के निर्माण व संचालन में बड़ा घोटाला किया जा रहा है और जिम्मेदार मौन हैं।
जिले में पंचायती राज विभाग द्वारा 1161 ग्राम पंचायतों में से 1051 सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूरा कर स्वयं सहायता समूहों को संचालन के लिए सौंप दिया गया। मगर, हकीकत पर नजर डालें तो कागजी खानापूरी से ठीक उलट है। जिले में आधे से अधिक सामुदायिक शौचालय को जियो टैगिंग में निर्माण कार्य पूरा दिखाया गया है। जबकि वह अभी तक पूरे ही नहीं हुए हैं।
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शौचालय सीट व दरवाजा लगना तो दूर गड्ढे तक नहीं बन पाए हैं। ऐसे में वहां उगी जंगल व झाड़ियां संचालन की हकीकत बयां कर रही हैं। यहीं नहीं घोटाले का आलम यह है कि समूहों को प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय और तीन हजार रुपये स्वच्छता सामग्री व मेंटीनेंस के लिए दिए जा रहे हैं।
तीन माह की यह रकम बाकायदा खातों में भेजी जा चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाने वाला स्वच्छ भारत मिशन को राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में पलीता ही नहीं लगाया जा रहा है। बल्कि सरकारी रकम की बंदरबांट भी की जा रही है।
हकीकत बयां करते नूरापुर व मीरापुर के शौचालय
सिद्धौर। ब्लॉक की ग्राम पंचायत नूरापुर व गंजरियां में अभी तक सार्वजनिक शौचालय का गड्ढा तक तैयार नहीं हैं। वहीं बाहरी दीवारों पर ही प्लास्टर कराकर निर्माण कार्य पूरा दर्शा दिया गया। जबकि फर्श, टायल्स तो दूर शौचालय सीट तक नहीं रखी गई। इसी प्रकार कुंभरावा ग्राम पंचायत में भी सार्वजनिक शौचालय में ताला लटक रहा है।
कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत मीरापुर, असौरी व सालाभारी आदि पंचायतों का है। बावजूद इसके इन शौचालयों की जियो टैगिंग कर पूर्ण दर्शाकर राशि ही नहीं निकाली गई। बल्कि समूहों को हैंडओवर कर मानदेय व स्वच्छता सामग्री की राशि भेजकर बंदरबांट किया जा रहा हैं। इस संबंध में बीडीओ सिद्धौर यशोवर्धन सिंह ने बताया कि यदि अधूरे शौचालयों की जियो टैगिंग कर उन्हें हैंडओवर किया गया है तो उसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
वायरिंग दूर, पानी तक का नहीं हुआ कनेक्शन
हैदरगढ़ ब्लॉक की ग्राम गढ़ी, गोसियामऊ पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय में गड्ढा तक नहीं बना है। वहीं टायल्स तो दूर अभी तक फर्श व प्लास्टर तक नहीं है। वहीं रेेहूरा पंचायत के शौचालय में पानी की टंकी तक का कनेक्शन नहीं किया गया है।
ऐसे अधूरे शौचालयों को समूहों को सौंपा कर संचालन के नाम पर मानदेय व स्वच्छता सामग्री की धनराशि का बंदर बांट किया जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल त्रिवेदीगंज ब्लॉक के बुढ़नापुर व हरख ब्लॉक की इब्राहिमाबाद, टिकराघाट, गेहंदवर, मोहम्मदपुर व पंडरी के सामुदायिक शौचालयों का है।
अधूरे सार्वजनिक शौचालयों की जियो टैगिंग कर उन्हें हैंडओवर करने का मामला काफी संजीदा है। अधूरे शौचालय के रखरखाव व स्वच्छता सामग्री अगर भेजी जा रही है। तो उस पर रोक लगाते हुए इसमें दोषी सचिव व प्रधान पर कार्रवाई की जाएगी।
-एकता सिंह, सीडीओ
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यहीं नहीं समूहों को मानदेय और स्वच्छता सामग्री भी खरीद डाली। यह हालात तब है जब कई जगह सामुदायिक शौचालयों में न शौचालयों का गड्ढा बना न अभी तक सीट रखी गई। इस तरह सामुदायिक शौचालय के निर्माण व संचालन में बड़ा घोटाला किया जा रहा है और जिम्मेदार मौन हैं।
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जिले में पंचायती राज विभाग द्वारा 1161 ग्राम पंचायतों में से 1051 सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूरा कर स्वयं सहायता समूहों को संचालन के लिए सौंप दिया गया। मगर, हकीकत पर नजर डालें तो कागजी खानापूरी से ठीक उलट है। जिले में आधे से अधिक सामुदायिक शौचालय को जियो टैगिंग में निर्माण कार्य पूरा दिखाया गया है। जबकि वह अभी तक पूरे ही नहीं हुए हैं।
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शौचालय सीट व दरवाजा लगना तो दूर गड्ढे तक नहीं बन पाए हैं। ऐसे में वहां उगी जंगल व झाड़ियां संचालन की हकीकत बयां कर रही हैं। यहीं नहीं घोटाले का आलम यह है कि समूहों को प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय और तीन हजार रुपये स्वच्छता सामग्री व मेंटीनेंस के लिए दिए जा रहे हैं।
तीन माह की यह रकम बाकायदा खातों में भेजी जा चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाने वाला स्वच्छ भारत मिशन को राजधानी लखनऊ से सटे जिले बाराबंकी में पलीता ही नहीं लगाया जा रहा है। बल्कि सरकारी रकम की बंदरबांट भी की जा रही है।
हकीकत बयां करते नूरापुर व मीरापुर के शौचालय
सिद्धौर। ब्लॉक की ग्राम पंचायत नूरापुर व गंजरियां में अभी तक सार्वजनिक शौचालय का गड्ढा तक तैयार नहीं हैं। वहीं बाहरी दीवारों पर ही प्लास्टर कराकर निर्माण कार्य पूरा दर्शा दिया गया। जबकि फर्श, टायल्स तो दूर शौचालय सीट तक नहीं रखी गई। इसी प्रकार कुंभरावा ग्राम पंचायत में भी सार्वजनिक शौचालय में ताला लटक रहा है।
कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत मीरापुर, असौरी व सालाभारी आदि पंचायतों का है। बावजूद इसके इन शौचालयों की जियो टैगिंग कर पूर्ण दर्शाकर राशि ही नहीं निकाली गई। बल्कि समूहों को हैंडओवर कर मानदेय व स्वच्छता सामग्री की राशि भेजकर बंदरबांट किया जा रहा हैं। इस संबंध में बीडीओ सिद्धौर यशोवर्धन सिंह ने बताया कि यदि अधूरे शौचालयों की जियो टैगिंग कर उन्हें हैंडओवर किया गया है तो उसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
वायरिंग दूर, पानी तक का नहीं हुआ कनेक्शन
हैदरगढ़ ब्लॉक की ग्राम गढ़ी, गोसियामऊ पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय में गड्ढा तक नहीं बना है। वहीं टायल्स तो दूर अभी तक फर्श व प्लास्टर तक नहीं है। वहीं रेेहूरा पंचायत के शौचालय में पानी की टंकी तक का कनेक्शन नहीं किया गया है।
ऐसे अधूरे शौचालयों को समूहों को सौंपा कर संचालन के नाम पर मानदेय व स्वच्छता सामग्री की धनराशि का बंदर बांट किया जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल त्रिवेदीगंज ब्लॉक के बुढ़नापुर व हरख ब्लॉक की इब्राहिमाबाद, टिकराघाट, गेहंदवर, मोहम्मदपुर व पंडरी के सामुदायिक शौचालयों का है।
अधूरे सार्वजनिक शौचालयों की जियो टैगिंग कर उन्हें हैंडओवर करने का मामला काफी संजीदा है। अधूरे शौचालय के रखरखाव व स्वच्छता सामग्री अगर भेजी जा रही है। तो उस पर रोक लगाते हुए इसमें दोषी सचिव व प्रधान पर कार्रवाई की जाएगी।
-एकता सिंह, सीडीओ