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Barabanki News: मिटने को है नहर का अस्तित्व, मशीनरी के लिए जारी हो गए 2.61 करोड़
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बाराबंकी। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र में सुमली नदी से निकली अडौरा पंप नहर का नामोनिशान ही मिट रहा है। पांच गांवों के सैकड़ों बीघा खेतों की प्यास बुझाने वाली यह नहर कहीं पट गई है, कहीं रास्ता बना दिया गया है। हद तो यह कि बिजली के खंभे तक गाड़ दिए गए, लेकिन विभाग के अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं। अफसरों की लापरवाही का नतीजा है कि शासन ने नहर की मशीनरी आदि के आधुनिकीकरण के लिए 2.61 करोड़ जारी कर दिए हैं। इस पर किसानों का कहना है कि पानी तो तब आएगा जब नहर होगी।
दरअसल, पंप नहर उन स्थानों पर बनाई जाती है, जहां सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं होता। यह छोटी नहर पंप के सहारे नदियों से निकल जाती है। बाराबंकी में गोमती, कल्याणी, सुमली आदि नदियों से निकाली गई कुल 12 पंप नहरें हैं। इन्हीं में से एक है सूरतगंज ब्लॉक की अडौरा पंप नहर। यह नहर सुमली नदी से निकली हुई है और करीब तीन किमी लंबी है। इस नहर को पांच गांवों मटेहना, अडोरा, बसंतापुर, जदूपूर और ढकवा के खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह केवल बसंतापुर तक ही किसी तरह पानी पहुंचा पा रही है। उधर, इस नहर को लेकर 2.61 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई है, ताकि इसकी मशीनरी ठीक कर सफाई की जा सके। ऐसे में किसानों का कहना कि जब नहर पाटकर रास्ते बना दिए गए हैं और बिजली के खंभे गाड़ दिए गए हैं तो पानी किधर से आएगा।
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किसान परेशान, बढ़ गई लागत
अडौरा पंप नहर के अस्तित्वहीन हो जाने से किसान ट्यूबवेल और निजी सिंचाई साधनों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे उनकी लागत में भारी इजाफा हो रहा है। किसानों का कहना है कि अगर नहर दुरुस्त होती तो उन्हें मुफ्त में सिंचाई का पानी मिल जाता।
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पावर कॉर्पोरेशन को समन
अडौरा पंप नहर का निरीक्षण किया गया है। बिजली के खंभे गाड़ने के कारण पावर कॉर्पोरेशन को समन जारी किया गया था, लेकिन खंभे नहीं हटाए गए है। इसके लिए फिर नोटिस जारी करेंगे। नहर को सही करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। आधुनिकीकरण के लिए मिले बजट से मशीनरी आदि नई होगी।
- श्याम राय, एसडीओ लघु डाल नहर उपखंड
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दरअसल, पंप नहर उन स्थानों पर बनाई जाती है, जहां सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं होता। यह छोटी नहर पंप के सहारे नदियों से निकल जाती है। बाराबंकी में गोमती, कल्याणी, सुमली आदि नदियों से निकाली गई कुल 12 पंप नहरें हैं। इन्हीं में से एक है सूरतगंज ब्लॉक की अडौरा पंप नहर। यह नहर सुमली नदी से निकली हुई है और करीब तीन किमी लंबी है। इस नहर को पांच गांवों मटेहना, अडोरा, बसंतापुर, जदूपूर और ढकवा के खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह केवल बसंतापुर तक ही किसी तरह पानी पहुंचा पा रही है। उधर, इस नहर को लेकर 2.61 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई है, ताकि इसकी मशीनरी ठीक कर सफाई की जा सके। ऐसे में किसानों का कहना कि जब नहर पाटकर रास्ते बना दिए गए हैं और बिजली के खंभे गाड़ दिए गए हैं तो पानी किधर से आएगा।
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किसान परेशान, बढ़ गई लागत
अडौरा पंप नहर के अस्तित्वहीन हो जाने से किसान ट्यूबवेल और निजी सिंचाई साधनों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे उनकी लागत में भारी इजाफा हो रहा है। किसानों का कहना है कि अगर नहर दुरुस्त होती तो उन्हें मुफ्त में सिंचाई का पानी मिल जाता।
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पावर कॉर्पोरेशन को समन
अडौरा पंप नहर का निरीक्षण किया गया है। बिजली के खंभे गाड़ने के कारण पावर कॉर्पोरेशन को समन जारी किया गया था, लेकिन खंभे नहीं हटाए गए है। इसके लिए फिर नोटिस जारी करेंगे। नहर को सही करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। आधुनिकीकरण के लिए मिले बजट से मशीनरी आदि नई होगी।
- श्याम राय, एसडीओ लघु डाल नहर उपखंड