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Barabanki News: ननद-भौजाई की जोड़ी सिखा रही चिकनकारी का हुनर
Sun, 15 Sep 2024 05:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 15 Sep 2024 05:11 AM IST
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बाराबंकी/हरख। विकास खंड हरख क्षेत्र की ग्राम पंचायत भानमऊ में ननद भौजाई की जोड़ी समूहों का गठन कर महिलाओं को चिकनकारी का हुनर सिखा रही हैं। इससे जुड़ कर गांवों की महिलाएं न केवल सशक्त हो रही हैं वरन उनकी आमदनी भी बढ़ रही है। इसके साथ ही ओडीओपी से जुड़े होने के कारण इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को अलग-अलग राज्यों में आयोजित होने वाले आयोजनों में भी स्टॉल लगाने का मौका मिलता है। इससे समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रतिमाह तीन से पांच हजार रुपये की आमदनी हो जाती है।
भानमऊ ग्राम पंचायत की महिलाओं की गिनती उन पिछड़े गांवों में होती थी, जहां रोजगार के संसाधनों के साथ ही शिक्षा का स्तर भी काफी कम है। करीब चार वर्ष पहले यहां की मरजीना बानो और उनकी ननद नफीसा ने आरजू महिला स्वयं सहायता समूह एवं कामयाबा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया और चिकनकारी का काम शुरू कर दिया। दोनों समूहों में 10-10 महिलाएं बतौर सदस्य शामिल हैं, जबकि कई और महिलाएं भी इनसे चिकनकारी की कला सीखने आती हैं। समूह के माध्यम से अब तक 150 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया जा चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों समूहों ने मिलकर देवा-महादेवा में लगने वाले मेलों में हर साल अपने तैयार किए उत्पाद के स्टॉल लगाए हैं। इसके साथ ही नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, सरस मेला, हरियाणा के सूरजकुंड, गुड़गांव एवं झारखंड के दुमका, दिल्ली, मुंबई प्रांतों में अपने उत्पादों के शिविर भी लगाए हैं। लखनऊ से सरस मेला के लिए भी इन दोनों समूहों का नाम प्रदर्शनी लगाने के लिए शामिल किया गया है।
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समूह तैयार कर रहा कई उत्पाद
मरजीना बानो बताती हैं कि समूह द्वारा कपड़ों की खरीद करने के बाद पहले उन्हें सिला जाता है। इसमें मुख्य रूप से कुर्ता, सलवार, साड़ी, शर्ट, प्लाजो, जेंट्स कुर्ते, ओडीओपी में शामिल स्टोल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके लिए पहले 32 टांकों पर चिकनकारी की जाती थी, अब 36 टांकों पर की जा रही है ताकि अलग-अलग गुणवत्ता के कपड़े तैयार हो सकें।
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भानमऊ ग्राम पंचायत की महिलाओं की गिनती उन पिछड़े गांवों में होती थी, जहां रोजगार के संसाधनों के साथ ही शिक्षा का स्तर भी काफी कम है। करीब चार वर्ष पहले यहां की मरजीना बानो और उनकी ननद नफीसा ने आरजू महिला स्वयं सहायता समूह एवं कामयाबा महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया और चिकनकारी का काम शुरू कर दिया। दोनों समूहों में 10-10 महिलाएं बतौर सदस्य शामिल हैं, जबकि कई और महिलाएं भी इनसे चिकनकारी की कला सीखने आती हैं। समूह के माध्यम से अब तक 150 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया जा चुका है।
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पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों समूहों ने मिलकर देवा-महादेवा में लगने वाले मेलों में हर साल अपने तैयार किए उत्पाद के स्टॉल लगाए हैं। इसके साथ ही नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, सरस मेला, हरियाणा के सूरजकुंड, गुड़गांव एवं झारखंड के दुमका, दिल्ली, मुंबई प्रांतों में अपने उत्पादों के शिविर भी लगाए हैं। लखनऊ से सरस मेला के लिए भी इन दोनों समूहों का नाम प्रदर्शनी लगाने के लिए शामिल किया गया है।
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समूह तैयार कर रहा कई उत्पाद
मरजीना बानो बताती हैं कि समूह द्वारा कपड़ों की खरीद करने के बाद पहले उन्हें सिला जाता है। इसमें मुख्य रूप से कुर्ता, सलवार, साड़ी, शर्ट, प्लाजो, जेंट्स कुर्ते, ओडीओपी में शामिल स्टोल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके लिए पहले 32 टांकों पर चिकनकारी की जाती थी, अब 36 टांकों पर की जा रही है ताकि अलग-अलग गुणवत्ता के कपड़े तैयार हो सकें।