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Barabanki News: मां छिन्नमस्ता देवी के प्रकटोत्सव पर होगा भक्ति और श्रद्धा का संगम
Sun, 26 Apr 2026 01:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:55 AM IST
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कानून गोयान स्थित मुंडकटी देवी का मंदिर।
बाराबंकी। शहर में कानूनगोयान स्थित मां छिन्नमस्ता देवी मंदिर में 30 अप्रैल को होने वाला प्रकटोत्सव इस वर्ष विशेष श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में उत्साह का माहौल है। प्रकटोत्सव को लेकर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है। मंदिर को सजाया जा रहा है और आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित वीरेंद्र व्यास शास्त्री के सानिध्य में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। उन्होंने बताया कि प्रकटोत्सव का आरंभ प्रातः कालीन आरती के साथ होगा, जिसके बाद विधिवत हवन किया जाएगा। सुबह पांच बजे से प्रारंभ होने वाला महायज्ञ वैदिक मंत्रों के बीच दोपहर 12 बजे तक चलेगा। महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालु हवन कुंड की परिक्रमा करेंगे और प्रसाद वितरण किया जाएगा। भक्तों का मानना है कि इस दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा और यज्ञ में भाग लेने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शाम को भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें भजन गायक मां के गुणगान करेंगे। रात आठ बजे विशेष आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा, जिसमें मां को 31 किलो लड्डू का भोग अर्पित किया जाएगा। पंडित वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि मां छिन्नमस्ता शक्ति, त्याग और आत्मबल की प्रतीक हैं। प्रकटोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का अवसर है। मां की कृपा से हर कष्ट दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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मंदिर के पुजारी पंडित वीरेंद्र व्यास शास्त्री के सानिध्य में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। उन्होंने बताया कि प्रकटोत्सव का आरंभ प्रातः कालीन आरती के साथ होगा, जिसके बाद विधिवत हवन किया जाएगा। सुबह पांच बजे से प्रारंभ होने वाला महायज्ञ वैदिक मंत्रों के बीच दोपहर 12 बजे तक चलेगा। महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालु हवन कुंड की परिक्रमा करेंगे और प्रसाद वितरण किया जाएगा। भक्तों का मानना है कि इस दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा और यज्ञ में भाग लेने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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शाम को भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें भजन गायक मां के गुणगान करेंगे। रात आठ बजे विशेष आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा, जिसमें मां को 31 किलो लड्डू का भोग अर्पित किया जाएगा। पंडित वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि मां छिन्नमस्ता शक्ति, त्याग और आत्मबल की प्रतीक हैं। प्रकटोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का अवसर है। मां की कृपा से हर कष्ट दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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