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Barabanki News: अवैध अस्पतालों पर विभाग मेहरबान, न लाइसेंस निरस्त न हुई कार्रवाई

Thu, 11 Dec 2025 01:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 11 Dec 2025 01:32 AM IST
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The department is kind to illegal hospitals, neither licenses are revoked nor any action is taken
बाराबंकी। जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या 277 के आसपास है। इसके अलावा जितने भी अस्पताल संचालित हाे रहे हैं, वह सभी अवैध हैं। अवैध रूप से संचालित अस्पतालों में ज्यादातर अप्रशिक्षित कर रहे हैं। इनके गलत इलाज की वजह से आए दिन किसी न किसी की जान जा रही है। परिजनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद विभागीय अधिकारी जागते हैं। अस्पताल बंद कराते हैं। नोटिस जारी करते हैं। लेकिन न तो लाइसेंस निरस्त होता है और न ही अन्य कार्रवाई की जाती है। विभाग की मेहरबानी का आलम यह है कि कुछ दिन बाद ही ऐसे अस्पताल फिर से संचालित होने लगते हैं।
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केस एक
ब्लड लेकर आते तब तक चली गई जान
मोहम्मदपुरखाला के बड़ाका पुरवा के राजू की पत्नी आरती को प्रसव पीड़ा पर 28 मार्च को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के नाम पर एक लाख रुपये जमा कराए गए। हालत बिगड़ने पर खून लाने को कहा। परिजन जब तक खून लेकर पहुंचते, प्रसूता की जान चली गई। परिजनों ने हंगामा किया, लेकिन कार्रवाई आज तक लंबित है।
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बाक्स
केस दो
पेट दर्द में लगा दिया इंजेक्शन, हो गई मौत
पेटदर्द की शिकायत पर 31 मार्च को बैसनपुर निवासी राजेंद्र को सूरतगंज में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर मौजूद डॉक्टर ने इंजेक्शन और ग्लूकोज लगाने के बाद घर भेज दिया। रात में हालत बिगड़ने पर सीएचसी लेकर आ रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई। परिजनों ने गलत इलाज का आरोप लगा हंगामा भी किया लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं की जा सकी।
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केस तीन
अप्रशिक्षित ने कर दिया ऑपरेशन निकल गई जान
कोठी में एक अस्पताल संचालक ने छह दिसंबर को डफरापुर की मुनिशरा का पथरी का ऑपरेशन कर दिया। कुछ देर बाद ही महिला की हालत बिगड़ने लगी है परिजन उसे लेकर दूसरे अस्पताल की जाने की तैयारी में थे कि उसकी रास्ते में मौत हो गई।

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केस चार
हालत बिगड़ने पर किया रेफर, हो गई मौत
टीकापुर निवासी करन ने प्रसव पीड़ा पर पत्नी सुधा को बिशुनपुर स्थित एक अस्पताल ले गए। जहां पर मौजूद नर्स ने प्रसव कराया, कुछ देर बाद नवजात की मौत हो गई। प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उसे रेफर कर दिया गया सीएचसी देवा ले जा रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
वर्जन
अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की समय-समय पर जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। जहां पर शिकायतें मिलती हैं, उन्हें बंद कराकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाती है।
डॉ. एलबी गुप्ता, नोडल अधिकारी एसीएमओ चिकित्सा एवं पंजीयन
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