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Barabanki News: नोडल अधिकारी के निरीक्षण के अगले ही दिन डॉक्टरों ने फिर लिखी बाहर की दवाएं
Wed, 11 Mar 2026 01:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 11 Mar 2026 01:49 AM IST
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बाराबंकी। जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। शासन द्वारा नामित नोडल अधिकारी नीना शर्मा की सख्त चेतावनी और फटकार के बावजूद मंगलवार को भी ओपीडी में मरीजों को बाहर की दवाएं धड़ल्ले से लिखी गईं। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता और चिकित्सकों की मनमानी का खामियाजा उन गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं।
सोमवार को निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी नीना शर्मा ने एक तीमारदार के पास बाहर से खरीदी गई दवाओं की परची पकड़ी थी। उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दवाओं को वापस कराया था और सुधार के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मंगलवार को स्थिति जस की तस रही। चिकित्सक मरीजों को ऐसी दवाएं लिख रहे हैं जो अस्पताल के स्टॉक या परिसर में स्थित जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध होने के बावजूद निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदने को कहा जा रहा है।
अल्ट्रासाउंड के लिए घंटों का इंतजार
दवाओं के अलावा जांच सेवाओं का हाल भी बेहाल है। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं। विशंभर, गौरीशंकर और ज्योति जैसे मरीजों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद भी जांच नहीं हो पा रही है। कई मरीजों को तो बिना जांच कराए ही वापस लौटना पड़ा।
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प्रशासन का दावा बनाम हकीकत
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य का कहना है कि बाहर की दवा लिखने पर पूर्ण प्रतिबंध है और चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने परिसर में पंफलेट चस्पा करने की बात भी कही, लेकिन धरातल पर डॉक्टर कमीशनखोरी के चलते इन निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
बाहर से दवाओं की खरीद बना मजबूरी
बुखार से पीड़ित वासुदेव दवा लेने के लिए मंगलवार को बेटी के साथ जिला अस्पताल आए थे बताया कि चिकित्सक ने देखा और जांच के अलावा तीन दवाएं बाहर से लिख दी। शांति देवी ने बताया कि आंख में दिक्कत होने पर वह इलाज के लिए अस्पताल आई थीं यहां पर चिकित्सक ने देखने के बाद तीन दवाएं बाहर से लिख दी जो 400 रुपये की मिली हैं। रामावती ने बताया कि जोड़ों में दर्द पर चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने एक्सरे के साथ करीब चार दवाएं बाहर से लिख दी जो करीब 450 रुपये की मिली। इसी प्रकार कई मरीजों को दवाएं बाहर से लिखी गई जिन्हें खरीदना इनकी मजबूरी बन गया है।
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सोमवार को निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी नीना शर्मा ने एक तीमारदार के पास बाहर से खरीदी गई दवाओं की परची पकड़ी थी। उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दवाओं को वापस कराया था और सुधार के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मंगलवार को स्थिति जस की तस रही। चिकित्सक मरीजों को ऐसी दवाएं लिख रहे हैं जो अस्पताल के स्टॉक या परिसर में स्थित जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध होने के बावजूद निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदने को कहा जा रहा है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए घंटों का इंतजार
दवाओं के अलावा जांच सेवाओं का हाल भी बेहाल है। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं। विशंभर, गौरीशंकर और ज्योति जैसे मरीजों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद भी जांच नहीं हो पा रही है। कई मरीजों को तो बिना जांच कराए ही वापस लौटना पड़ा।
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प्रशासन का दावा बनाम हकीकत
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य का कहना है कि बाहर की दवा लिखने पर पूर्ण प्रतिबंध है और चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने परिसर में पंफलेट चस्पा करने की बात भी कही, लेकिन धरातल पर डॉक्टर कमीशनखोरी के चलते इन निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
बाहर से दवाओं की खरीद बना मजबूरी
बुखार से पीड़ित वासुदेव दवा लेने के लिए मंगलवार को बेटी के साथ जिला अस्पताल आए थे बताया कि चिकित्सक ने देखा और जांच के अलावा तीन दवाएं बाहर से लिख दी। शांति देवी ने बताया कि आंख में दिक्कत होने पर वह इलाज के लिए अस्पताल आई थीं यहां पर चिकित्सक ने देखने के बाद तीन दवाएं बाहर से लिख दी जो 400 रुपये की मिली हैं। रामावती ने बताया कि जोड़ों में दर्द पर चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने एक्सरे के साथ करीब चार दवाएं बाहर से लिख दी जो करीब 450 रुपये की मिली। इसी प्रकार कई मरीजों को दवाएं बाहर से लिखी गई जिन्हें खरीदना इनकी मजबूरी बन गया है।