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Barabanki News: जज ने दिया विवेचक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

Wed, 10 Jun 2026 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Wed, 10 Jun 2026 12:43 AM IST
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The judge ordered action against the investigator.
बाराबंकी। अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने एक गैर इरादतन हत्या के मामले में विवेचक की गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। जज ने निर्दोष व्यक्ति गंगाराम को दोषमुक्त करते हुए विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया। पुलिस महानिदेशक को विवेचक धर्मेंद्र कुमार यादव के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र भी जारी किया है।
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मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र का यह मामला दो जनवरी 2017 का है, जब राशिद खान की बाइक गंगापुर के सिमली नदी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इलाज के दौरान लखनऊ के ट्राॅमा सेंटर में राशिद खान की मौत हो गई थी। घटनास्थल पर एक मफलर, जूते और बाइक का लेग गार्ड मिला था। विवेचक धर्मेंद्र कुमार यादव ने छह जनवरी 2017 को मफलर की पहचान गंगाराम से कराई। गंगाराम को आरोपी बनाकर उसी दिन उसकी बाइक बरामद कर ली गई।
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48 दिन बाद 20 फरवरी 2017 को शिव नारायण ने बताया कि गंगाराम उसकी बाइक ले गया था। गंगाराम के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, फिर भी विवेचक ने गैर इरादतन हत्या का आरोपपत्र पेश किया। गंगाराम ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वह बाइक चलाना नहीं जानता। उसने आरोप लगाया कि वादी ने अपने बेटे को बचाने के लिए उसे फंसाया है।
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विचारण के दौरान न्यायालय ने पाया कि गंगाराम ने यह घटना नहीं की थी। अतः उसे संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने विवेचक की जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि शिव नारायण ने 48 दिन तक बाइक के बारे में क्यों नहीं बताया। जबकि बाइक छह जनवरी 2017 को ही बरामद हो चुकी थी।

विवेचक की गलतियां--
विवेचक ने शिव नारायण को, जो घटना का प्रमुख साक्षी था, आरोपपत्र में साक्षी नहीं बनाया। मफलर की पहचान करने वाले गौसापुर के किसी व्यक्ति का नाम केस डायरी में अंकित नहीं किया गया। मफलर और जूते की फर्द भी विवेचक द्वारा नहीं बनाई गई थी। इन सबूतों को न्यायालय के समक्ष विचारण के दौरान प्रस्तुत भी नहीं किया गया। न्यायालय ने इसे विवेचक के पदीय कर्तव्य की घोर उपेक्षा माना है।
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