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Barabanki News: मालिनपुर में खुलेगी प्रदेश की पहली हाईटेक केला टिश्यू कल्चर लैब
Thu, 18 Dec 2025 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 18 Dec 2025 01:48 AM IST
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बाराबंकी। खेती के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा बाराबंकी जिला एक बार फिर प्रदेश में अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है। बनीकोडर ब्लॉक के मालिनपुर स्थित कृषि विभाग के फाॅर्म में प्रदेश की पहली हाईटेक केला टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव दरियाबाद के विधायक एवं प्रदेश सरकार में खाद एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को भेजा था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है।
बीते 12 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरख ब्लॉक के दौलतपुर गांव में प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा के खेत में आयोजित किसान सम्मेलन व पाठशाला में पहुंचे थे। यहां विकसित केला टिश्यू कल्चर तकनीक से प्रभावित होकर कृषि मंत्री ने बाराबंकी में हाईटेक लैब स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके बाद सक्रिय हुए राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने प्रस्ताव में बताया कि मालिनपुर कृषि फाॅर्म में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और यहां लैब की स्थापना से न केवल बाराबंकी, बल्कि अयोध्या मंडल सहित पूरे पूर्वांचल के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यहां लैब स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
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यह है केला टिश्यू कल्चर
केला टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक विधि है, जिसमें केले के पौधे को बीज के बजाय प्रयोगशाला में विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पौधे के एक छोटे से ऊतक (टिश्यू) से हजारों स्वस्थ और एक समान गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं। यह तकनीक पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जिससे रोगमुक्त पौध तैयार होती है।
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टिश्यू कल्चर केले के प्रमुख फायदे...
रोगमुक्त पौध: लैब में तैयार पौधों में बीमारी का खतरा बेहद कम होता है।
एक समान गुणवत्ता: सभी पौधे एक जैसी बढ़वार और उत्पादन देते हैं।
अधिक उत्पादन: पारंपरिक खेती की तुलना में उपज अधिक होती है।
कम समय में फसल: टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे जल्दी फल देने लगते हैं।
उपलब्धता: किसानों को बाहर से महंगी पौध मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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फोटो- 25
खेती में लागत कम व फायदा ज्यादा होगा। बाराबंकी ही नहीं अयोध्या, सुलतानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर समेत पूरे पूर्वांचल के किसानों के लिए यह लैब वरदान साबित होगी। यहां से किसानों को उन्नत किस्म की केले की पौध आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। हाईटेक लैब केले की खेती में नई क्रांति लाएगा।
- सतीश चंद्र शर्मा, राज्यमंत्री
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बीते 12 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरख ब्लॉक के दौलतपुर गांव में प्रगतिशील किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा के खेत में आयोजित किसान सम्मेलन व पाठशाला में पहुंचे थे। यहां विकसित केला टिश्यू कल्चर तकनीक से प्रभावित होकर कृषि मंत्री ने बाराबंकी में हाईटेक लैब स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके बाद सक्रिय हुए राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने प्रस्ताव में बताया कि मालिनपुर कृषि फाॅर्म में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और यहां लैब की स्थापना से न केवल बाराबंकी, बल्कि अयोध्या मंडल सहित पूरे पूर्वांचल के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यहां लैब स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
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यह है केला टिश्यू कल्चर
केला टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक विधि है, जिसमें केले के पौधे को बीज के बजाय प्रयोगशाला में विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पौधे के एक छोटे से ऊतक (टिश्यू) से हजारों स्वस्थ और एक समान गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं। यह तकनीक पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जिससे रोगमुक्त पौध तैयार होती है।
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टिश्यू कल्चर केले के प्रमुख फायदे...
रोगमुक्त पौध: लैब में तैयार पौधों में बीमारी का खतरा बेहद कम होता है।
एक समान गुणवत्ता: सभी पौधे एक जैसी बढ़वार और उत्पादन देते हैं।
अधिक उत्पादन: पारंपरिक खेती की तुलना में उपज अधिक होती है।
कम समय में फसल: टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे जल्दी फल देने लगते हैं।
उपलब्धता: किसानों को बाहर से महंगी पौध मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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फोटो- 25
खेती में लागत कम व फायदा ज्यादा होगा। बाराबंकी ही नहीं अयोध्या, सुलतानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर समेत पूरे पूर्वांचल के किसानों के लिए यह लैब वरदान साबित होगी। यहां से किसानों को उन्नत किस्म की केले की पौध आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। हाईटेक लैब केले की खेती में नई क्रांति लाएगा।
- सतीश चंद्र शर्मा, राज्यमंत्री