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Barabanki News: कुर्क होगा भाई के नाम बैनामा किया मकान
Wed, 30 Apr 2025 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 30 Apr 2025 12:44 AM IST
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बाराबंकी। 24 साल पहले फैमली कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर उसके पति को पांच हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद पति ने आदेश का अनुपालन नहीं किया। उल्टा अपनी संपत्ति को कुर्क होने से बचाने के लिए अपने स्वामित्व के मकान का बैनामा भी भाई के नाम कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए फैमिली कोर्ट के अपर मुख्य न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने डीएम को आदेश दिया कि भाई के नाम बैनामा किए गए मकान को कुर्क कर नीलाम किया जाए। ताकि पीड़िता को भरण-पोषण भत्ता की धनराशि दिलाई जा सके।
मामला जिले के ही एक गांव का है। गांव निवासी विद्या नामक महिला का विवाह बुधराम के साथ 28 साल पहले हुआ था। आपसी विवाद के बाद बुधराम ने पत्नी विद्या को घर से निकाल दिया तो उसने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण (गुजारा) के लिए अपील दाखिल की। 11 अक्टूबर 2001 को फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया कि पति द्वारा पीड़िता को पांच हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता की धनराशि दी जाए।
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बुधराम ने आदेश के बाद भी गुजारा भत्ता की धनराशि पत्नी को नहीं दी। उल्टा वसूली की नोटिस जारी होने पर वर्ष 2003 में अपने घर का बैनामा जानबूझकर भाई मुन्नालाल के नाम कर दिया। 13 दिसंबर 2024 को फैमिली कोर्ट ने विपक्षी के हिस्से का मकान कुर्क करने का आदेश दिया तो पता चला कि वह तो भाई मुन्ना लाल के नाम पर है।
इस संबंध में जारी नोटिस का जवाब न देने पर कोर्ट ने माना कि बुधराम ने जानबूझकर मुन्नालाल के नाम बैनामा इस लिए कराया ताकि संपत्ति की कुर्की न हो सके। सुनवाई कर रहे फैमिली कोर्ट के अपर मुख्य न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीमकोर्ट के एक फैसले के बाद अब वह संपत्ति भी कुर्क हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए फैमिली कोर्ट के अपर मुख्य न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने डीएम को आदेश दिया कि भाई के नाम बैनामा किए गए मकान को कुर्क कर नीलाम किया जाए। ताकि पीड़िता को भरण-पोषण भत्ता की धनराशि दिलाई जा सके।
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मामला जिले के ही एक गांव का है। गांव निवासी विद्या नामक महिला का विवाह बुधराम के साथ 28 साल पहले हुआ था। आपसी विवाद के बाद बुधराम ने पत्नी विद्या को घर से निकाल दिया तो उसने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण (गुजारा) के लिए अपील दाखिल की। 11 अक्टूबर 2001 को फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया कि पति द्वारा पीड़िता को पांच हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता की धनराशि दी जाए।
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बुधराम ने आदेश के बाद भी गुजारा भत्ता की धनराशि पत्नी को नहीं दी। उल्टा वसूली की नोटिस जारी होने पर वर्ष 2003 में अपने घर का बैनामा जानबूझकर भाई मुन्नालाल के नाम कर दिया। 13 दिसंबर 2024 को फैमिली कोर्ट ने विपक्षी के हिस्से का मकान कुर्क करने का आदेश दिया तो पता चला कि वह तो भाई मुन्ना लाल के नाम पर है।
इस संबंध में जारी नोटिस का जवाब न देने पर कोर्ट ने माना कि बुधराम ने जानबूझकर मुन्नालाल के नाम बैनामा इस लिए कराया ताकि संपत्ति की कुर्की न हो सके। सुनवाई कर रहे फैमिली कोर्ट के अपर मुख्य न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीमकोर्ट के एक फैसले के बाद अब वह संपत्ति भी कुर्क हो सकती है।