{"_id":"dc4212c5010be2ddb131dacdd7bf7246","slug":"the-thousand-acres-of-paddy-pests-eat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘पत्ती लपेटक’ ने चट किया हजार बीघा धान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘पत्ती लपेटक’ ने चट किया हजार बीघा धान
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2015 10:26 PM IST
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गेहूं, आलू और दूसरी फसलों की बर्बादी से किसान अभी उबर भी नहीं पाया था कि धान की फसल चौपट होने के कगार पर पहुंच गई। सफेदाबाद के आसपास के कई गांवों में सैकड़ों किसानों की हजार बीघे से अधिक धान की फसल को पत्ती लपेटक रोग ने निगल लिया है। इस रोग पर नियंत्रण करने की हर कोशिश बेकार होती देख किसानों ने मंगलवार को डीएम से गुहार लगाई। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी को जांच के लिए मौके पर भेजा और रिपोर्ट मांगी।
जिले में इस वर्ष करीब 1 लाख 98 हजार 565 हेक्टेयर पर धान की रोपाई किसानों द्वारा की गई है। फसल की रोपाई का कार्य अभी चल ही रहा है। धान की फसल अभी तैयार भी नहीं हुई है कि फसल में पत्ती लपेटक रोग लगने लगा है। बंकी ब्लॉक अंतर्गत सफेदाबाद क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघे धान की फसल इस रोग की चपेट में आ गई है। इस क्षेत्र के रूस्तमपुरवा, गढ़ी, खसपरिया, मदारपुर, मिश्रनपुरवा, केवाड़ी, तिलकपुरवा, तिवारीपुरवा आदि कई गांवों में धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। ये कीट पत्ती को लपेट कर काट देता है जिससे पूरा का पूरा पौध खेत में ही सूख जाता है। उगती फसल को रोग के भेंट चढ़ती देख किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है। किसानों का कहना है कि मार्च माह में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आकर जिले के अधिकांश किसानों की खेतों में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। किसान अभी इस सदमे से उबर भी नहीं सका है कि धान की फसल रोग की भेंट चढ़ने लगी है। मंगलवार को किसानों ने पूर्व प्रधान बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुुंच जिलाधिकारी से भेंटकर की और अपनी इस समस्या से अवगत कराया। जिस पर जिलाधिकारी ने तुरंत फसल की जांच पड़ताल के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी को मौके पर भेजा ।
पत्तियों में छिपा रहता है कीड़ा
पत्ती लपेटक एक ऐसा रोग है जो पत्तियों की लंबाई अंदर जाकर उसी में छिप जाता है और धीरे-धीरे पत्ती के हरे भाग को खुरच कर खा जाता हैं, जिससे पौधा सूखने लगता है। यह कीट धान की पत्ती में इस तरह से छिप जाता है की इसकी जानकारी तब हो पाती है जब पौध सूखने लगता है।
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ऐसे करें बचाव
इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी या फिर मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत ईसी या ट्राएजोफॉस 40 प्रतिशत की 1.5 लीटर मात्रा प्रतिहेक्टेयर की दर से 4 से 5 सौ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इस दवा का छिड़काव करने से रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। डीएम साहब को पूरी रिपोर्ट दी जाएगी। परेशानी की बात यह है कि इस कीड़े की जानकारी जब तक किसान को होती है तब तक उसका बहुत नुकसान हो चुका होता है।
- डॉ. एलएस यादव, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
कैस जिंदा रहेंगे साहब... आत्महत्या करने लगेंगे किसान
गेहूं के बाद अब धान की फसल में रोग लगने लगा है। यदि यही हाल रहा तो किसान एक साल में दोबारा बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा। उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
- शिवमंगल, किसान
धान की फसल पत्ती लपेटक रोग की चपेट में आ गई। रोग पर नियंत्रण के लिए दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
- बृजेंद्र सिंह, किसान
जिस दिन से धान की फसल रोग की चपेट में आई है उस दिन पूरे परिवार की रातों की नींद गायब हो गई है। क्योंकि गेहूं की फसल पहले ही बर्बाद हो गई है धान की फसल कर्ज लेकर बोई है।
- असगर अली, किसान
गेहूं की फसल तो बर्बाद हो गई। यदि धान की फसल भी बर्बाद होती है तो अभी तक 25 से 30 किसानों ने जान दी है। इस बार यह संख्या सैकड़ों में पहुंच जाएगी।
- चंद्रप्रकाश, किसान
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जिले में इस वर्ष करीब 1 लाख 98 हजार 565 हेक्टेयर पर धान की रोपाई किसानों द्वारा की गई है। फसल की रोपाई का कार्य अभी चल ही रहा है। धान की फसल अभी तैयार भी नहीं हुई है कि फसल में पत्ती लपेटक रोग लगने लगा है। बंकी ब्लॉक अंतर्गत सफेदाबाद क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघे धान की फसल इस रोग की चपेट में आ गई है। इस क्षेत्र के रूस्तमपुरवा, गढ़ी, खसपरिया, मदारपुर, मिश्रनपुरवा, केवाड़ी, तिलकपुरवा, तिवारीपुरवा आदि कई गांवों में धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। ये कीट पत्ती को लपेट कर काट देता है जिससे पूरा का पूरा पौध खेत में ही सूख जाता है। उगती फसल को रोग के भेंट चढ़ती देख किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है। किसानों का कहना है कि मार्च माह में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आकर जिले के अधिकांश किसानों की खेतों में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। किसान अभी इस सदमे से उबर भी नहीं सका है कि धान की फसल रोग की भेंट चढ़ने लगी है। मंगलवार को किसानों ने पूर्व प्रधान बृजेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुुंच जिलाधिकारी से भेंटकर की और अपनी इस समस्या से अवगत कराया। जिस पर जिलाधिकारी ने तुरंत फसल की जांच पड़ताल के लिए जिला कृषि रक्षा अधिकारी को मौके पर भेजा ।
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पत्तियों में छिपा रहता है कीड़ा
पत्ती लपेटक एक ऐसा रोग है जो पत्तियों की लंबाई अंदर जाकर उसी में छिप जाता है और धीरे-धीरे पत्ती के हरे भाग को खुरच कर खा जाता हैं, जिससे पौधा सूखने लगता है। यह कीट धान की पत्ती में इस तरह से छिप जाता है की इसकी जानकारी तब हो पाती है जब पौध सूखने लगता है।
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ऐसे करें बचाव
इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी या फिर मोनोक्रोटोफॉस 36 प्रतिशत ईसी या ट्राएजोफॉस 40 प्रतिशत की 1.5 लीटर मात्रा प्रतिहेक्टेयर की दर से 4 से 5 सौ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इस दवा का छिड़काव करने से रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। डीएम साहब को पूरी रिपोर्ट दी जाएगी। परेशानी की बात यह है कि इस कीड़े की जानकारी जब तक किसान को होती है तब तक उसका बहुत नुकसान हो चुका होता है।
- डॉ. एलएस यादव, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
कैस जिंदा रहेंगे साहब... आत्महत्या करने लगेंगे किसान
गेहूं के बाद अब धान की फसल में रोग लगने लगा है। यदि यही हाल रहा तो किसान एक साल में दोबारा बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा। उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
- शिवमंगल, किसान
धान की फसल पत्ती लपेटक रोग की चपेट में आ गई। रोग पर नियंत्रण के लिए दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
- बृजेंद्र सिंह, किसान
जिस दिन से धान की फसल रोग की चपेट में आई है उस दिन पूरे परिवार की रातों की नींद गायब हो गई है। क्योंकि गेहूं की फसल पहले ही बर्बाद हो गई है धान की फसल कर्ज लेकर बोई है।
- असगर अली, किसान
गेहूं की फसल तो बर्बाद हो गई। यदि धान की फसल भी बर्बाद होती है तो अभी तक 25 से 30 किसानों ने जान दी है। इस बार यह संख्या सैकड़ों में पहुंच जाएगी।
- चंद्रप्रकाश, किसान