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स्टेडियम व तरणताल देख बिफरे खेल निदेशक
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:47 PM IST
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निरीक्षण कर लौट रहे खेल निदेशक ने केडी सिंह बाबू स्टेडियम मेन गेट के पास बने तरण ताल के जर्जर भवन देख अपनी कार रुकवा दी। कार से उतरे और तरणताल भवन में प्रवेश किया। गेट पर ताला लटक रहा था। चाभी न मिलने से खेल निदेशक कुछ देर खड़े रहे। चाभी मिली तो वह तरणताल के सामने खड़े थे। बदहाली देख कर बिफरे। बाबू से पूछा तो वह बार-बार इस्टीमेट की दुहाई देने लगा। जिस पर उनका पारा चढ़ गया। कहा इस्टीमेट छोड़ो, काम कराओ। इससे पहले उन्होंने स्टेडियम परिसर का निरीक्षण किया। जिला क्रीड़ाधिकारी व कोच भी कोर्ट बनाए जाने की सही दिशा नहीं बता सके। उन्होंने स्टेडियम में होने वाली हर एक्टिविटी का बारीकी से जायजा लिया। कार्य सुधार की चेतावनी दी।
खेल निदेशक आरपी सिंह शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे केडी सिंह बाबू स्टेडियम पहुंचे। निदेशक को आया देख सभी के हाथ पांव फूल गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पूरे स्टेडियम का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन भवन की प्रगति का जायजा लिया। स्टेडियम के मैप देख उन्होंने अब तक हुए कोर्ट व अन्य निर्माण के संबंध में जानकारी ली। वह जिला क्रीड़ाधिकारी के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वापसी के दौरान उन्होंने स्टेडियम गेट के पास बने तरणताल की जर्जर हालत देख कार रुकवा दी और उतर कर तरणताल भवन के अंदर पहुंच गए। तरणताल की स्थिति और भी खराब थी।
उन्होंने वहां वरिष्ठ लिपिक रामसुमिरन से बजट खर्च के विषय में पूछा। जिस पर वह बोले की मोटर बनवाई गई है। इस साल आए बजट पर बताया कि पैसा खर्च नहीं हो सका है। कारण पूछने पर बाबू ने बार-बार इस्टीमेट बनाए जाने की बात कही। जिस पर वह बिफर उठे। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा कि इस्टीमेट-इस्टीमेट क्या लगा रखा है, काम कराओ। इसके बार उन्होंने पूरे भवन का निरीक्षण किया और उसके सुधार के लिए दिशा निर्देश दिए।
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खेल निदेशक आरपी सिंह शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे केडी सिंह बाबू स्टेडियम पहुंचे। निदेशक को आया देख सभी के हाथ पांव फूल गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पूरे स्टेडियम का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन भवन की प्रगति का जायजा लिया। स्टेडियम के मैप देख उन्होंने अब तक हुए कोर्ट व अन्य निर्माण के संबंध में जानकारी ली। वह जिला क्रीड़ाधिकारी के कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वापसी के दौरान उन्होंने स्टेडियम गेट के पास बने तरणताल की जर्जर हालत देख कार रुकवा दी और उतर कर तरणताल भवन के अंदर पहुंच गए। तरणताल की स्थिति और भी खराब थी।
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उन्होंने वहां वरिष्ठ लिपिक रामसुमिरन से बजट खर्च के विषय में पूछा। जिस पर वह बोले की मोटर बनवाई गई है। इस साल आए बजट पर बताया कि पैसा खर्च नहीं हो सका है। कारण पूछने पर बाबू ने बार-बार इस्टीमेट बनाए जाने की बात कही। जिस पर वह बिफर उठे। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा कि इस्टीमेट-इस्टीमेट क्या लगा रखा है, काम कराओ। इसके बार उन्होंने पूरे भवन का निरीक्षण किया और उसके सुधार के लिए दिशा निर्देश दिए।
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