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Barabanki News: बारिश ने तपिश से सिकुड़े गेहूं की चमक भी उड़ाई

Sat, 12 Apr 2025 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sat, 12 Apr 2025 12:24 AM IST
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The rain also took away the shine from the wheat which had shrunk due to the heat
बाराबंकी। मार्च माह में तेज धूप के कारण पहले से ही सिकुड़े गेहूं का दाने की चमक बेमौसम हुई बारिश ने उड़ा दी है। इससे उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले काफी हद तक घट जाने की आशंका से किसान परेशान हैं। कृषि विज्ञानियों ने भी पानी में भीगे गेहूं के सड़ने की आशंका भी जताई है।
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कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि भीगने के बाद गेहूं के दाने की चमक जरूर चली जाएगी। धूप लगने पर गेहूं भखुर (सड़) सकता है। ऐसे गेहूं को पीसने के बाद बनने वाला आटा भी हल्का लाल पड़ जाता है। उसे खाने पर स्वाद में भी अंतर आता है। भीगे गेहूं का मूल्य व्यापारी दो से ढाई सौ रुपये प्रति क्विंटल देते हैं। भीगे गेहूं के आटे का रंग भी बदल जाता है। इसलिए सस्ता बिकता है। इस कारण जितने प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में खड़ी व पड़ी है, उस पूरी फसल को नुकसान हुआ है।
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बारिश से हुए नुकसान आंकलन का तरीका कृषि विभाग, कृषि विज्ञानियों, किसानों व व्यापारियों का अलग-अलग है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया हो वह टोल फ्री नंबर पर फोन कर नुकसान के बारे में जानकारी दे सकते हैं। इसके बाद टीम सर्वे करेगी। जिन किसानों का फसल बीमा नहीं है, उनका सर्वे कराने के बारे में कोई कार्ययोजना नहीं हैं।
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जितनी जल्दी हो करें मड़ाई

कृषि विज्ञानी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि किसान धूप निकलने पर गेहूं फसल को पलट कर सुखा लें और जल्दी मड़ाई करके गेहूं व भूसा घर पहुंचाने का प्रबंध करें। गेहूं की खड़ी फसल में तेज धूप निकलने पर दाना झड़ने की संभावना है। धूप से अरहर की फसल में दाना झड़ने से नुकसान होगा। बारिश के कारण सब्जी में टमाटर, बैगन, कद्दू वर्गीय लौकी, परवल, सूरजमुखी को भी नुकसान हुआ है। इससे बचाव के लिए किसान सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें।
उप कृषि निदेशक श्रवण कुमार का कहना है कि फसल का बीमा कराने वाले किसान नुकसान के बारे में टोल फ्री नंबर 14447 पर फोन करें या कार्यालय में लिखित सूचना दें। तभी टीम सर्वे करेगी। सामान्य रूप से नुकसान के सर्वे का कोई निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुआ है।

जिला कृषि अकिधारी राजित राम ने बताया कि बारिश में गेहूं की फसल का उत्पादन कम नहीं होगा, क्योंकि फसल पक चुकी है। इस बार समय से पहले तेज धूप के कारण पिछले वर्ष से औसतन आठ प्रतिशत उत्पादन क्राप कटिंग में कम निकल रहा है। पिछले साल गेहूं की उत्पादकता जिले में 45.50 प्रति हेक्टेयर तक थी, इस बार किसी तहसील में उत्पादकता 36 तो किसी में 37 क्विंटल आ रही है।
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