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खरना के साथ महिलाओं ने शुरू किया निर्जला व्रत
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sat, 05 Nov 2016 11:14 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भगवान भास्कर की उपासना के महापर्व छठ पूजा को लेकर सूर्योपासना में लोग डूबे हुए हैं। छठ उत्सव का उत्साह खरना अनुष्ठान के साथ बढ़ता ही जा रहा है। छठ की छटा घर से लेकर बाजार तक फैली हुई है।
श्रद्धा व आस्था के साथ व्रती महिलाओं ने शनिवार से निर्जला व्रत शुरू किया तथा गुड़ और साढे़ के चावल की बनी रसियाव का भोग लगाया। शाम को भोग लगाकर व्रत रखने वाली महिलाओं व पुरुषों ने रसियाव, रोटी व लौकी या कद्दू की सब्जी का स्वल्पाहार लिया।
छठपूजा के इस महापर्व में उगते हुए सूर्य के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। शनिवार को आटे-चावल और गुड़ से पकवान बनाए गए। चावल व गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू घरों ही नहीं आसपास भी फैली रही।
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शनिवार को महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा तथा शाम को गुड़ और साढे़ के चावल व गन्ने के रस या गुड़ से बनाए गए रसियाव का भोग लगाया तथा स्वल्पाहार लिया। तथा घर के लोगों को रसियाव प्रसाद के रूप में दिया गया। घरों में महिलाओं ने ठेकुआ आदि भी बनाए। छठ मइया के पारंपरिक गीतों से घरों में उत्सव जैसा माहौल हो गया है।
सूर्य को अर्घ्य देने नंगे पांव घाट पर पहुंचेंगी महिलाएं
रेठ नदी के चिलहटा घाट, नागेश्वरनाथ मंदिर तालाब, पीएसी बटालियन स्थित तालाब व सूतमिल कॉलोनी स्थित अस्थाई तालाब पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। ज्यादातर व्रती महिलाएं अर्घ्य देने के लिए नंगे पाव घाट पर पहुंचती हैं। इस दौरान पायल के घुंघुरुओं की आवाज व छठ मइया के पारंपरिक गीत अनूठेपन की भव्यता को और बढ़ा देते हैं।
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श्रद्धा व आस्था के साथ व्रती महिलाओं ने शनिवार से निर्जला व्रत शुरू किया तथा गुड़ और साढे़ के चावल की बनी रसियाव का भोग लगाया। शाम को भोग लगाकर व्रत रखने वाली महिलाओं व पुरुषों ने रसियाव, रोटी व लौकी या कद्दू की सब्जी का स्वल्पाहार लिया।
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छठपूजा के इस महापर्व में उगते हुए सूर्य के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। शनिवार को आटे-चावल और गुड़ से पकवान बनाए गए। चावल व गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू घरों ही नहीं आसपास भी फैली रही।
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शनिवार को महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा तथा शाम को गुड़ और साढे़ के चावल व गन्ने के रस या गुड़ से बनाए गए रसियाव का भोग लगाया तथा स्वल्पाहार लिया। तथा घर के लोगों को रसियाव प्रसाद के रूप में दिया गया। घरों में महिलाओं ने ठेकुआ आदि भी बनाए। छठ मइया के पारंपरिक गीतों से घरों में उत्सव जैसा माहौल हो गया है।
सूर्य को अर्घ्य देने नंगे पांव घाट पर पहुंचेंगी महिलाएं
रेठ नदी के चिलहटा घाट, नागेश्वरनाथ मंदिर तालाब, पीएसी बटालियन स्थित तालाब व सूतमिल कॉलोनी स्थित अस्थाई तालाब पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। ज्यादातर व्रती महिलाएं अर्घ्य देने के लिए नंगे पाव घाट पर पहुंचती हैं। इस दौरान पायल के घुंघुरुओं की आवाज व छठ मइया के पारंपरिक गीत अनूठेपन की भव्यता को और बढ़ा देते हैं।