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Barabanki News: संघर्ष की तपिश से चमके सितारे, सीमित संसाधनों में भरी उड़ान
Thu, 14 May 2026 01:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 14 May 2026 01:38 AM IST
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बाराबंकी। कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। सीबीएसई 12वीं के बुधवार को घोषित परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। इस बार बाराबंकी के मेधावियों ने केवल अंक हासिल नहीं किए, बल्कि संघर्ष, मेहनत और सपनों की ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया।
जिले के टॉपर तन्मय साहू की सफलता आज हर उस पिता की आंखों में चमक बनकर उभरी, जो अपने बच्चों के लिए संघर्ष करता है। कोटवाधाम में छोटा सा ढाबा चलाने वाले विनय साहू ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनका बेटा एक दिन पूरे जिले का नाम रोशन करेगा। तन्मय ने अपनी मेहनत और लगन से पिता के सपनों को नई ऊंचाई दी है।
वहीं मोहम्मदपुर खाला की विभूति ने यह संदेश दिया कि बेटियां परिस्थितियों से हारने के लिए नहीं, इतिहास रचने के लिए जन्म लेती हैं। घरेलू जिम्मेदारियों और सीमित साधनों के बीच पढ़ाई जारी रखकर उसने शानदार सफलता हासिल की। उसकी कामयाबी ग्रामीण अंचल की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखती हैं। दरियाबाद में कापी किताब की छोटी से दुकान चलाने वाले देवेंद्र के बेटे प्रशूक ने मेधावियों की सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर साबित कर दिया की दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ भी संभव है। इन नतीजों ने एक बार फिर यह सोच बदल दी कि सफलता केवल बड़े शहरों और आधुनिक सुविधाएं मिलने पर ही प्राप्त होती है।
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जिले के टॉपर तन्मय साहू की सफलता आज हर उस पिता की आंखों में चमक बनकर उभरी, जो अपने बच्चों के लिए संघर्ष करता है। कोटवाधाम में छोटा सा ढाबा चलाने वाले विनय साहू ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनका बेटा एक दिन पूरे जिले का नाम रोशन करेगा। तन्मय ने अपनी मेहनत और लगन से पिता के सपनों को नई ऊंचाई दी है।
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वहीं मोहम्मदपुर खाला की विभूति ने यह संदेश दिया कि बेटियां परिस्थितियों से हारने के लिए नहीं, इतिहास रचने के लिए जन्म लेती हैं। घरेलू जिम्मेदारियों और सीमित साधनों के बीच पढ़ाई जारी रखकर उसने शानदार सफलता हासिल की। उसकी कामयाबी ग्रामीण अंचल की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखती हैं। दरियाबाद में कापी किताब की छोटी से दुकान चलाने वाले देवेंद्र के बेटे प्रशूक ने मेधावियों की सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर साबित कर दिया की दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ भी संभव है। इन नतीजों ने एक बार फिर यह सोच बदल दी कि सफलता केवल बड़े शहरों और आधुनिक सुविधाएं मिलने पर ही प्राप्त होती है।
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