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भक्तों ने भगवती के नौंवे स्वरूप सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा कर मांगी कृपा
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 15 Apr 2016 11:48 PM IST
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बाराबंकी में शुक्रवार को नवरात्र के नौंवे दिन उधौली स्थित ज्वालादेवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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नवरात्र के अंतिम दिन देवी भगवती के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए शुक्रवार सुबह से ही मंदिरों पर पूजा अर्चना के लिए भक्ताें की भीड़ जुटी रही। देवी मंदिराें में विधिवत् हवन पूजन के साथ ही घराें में भी कन्या भोज का दौर सुबह से लेकर दोपहर तक चला। आरती के बीच सुख समृद्धि की देवी महालक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व यह आठ प्रकार की सिद्धियां कही गई है। जिस साधक ने इनको प्राप्त कर लिया वह सुख-सृमद्धि का प्रतीक बन गया। शुक्रवार को घरों व मंदिरों में श्रद्धालुओं ने हवन पूजन कर कन्याओं को भोजन करा उन्हें उपहार दिया गया।
देवी भक्तों ने घरों व मंदिरों में नारियल, फल, फूल, मेवा, सिंदूर, चूड़ियां आदि चढ़ाकर मंगल कामना की। विधि-विधान से पूजा अर्चना कर साधकाें ने कृपा मांगी। शहर के बड़ी देवी मंदिर, छोटी देवी मंदिर, फूलमती माता मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, भुईंहारे देवी मंदिर आदि सभी मंदिराें में घंटा घड़ियाल की गूंज के बीच माता की स्तुति की गई।
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मंदिरों में हुए हवन से वातावरण सुवासित हो उठा। बड़ी देवी मंदिर में भक्ताें ने हवन कुंड में आहुति देकर मां से मंगल की कामना की। माता की आराधना करने के बाद भक्ताें ने कन्या भोज का आयोजन कराया। कन्याओं को भोजन कराने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही।
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मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व यह आठ प्रकार की सिद्धियां कही गई है। जिस साधक ने इनको प्राप्त कर लिया वह सुख-सृमद्धि का प्रतीक बन गया। शुक्रवार को घरों व मंदिरों में श्रद्धालुओं ने हवन पूजन कर कन्याओं को भोजन करा उन्हें उपहार दिया गया।
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देवी भक्तों ने घरों व मंदिरों में नारियल, फल, फूल, मेवा, सिंदूर, चूड़ियां आदि चढ़ाकर मंगल कामना की। विधि-विधान से पूजा अर्चना कर साधकाें ने कृपा मांगी। शहर के बड़ी देवी मंदिर, छोटी देवी मंदिर, फूलमती माता मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, भुईंहारे देवी मंदिर आदि सभी मंदिराें में घंटा घड़ियाल की गूंज के बीच माता की स्तुति की गई।
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मंदिरों में हुए हवन से वातावरण सुवासित हो उठा। बड़ी देवी मंदिर में भक्ताें ने हवन कुंड में आहुति देकर मां से मंगल की कामना की। माता की आराधना करने के बाद भक्ताें ने कन्या भोज का आयोजन कराया। कन्याओं को भोजन कराने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही।