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साहब! दो दिन से नहीं मिला खाना
अमर उजाला/बाराबंकी
Updated Sat, 19 Aug 2017 11:56 PM IST
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का ढेमा गांव पूरी तरह से घाघरा नदी के पानी में डूबा हुआ है। लेकिन गांव में बसे लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। नीचे घरों में पानी भरा है, लेकिन जीवन छत पर बीत रहा है। शनिवार को बाढ़ पीड़ितों को गांव से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए जब एसडीएम राहुल यादव गांव पहुंचे तो बाढ़ में फंसी एक महिला बोली, साहब दो दिनों से भूखी हूं और नदी का पानी पीकर जिंदा हूं, लेकिन गांव नहीं छोड़ूंगी। बाढ़ पीड़ितों की यह हिम्मत देख एसडीएम भी हैरत में पड़ गए।
एसडीएम की नाव ढेमा गांव पहुंची तो एक परिवार छत पर बैठा था और उस घर का युवक परिवार की जीविका चलाने को लेकर कमाने के लिए परदेश गया था। वह घर बिल्कुल गांव से बाहर था, जहां दूर-दूर तक कोई घर नहीं था। उस परिवार को भी बांध पर चलने को कहा गया, लेकिन वे लोग इसके लिए तैयार नहीं हुए। तभी छत से रंभा की आवाज आई, डॉक्टर साहब हैं बिटिया की तबीयत खराब है।
एसडीएम के इशारे पर छोटी बोट से दो लोग उस घर तक पहुंचे और बच्ची को बड़ी नाव पर लाए, जहां डॉक्टर ने उसका इलाज किया। इस पूरी पंचायत का हाल देखें तो स्कूल, ट्रैक्टर, खलिहान सब कुछ डूब गया है, लेकिन इनकी हिम्मत ने इनको यहीं रोके रखा हैं। जहां चारों ओर सिर्फ पानी है। शायद यही कारण है कि घाघरा भी उनकी हिम्मत के आगे हारने लगी है। उसके बाद किठुरी की ओर नाव गई, जहां एक दर्जन घरों का टोला है और उनके घरों में पानी पहुंच गया है।
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यहां रहने वाले परिवार भी जाने को तैयार नहीं हुए। इसी दौरान प्रशासन की नाव थोड़ी देर के लिए नदी में फंस गई, उसे निकालने में आधे घंटे का समय लगा। उसी दौरान एक बच्चा छोटू सिर पर कुछ लेकर छाती तक पानी में जा रहा था।
उससे पूछा गया, तो बोला हमको घाघरा में सड़क पता है, हम अपने घर पहुंच जाएंगे। मदद करनी है तो कुछ खाने के लिए हो तो दे दीजिए। जिस पर उसे लंच पैकेट दिए गए। नाव यहां से टिकरी की ओर आगे बढ़ी ही थी तभी यहां की मड़ला रोते हुए घर की चारपाई से कूदकर नाव के पास आई और बोली साहब दो दिनों से भूखी हूं। घाघरा का पानी पीकर जिंदा हूं। हमको बाहर निकाल लो। उसकी पीड़ा देख सभी दंग रह गए। उसे नाव पर बिठा कर उसके परिवारीजनों के पास पहुंचाया गया।
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एसडीएम की नाव ढेमा गांव पहुंची तो एक परिवार छत पर बैठा था और उस घर का युवक परिवार की जीविका चलाने को लेकर कमाने के लिए परदेश गया था। वह घर बिल्कुल गांव से बाहर था, जहां दूर-दूर तक कोई घर नहीं था। उस परिवार को भी बांध पर चलने को कहा गया, लेकिन वे लोग इसके लिए तैयार नहीं हुए। तभी छत से रंभा की आवाज आई, डॉक्टर साहब हैं बिटिया की तबीयत खराब है।
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एसडीएम के इशारे पर छोटी बोट से दो लोग उस घर तक पहुंचे और बच्ची को बड़ी नाव पर लाए, जहां डॉक्टर ने उसका इलाज किया। इस पूरी पंचायत का हाल देखें तो स्कूल, ट्रैक्टर, खलिहान सब कुछ डूब गया है, लेकिन इनकी हिम्मत ने इनको यहीं रोके रखा हैं। जहां चारों ओर सिर्फ पानी है। शायद यही कारण है कि घाघरा भी उनकी हिम्मत के आगे हारने लगी है। उसके बाद किठुरी की ओर नाव गई, जहां एक दर्जन घरों का टोला है और उनके घरों में पानी पहुंच गया है।
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यहां रहने वाले परिवार भी जाने को तैयार नहीं हुए। इसी दौरान प्रशासन की नाव थोड़ी देर के लिए नदी में फंस गई, उसे निकालने में आधे घंटे का समय लगा। उसी दौरान एक बच्चा छोटू सिर पर कुछ लेकर छाती तक पानी में जा रहा था।
उससे पूछा गया, तो बोला हमको घाघरा में सड़क पता है, हम अपने घर पहुंच जाएंगे। मदद करनी है तो कुछ खाने के लिए हो तो दे दीजिए। जिस पर उसे लंच पैकेट दिए गए। नाव यहां से टिकरी की ओर आगे बढ़ी ही थी तभी यहां की मड़ला रोते हुए घर की चारपाई से कूदकर नाव के पास आई और बोली साहब दो दिनों से भूखी हूं। घाघरा का पानी पीकर जिंदा हूं। हमको बाहर निकाल लो। उसकी पीड़ा देख सभी दंग रह गए। उसे नाव पर बिठा कर उसके परिवारीजनों के पास पहुंचाया गया।