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इस बार अश्व पर आएंगी जगत जननी, भैंसे पर होंगी विदा
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बाराबंकी। नवरात्र को लेकर बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। चुनरी से लेकर मां के वस्त्र व पूजा के सामानों की दुकानें सज गई हैं। बुधवार को दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। इस बार शारदीय नवरात्र 17 से 24 अक्तूबर तक रहेंगे। विजयादशमी का पर्व 25 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य प्रमोद पाठक ने बताया कि इस बार नवरात्र में जगत जननी का आगमन अश्व पर हो रहा है। नवमी पर मां भैंसें पर विदा होंगी। ये दोनों ही वाहन शुभता के सूचक नहीं हैं। इनके प्रभाव से सत्तापक्ष को नुकसान का योग है। भगवती के वाहनों के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए नवरात्र के नौ दिनों तक सूर्यास्त के बाद सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।
नवमी व दशमी 25 को
धनोखर मंदिर के पुजारी पं. मुरारी लाल बाजपेई ने बताया कि अधिकमास समाप्त होने के बाद नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू हो जाएंगे। इस बार नौ दिनों में ही दस दिनों का पर्व पूरा हो जाएगा। इसका कारण तिथियों में उतार चढ़ाव है। 25 अक्तूबर को सुबह 7:41 बजे दशमी तिथि लग जाएगी। उदया तिथि का मान के चलते नवमी व विजय दशमी एक ही दिन होगी।
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घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
मुड़कटी देवी मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि प्रतिपदा तिथि 17 अक्तूबर की रात 9:08 बजे तक रहेगी। पूरे दिन में कलश स्थापना के कई योग बन रहे हैं। सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना श्रेयस्कर है। इसी दिन दोपहर 2:20 बजे से सूर्यास्त तक घट स्थापना कर सकते हैं।
ऐसे करें कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि कलश स्थापना के लिए पवित्र स्थान पर मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं दोनों मिलाकर बोना चाहिए। वेदी पर या उसके समीप पृथ्वी का पूजन करें। कलश में रोली से स्वास्तिक का चिह्ल बनाएं और कलश के गले में मौलि लपेटें। कलश स्थापित किए जाने वाले स्थान पर रोली या हल्दी से अष्टदल कमल बनाएं।
उसके बाद उस पर कलश स्थापित करें। कलश में जौ भरकर उसमें चंदन, पंच पल्लव, दूर्बा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश, गोशाला या तालाब की मिट्टी डालें तथा कलश को वस्त्र से अलंकृत करें।
इसके बाद कलश पर जौ या चावल से भरे पात्र को स्थापित करें। इसके बाद उस पर लाल वस्त्र लपेटे हुए नारियल को रखें। कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें। उसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित पूजन-अर्चन करें।
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ज्योतिषाचार्य प्रमोद पाठक ने बताया कि इस बार नवरात्र में जगत जननी का आगमन अश्व पर हो रहा है। नवमी पर मां भैंसें पर विदा होंगी। ये दोनों ही वाहन शुभता के सूचक नहीं हैं। इनके प्रभाव से सत्तापक्ष को नुकसान का योग है। भगवती के वाहनों के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए नवरात्र के नौ दिनों तक सूर्यास्त के बाद सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।
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नवमी व दशमी 25 को
धनोखर मंदिर के पुजारी पं. मुरारी लाल बाजपेई ने बताया कि अधिकमास समाप्त होने के बाद नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू हो जाएंगे। इस बार नौ दिनों में ही दस दिनों का पर्व पूरा हो जाएगा। इसका कारण तिथियों में उतार चढ़ाव है। 25 अक्तूबर को सुबह 7:41 बजे दशमी तिथि लग जाएगी। उदया तिथि का मान के चलते नवमी व विजय दशमी एक ही दिन होगी।
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घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
मुड़कटी देवी मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि प्रतिपदा तिथि 17 अक्तूबर की रात 9:08 बजे तक रहेगी। पूरे दिन में कलश स्थापना के कई योग बन रहे हैं। सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना श्रेयस्कर है। इसी दिन दोपहर 2:20 बजे से सूर्यास्त तक घट स्थापना कर सकते हैं।
ऐसे करें कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि कलश स्थापना के लिए पवित्र स्थान पर मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं दोनों मिलाकर बोना चाहिए। वेदी पर या उसके समीप पृथ्वी का पूजन करें। कलश में रोली से स्वास्तिक का चिह्ल बनाएं और कलश के गले में मौलि लपेटें। कलश स्थापित किए जाने वाले स्थान पर रोली या हल्दी से अष्टदल कमल बनाएं।
उसके बाद उस पर कलश स्थापित करें। कलश में जौ भरकर उसमें चंदन, पंच पल्लव, दूर्बा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश, गोशाला या तालाब की मिट्टी डालें तथा कलश को वस्त्र से अलंकृत करें।
इसके बाद कलश पर जौ या चावल से भरे पात्र को स्थापित करें। इसके बाद उस पर लाल वस्त्र लपेटे हुए नारियल को रखें। कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें। उसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित पूजन-अर्चन करें।